रिपोर्टर: सऊद अंसारी
आज दिनांक 24-12-2025 को लखनऊ (Lucknow) स्थित दारुल उलूम नदवतुल उलमा (Darul Uloom Nadwatul Ulama) में एक धार्मिक और शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर संस्थान की हिफ्ज कक्षा के छात्र अब्दुर्रहमान खान पुत्र मोहम्मद तलहा खान नदवी ने तीन वर्षों की सतत मेहनत और अनुशासन के साथ पवित्र कुरान का हिफ्ज मुकम्मल किया। छात्र की इस उपलब्धि को लेकर मदरसे के शिक्षकों, छात्रों और मौजूद लोगों में विशेष हर्ष और गर्व का माहौल देखा गया।

कुरान के हिफ्ज की यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक ज्ञान बल्कि आत्मिक साधना, स्मरण शक्ति और अनुशासन की भी परीक्षा मानी जाती है। अब्दुर्रहमान खान ने कम उम्र में यह मुकाम हासिल कर यह साबित किया कि निरंतर अभ्यास, मार्गदर्शन और समर्पण से कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। उनकी इस सफलता को संस्थान के लिए भी एक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

दस्तारबंदी का गरिमामय आयोजन:
हिफ्ज की तकमील के बाद मस्जिद दारुल उलूम नदवतुल उलमा (Masjid Darul Uloom Nadwatul Ulama) में दस्तारबंदी का विशेष आयोजन किया गया। इस गरिमामय मौके पर नदवा के शैखुल हदीस मौलाना मोहम्मद खालिद नदवी गाजीपुरी ने अपने हाथों से अब्दुर्रहमान खान के सिर पर दस्तार बांधी। दस्तारबंदी के इस पल को उपस्थित लोगों ने सम्मान और भावुकता के साथ देखा, क्योंकि यह किसी भी हाफिज के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण माना जाता है।
कुरान की अज़मत पर प्रभावशाली खिताब:
दस्तारबंदी के बाद मौलाना मोहम्मद खालिद नदवी गाजीपुरी ने कुरान की अज़मत और उसके संदेशों पर विस्तार से खिताब पेश किया। उन्होंने कहा कि कुरान केवल पढ़ने की किताब नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाली मार्गदर्शिका है। उन्होंने हाफिज बनने की जिम्मेदारी पर भी प्रकाश डाला और कहा कि जिसने कुरान को अपने सीने में सुरक्षित किया है, उस पर अमल और चरित्र की पवित्रता और भी अधिक आवश्यक हो जाती है।
खिताब के दौरान यह भी कहा गया कि कुरान का हिफ्ज करने वाले छात्र समाज के लिए प्रेरणा होते हैं और आने वाली पीढ़ियों को सही राह दिखाने में अहम भूमिका निभाते हैं। वक्ता के विचारों को उपस्थित लोगों ने गंभीरता से सुना और सराहा।
दुआ और मिठाई वितरण से हुआ समापन:
खिताब के उपरांत सामूहिक दुआ का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र की सफलता, संस्थान की तरक्की और समाज में अमन व भाईचारे के लिए दुआ मांगी गई। दुआ के बाद कार्यक्रम का समापन छात्रों के बीच मिठाई वितरण के साथ हुआ। इस दौरान मदरसे के छात्रों में उत्साह और खुशी स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
दारुल उलूम नदवतुल उलमा (Darul Uloom Nadwatul Ulama) में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक छात्र की व्यक्तिगत उपलब्धि का उत्सव था, बल्कि यह धार्मिक शिक्षा, परिश्रम और अनुशासन के महत्व को भी रेखांकित करता है। अब्दुर्रहमान खान की यह सफलता अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
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