उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अलीगढ़ (Aligarh) निवासी आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के इस्तीफे की खबर से उनके गृह जनपद में हलचल मच गई है। जैसे ही यह सूचना नौरंगाबाद डोरी नगर स्थित उनके आवास पर पहुंची, परिवार के सदस्य भावुक हो गए और गहरी निराशा जताई। परिजनों का कहना है कि रिंकू ने हमेशा ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को प्राथमिकता दी, लेकिन उन्हें अपेक्षित सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिली।

परिवार ने जताई पीड़ा और निराशा:
रिंकू के पिता सौदान सिंह राही ने बताया कि उनके बेटे ने अपने पूरे सेवा काल में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार उन्हें बड़े आर्थिक प्रलोभन दिए गए, यहां तक कि लोग पैसे लेकर घर तक पहुंचे, लेकिन उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। उनके अनुसार, इसी वजह से रिंकू पर जानलेवा हमला भी हुआ, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं और एक आंख की रोशनी प्रभावित हुई, फिर भी उन्होंने अपने कर्तव्यों से पीछे हटने का रास्ता नहीं चुना।
सरकार पर उपेक्षा का आरोप:
परिजनों ने आरोप लगाया कि उनकी ईमानदारी और क्षमता के अनुरूप उन्हें जिम्मेदारी नहीं दी गई। रिंकू के ताऊ रघुवीर सिंह उसवा का कहना है कि अन्य अधिकारियों की तरह उन्हें भी महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती मिलनी चाहिए थी। उनका मानना है कि यदि उन्हें उचित पद दिया जाता, तो वे इस्तीफा देने जैसा निर्णय नहीं लेते।
संघर्ष से भरा रहा पारिवारिक जीवन:
रिंकू सिंह राही का परिवार संघर्ष और मेहनत की मिसाल माना जाता है। उनके पिता ने आटा चक्की चलाकर बच्चों की पढ़ाई कराई और उन्हें उच्च पदों तक पहुंचाया। परिवार के अन्य सदस्य भी शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे यह परिवार समाज में एक प्रेरणा के रूप में देखा जाता है।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय:
रिंकू सिंह राही के इस्तीफे ने प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा को जन्म दिया है। उनके परिवार के अन्य सदस्य भी विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं, जिससे यह मामला और अधिक ध्यान आकर्षित कर रहा है।
इस्तीफे की वजह और तैनाती का मामला:
बताया गया कि वर्ष 2023 बैच के इस अधिकारी को परिवीक्षा अवधि पूरी करने के बाद शाहजहांपुर (Shahjahanpur) में एसडीएम पद पर तैनात किया गया था। वहां एक घटना के बाद उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया। अपने त्यागपत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि उनके पास कोई विशेष कार्य नहीं था और उन्हें प्रभावी जिम्मेदारियों से दूर रखा गया। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति, डीओपीटी (DoPT) और राज्य के संबंधित विभागों को भेजा है, साथ ही पूर्व विभाग में वापसी का अनुरोध भी किया है।
कार्यशैली और निर्णय पर सवाल:
रिंकू सिंह राही ने अपने त्यागपत्र में यह भी कहा कि उन्होंने अपनी तैनाती के दौरान पारदर्शिता लाने के प्रयास किए, लेकिन उनके कार्यों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यदि उनकी कार्यशैली स्वीकार्य नहीं थी, तो उन्हें स्पष्ट रूप से दंडित किया जाना चाहिए था, न कि बिना दायित्व के संबद्ध स्थिति में रखा जाना।
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