उत्तर प्रदेश में भले सत्ता में भाजपा मजबूती से है लेकिन भाजपा जिलाध्यक्षों की लिस्ट नए सियासी समीकरण में उलझ गई है। बताया जा रहा है की पंचायत चुनाव-2026 और विधानसभा चुनाव-2027 में भाजपा महिलाओं और दलितों की भागीदारी बाधा सकती है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश चुनाव समिति ने करीब डेढ़ महीने की विचार विमर्श के बाद 70 जिलाध्यक्षों की सूची तैयार की लेकिन वो अटक गयी और शीर्ष नेतृत्व के फरमान के बाद चुनाव प्रभारी महेंद्रनाथ पांडेय और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह हर प्रदेश मुख्यालय में बैठक कर रहे हैं। सूची पर अब नए सिरे से मंथन कर रहे हैं। ख़बरों के अनुसार शीर्ष नेतृत्व ने 98 संगठनात्मक जिलों के जिलाध्यक्षों में 25 फीसदी दलितों और महिलाओं को शामिल करने आदेश जारी किया है। यही वजह है कि जिलाध्यक्षों की सूची अटकी है।

सूत्र कहते हैं कि हर जिले या मंडल पर भाजपा के किसी न किसी प्रभावशाली नेता दखल है और वो अपने मनमुताबिक जिलाध्यक्ष को चुनना चाहता है, कुछ नेता तो ऐसे हैं जिनकी रणनीति से भाजपा को असफलता हासिल हुई लेकिन वो प्रभाव को कम करना नहीं चाहते, जाती समीकरण का खेल तो ऐसा है कि वोट बैंक हो या न हो, अपने बिरादरी के नेताओं को कुर्सी पर बैठने की जद्दोजहद भी चल रही है। कहा जा रहा है कि भाजपा शीर्ष नेत्रित्व इसे बखूबी समझ रहा है और इसलिए अपनी रणनीति में किसी भी कीमत सेंध नहीं लगने देना चाहता।
जिलों से आए पैनल में दलित-महिलाओं के ज्यादा नाम नहीं
खबर के अनुसार, नए समीकरण से चुनाव अधिकारी की चुनौती बढ़ गई है। जिलों से जो पैनल भी आए थे, उनमें महिला और दलितों के नाम ज्यादा नहीं थे। अब दोनों को प्रत्येक क्षेत्र में दलित और महिलाओं की संख्या बढ़ाने के साथ जातीय समीकरण का गुणा गणित करना पद रहा है। यही नहीं हर क्षेत्र से योग्य दलित और महिलाओं के नाम मंगाने पड़ रहे हैं। पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ऐसे जिलाध्यक्ष का चयन करने की चुनौती है जो संगठन के कार्यक्रमों और अभियानों का संचालन करने के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी तालमेल बेहतर बना सके।
पहले सिर्फ 4 महिला और 4 दलित जिलाध्यक्ष थे
शाहजहांपुर महानगर में शिल्पी गुप्ता, जालौन में उर्जिता दीक्षित, प्रयागराज गंगापार कविता पटेल और मऊ में नूपुर अग्रवाल जिलाध्यक्ष हैं। 15 सितंबर 2023 को जारी सूची में 98 में से सिर्फ 4 जिलों में महिला जिलाध्यक्ष नियुक्त की गई थी। महिला जिलाध्यक्षों की संख्या बढ़कर अब 10 से 12 तक हो सकती है।
अनुसूचित जाति से सिर्फ चार जिलाध्यक्ष
बीते दिनों समाज कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह से मुलाकात कर कम से कम 18 जिलाध्यक्ष एससी वर्ग से बनाने का प्रस्ताव दिया था। उनका तर्क है कि 18 जिले एससी बहुल हैं, इसलिए वहां वर्ग से ही जिलाध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। रायबरेली में बुद्धिलाल पासी, सोनभद्र में नंदलाल, सिद्धार्थनगर में कन्हैया पासवान और रामपुर में हंसराज जाटव सहित चार एससी वर्ग के जिलाध्यक्ष हैं। अब नए फॉर्मूले से अब दलित वर्ग के जिलाध्यक्षों की संख्या 10-13 तक हो सकती है।

सवा महीने बाद भी सूची का इंतजार
जिलाध्यक्षों की चुनाव प्रक्रिया के लिए भाजपा ने 5 जनवरी, 2025 को लखनऊ में कार्यशाला किया और 7 जनवरी से सभी पर्यवेक्षकों को नामांकन दाखिल कराने के लिए जिलों में भेजा गया। वहीँ 10 जनवरी तक नामांकन दाखिल कराए जाने थे और सभी पर्यवेक्षकों को नामांकन की रिपोर्ट 11 जनवरी तक प्रदेश मुख्यालय में पेश करनी थी। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने 15 जनवरी तक जिलाध्यक्षों की घोषणा करने का समय दिया था लेकिन करीब एक महीने 8 दिन का समय बीतने के बाद भी जिलाध्यक्षों की सूची का अता-पता नहीं है।
