ध्वस्त पत्रकारिता ! आंकड़ों का खेल – “इंडिया” कैसे बनाएगी सरकार ?

नफरत के बिज बो कर सत्ता का तांडव करना और सत्ता के अकूत धन पर पत्रकारिता को बेचकर सलाहकार बन जाने की होड़ ने पाप का पारा इतना बढ़ा दिया था कि जनता के मन का निर्मल पानी खौल कर तेज़ाब बन गया. नफरत की आग में सुलग रही जनता जब खुद बेरोजगारी और गरीबी से तड़पने लगी तो उसने इस तेज़ाब को उसी नफरत की फैक्ट्री पर फेंक दिया जहाँ से ये नफरती तेज़ाब आ रहा था. नतीजा ये है कि इस तेजाब से अधजला वो नफरती आत्मा न कुर्सी पर बैठ पा रहा है और न ही अपने उस परमात्मा से ज्ञान प्राप्त कर पा रहा है जिसने उसे भेजा था. प्रभु राम के नाम पर असत्य का सौदा करने वाले ये भी भूल गये कि श्री राम तो सत्य के प्रेमी है. दलालगिरी को अपना पेशा बनाकर पत्रकार से सलाहकार बने इन अमीर चाटुकारों को ये याद रखना चाहिए कि एक दिन इनकी औलादें इनके नफरती किस्सों को सुनकर इनका बहिस्कार कर देंगी. देशप्रेमियों की जलती लाशों पर ख़बरों का मिर्च डालने वाले ये भूल गये कि ईश्वर पाप की सजा ऐसा देता है कि मौत नहीं मिलती जीवन तड़प तड़प कर गुजरता है.

हमने कई कहानियां सुनी हैं कि कई नेता सत्ता पाने के लिए हर हथकंडे अपनानाते हैं लेकिन उन हथकंडों में फसकर अपने ईमान को बेचने वाला केवल अपने आपको धोखा नहीं देता बल्कि अपने देश से गद्दारी भी करता है. लोकतंत्र के चार स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया एक दुसरे के पूरक हैं. लेकिन इसमें सबसे बड़ी भूमिका मीडिया यानि पत्रकारिता की बन गयी कि अगर इन तीनों स्तंभों में से कोई गड़बड़ हो तो बाकी के दो चौथे स्तम्भ से मिलकर उसे ठीक करने का काम करें ताकि इस देश की सुन्दरता बनी रहे.

अब सवाल है कि एक बार फिर मीडिया यानि वो वाली मीडिया अभी भी आस में है कि आत्मा को परमात्मा का ज्ञान हो और अख़बारों से लेकर टीवी तक भव्य अवतरण हो. प्रभु राम को लाने का दावा करने वालों का रामजन्मभूमि में प्रभु राम ने साथ छोड़ दिया. यहाँ भाजपा के लल्लू सिंह हार गये और सपा के अवधेश प्रसाद करीब 55 हज़ार वोटों से जीत गये. रावण भगवान् शिव का भक्त था, उसे अमर रहने का वरदान मिला था लेकिन सावधानी से उसके प्राण उसके नाभि में थे, जब महाविद्वान और शक्तिशाली रावण का अहंकार बढ़ा तो सत्य और मर्यादा के प्रेमी श्रीराम ने एक सामान्य मानव रूप में उनका अंत कर दिया, तब पूरी प्रकृति श्रीराम के साथ खड़ी थी.

खैर अब सवाल है कि NDA के साथी कौन है और इंडिया गठबंधन के साथी कौन है? कौन कितने सीटों पर चुनाव लड़ा और कितनी सीटें जीती? इधर भाजपा ने 10 लाख से नरेंद्र मोदी के जीत का दावा किया था. लेकिन वो करीब डेढ़ लाख के अंतर से ही जीत पाएं. लोकसभा चुनाव में परिणाम के बाद भाजपा को 240 सीटें मिली तो इंडिया गठबंधन को 234 सीटें. अब इस चुनाव को कांग्रेस ने अकेले नहीं लड़ा कई छोटे बड़े दलों को मिलकर एक गठबंधन बनाया जिसका नाम इंडिया गठबंधन रखा. इधर भाजपा ने तैयारी कर ली. महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी दो धड़े में बट गयी, एक धड़ा महाराष्ट्र में भाजपा के साथ राज्य सरकार में और दूसरा धड़ा कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन में है, कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस की गठबंधन सरकार थी, अचानक जेडीएस के विधायक गायब हो गये और भाजपा जेडीएस की सरकार बन गयी, दुबारा चुनाव हुए तो कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बन गयी और अब जेडीएस भाजपा के साथ NDA गठबंधन में है, बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की जेडीयू ने तेजस्वी यादव की आरजेडी के साथ मिलकर सरकार बनाया, इंडिया गठबंधन के आधारशिला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई फिर पलट गये, खबरें आती थी कि नरेन्द्र मोदी और नितीश कुमार में नहीं पटती है लेकिन पटने लगी, बिच सरकार में सेंध हुआ और नितीश ने भाजपा के साथ बिहार में सरकारी बनायीं, आज नितीश NDA में हैं, कांग्रेस गठबंधन की सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहे राम विलास पासवान की मृत्यु के बाद उनकी पार्टी LJP में फूट पड़ी, फिर किसी तरह उनके चिराग पासवान ने पार्टी को संभाला वो आज NDA में हैं, कई छोटे दल जो कांग्रेस के सहयोगी रहे, वो आज NDA में हैं, मुस्लिम आरक्षण का समर्थन करने वाले, गुजरात दंगे के बाद मोदी का विरोध करने वाले, 2018 में NDA से नाता तोड़ने वाले, स्किल डेवलपमेंट घोटाले में जेल जाने वाले चंद्रबाबू नायडू और उनकी पार्टी TDP आज यानि 2024 में NDA में शामिल है.

अब बीजेपी के पास 240 सीटें हैं वो अकेले सरकार नहीं बना सकती, वो NDA की सरकार बनाए का दावा कर रही है. NDA के दल TDP के पास 16 सीट, JDU के पास 12 सीट, शिंदे ग्रुप की शिवसेना के पास 7 सीट, LJP के पास 5 सीट, JP, JDS, RLD के पास 2-2 सीटें और AGP,अजीत पवार वाली NCP, SKM, ADAL, AJSU, HAM के पास 1-1 सीट है. अब NDA के पास कुल 292 सीटें हैं. यानि बहुमत के आंकड़े 272 से ज्यादा. खबर ये भी है की NDA की बैठक हो रही है, राष्ट्रपति के सामने सरकार बनाने का प्रस्ताव पेश होगा, 8 जून को नरेन्द्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेगें.

खैर इधर इंडिया गठबंधन के पास 234 सीटें हैं. 38 सीटों की जरुरत है. अब उम्मीद कुछ पार्टियों से है जो भाजपा के विचारधाराओं से मतभेद रखती हैं जैसे नितीश कुमार के पास 12 सीटें हैं, LJP के पास 5 सीट, YSR कांग्रेस की 4 सीट, HAM के पास 1 सीट, BJD की 1 सीट, चद्रशेखर रावण की 1 सीट और अन्य करीब 14 अन्य सीटें. अगर ये इंडिया गठबंधन के साथ आ जाते हैं तो आंकड़ा 272 का पहुँच सकता है.

अब सवाल चंद्रबाबू नायडू का है, उनके पास 16 सीटें हैं, वो नरेन्द्र मोदी के विचारधाराओं के विपरीत हैं, अगर वो इंडिया गठबंधन में आते हैं तो तस्वीर बदल सकती है.

इधर दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया है। कांग्रेस 99 सीट जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी और सपा 37 सीटें जीतकर तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी।

उत्तर प्रदेश की लखीमपुर खीरी सीट से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी चुनाव हार गए हैं। 2021 में टेनी के बेटे ने प्रदर्शन कर रहे किसानों पर अपनी कार चढ़ा दी थी। इसमें 8 लोगों की मौत हुई थी।

साथ ही मोदी सरकार में मंत्री स्मृति ईरानी, महेंद्र नाथ पांडेय और कौशल किशोर भी चुनाव हार गए हैं। उधर फैजाबाद (अयोध्या) में बीजेपी प्रत्याशी लल्लू सिंह को भी हार मिली।

राहुल गांधी केरल के वायनाड और यूपी के रायबरेली से चुनाव जीत गए। वहीं कैसरगंज सीट से करणभूषण सिंह ने भी बाजी मारी। करणभूषण पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बेटे हैं। बृजभूषण पर पहलवानों ने यौन शोषण का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्हें टिकट नहीं मिला।

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