Hathras Case: नीचे से तो गई हर रिपोर्ट…फिर ऊपरवालों पर रियायत क्यों?

Hathras Case: अज्ञानता के अन्धकार से पैदा होते अन्धविश्वास ने न केवल वर्षों से शिक्षा से वंचित रहे लोगों को अन्धविश्वास के अन्धकार में धकेला बल्कि वेद, पुराण और विज्ञान के ज्ञान से वंचित कर दिया. हाथरस में एक इंसान भोले बाबा का नाम रखकर तथाकथित प्रवचन देने वाला बाबा कैसे लोगों के लिए भगवान् बन जाता है वो एक गंभीर सवाल है. उसके कार्यक्रम में सैंकड़ों लोगों की मौत होती है लेकिन वो जिम्मेदार नहीं है!

2 जुलाई 2024, दिन मंगलवार, मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम के नाम से सूरजपाल उर्फ नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा का सत्संग हाथरस जनपद के सिकंदराराऊ तहसील अंतर्गत नेशनल हाइवे पर ग्राम फुलरई में आयोजित किया गया। सत्संग के अंत में हादसे ने कई की जान ले ली। कहा जा रहा है कि एक सामान्य पुलिसकर्मी से बाबागिरी का पेशा करने वाले सूरजपाल के पास अकूत संपत्ति है. खैर इस सूरजपाल के व्यक्तिगत जीवन पर चर्चा कर हम खबर की गंभीरता को कम नहीं करना चाहते, अपने आप को भगवान् का दर्जा देने वाले और संत समाज की उदारता को बदनाम करने वाले का व्यक्तिगत जीवन और विचारधारा कैसी होगी इसका आकलन आप लगा सकते हैं. वैसे इस कार्यक्रम में एक नहीं 78 आयोजनकर्ता थे.

ख़बरों के अनुसार इस कार्यक्रम में करीब 1 लाख से ज्यादा लोग शामिल थे, बताया जा रहा है कि बाबा के चरणों की धुल के लिए भगदड़ हुई और संस्कार का ज्ञान लेने पहुंचे लोगों ने न केवल मानवता का ज्ञान त्यागा बल्कि स्वार्थ के ज्ञान को इस कदर अपनाया कि कुछ खुद मौत मौत का शिकार हुए और कुछ ने दूसरों को रौंद डाला. रास्ता सकरा था, बगल में खेत था, खेत में दलदल था और भगदड़ में उस दलदल में कई महिलाएं और बच्चे गिर गयें, लोग उनको रौंद कर भागते रहे हैं और उनके नाक और मुंह में गंदगी भरती गयी, उनके प्राण निकलते गयें, सत्संग के ज्ञान में न जाने वो कौन सा स्वार्थ वाला ज्ञान था जिसने लोगों को इस कदर पागल बनाया कि उन्होंने अपने पैरों न केवल कईयों की जान ली बल्कि कईयों के हड्डियों को तोड़ते गयें. सवाल केवल वयस्कों का नहीं था, सवाल तो उन मासूमों को लेकर था जो अपने अभिभावकों के आगया के पालन में अपने प्राण को गँवा बैठे. लेकिन क्या प्रशानिक व्यवस्था इस आयोजन के लिए तैयार थी?

सुबह से ही सिकंदराराऊ में भीड़ जुटने लगी थी। 11 बजे तक एक लाख तक की भीड़ थी। मगर फिर भी कोई बड़ा अफसर यहां नहीं आया। ऐसा भी नहीं था कि हाथरस में दूसरा कोई बड़ा कार्यक्रम हो रहा हो। जबकि एलआईयू स्तर से भी एक लाख से अधिक भीड़ का अनुमान लगाकर रिपोर्ट दी गई। बाद में भी एलआईयू के लोग भीड़ को लेकर अपडेट करते रहे मगर अधिकारियों की नींद फिर भी नहीं टूटी। इतना ही नहीं, ये बात एसआईटी के समक्ष भी रखी गई कि आयोजन वाले दिन थाना स्तर से लेकर जिला स्तर तक पर सूचना दी जाती रही कि भारी भीड़ जुट रही है। नौ बजे सबसे ज्यादा जोर देकर खबर दी गई। जब जिला स्तर से फोर्स या इंतजाम की खबर नहीं मिली तो फिर थाने की सभी चौकियों का स्टाफ यहां लगा दिया गया। फिर 11 बजे भी थाना स्तर से सूचना दी गई कि भीड़ काफी अधिक है। आयोजन के सेवादार या अन्य लोग पुलिस को अंदर नहीं घुसने दे रहे हैं। हालात काबू से बाहर हैं। बावजूद इसके किसी वरिष्ठ अधिकारी ने जिले से चलकर तहसील मुख्यालय पर आना उचित नहीं समझा और मजिस्ट्रेट ने भी मौके पर जाना उचित नहीं समझा।

वो सवाल जिसकी लापरवाहियों ने जिंदगियों को उजाड़ दिया

  • इंस्पेक्टर ने पुलिस के आला अफसरों को पत्र लिखकर एक लाख की भीड़ जुटने की सूचना देकर फोर्स लगाने की मांग की थी
  • इंस्पेक्टर का यह पत्र पुलिस के आला अफसरों से लेकर थाने तक पहुंचा मगर तैनाती की गई 69 पुलिस कर्मियों की
  • फायर ब्रिगेड पर पत्र पहुंचा तो वहां से भी केवल एक गाड़ी भेजी गई।
  • 500 बसें और 1500 से ज्यादा छोटे वाहन थे, हाईवे जाम था फिर भी ट्रैफिक पुलिस के 4 लोग लगाए गए
  • किसी डॉक्टर की तैनाती भी मौके पर नहीं की गई
  • एलआईयू की रिपोर्ट को भी अनदेखा किया गया
  • केवल दो एंबुलेंस मौके पर तैनात की गईं थीं

काली वर्दी वालों की भगदड़ बनी मुख्य वजह
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में सेवादारों के व्यवहार का उल्लेख किया है। उसी में मौके के स्टाफ आदि ने भी एसआईटी को जानकारी दी है कि काली वर्दी पहने सेवादार बाबा के काफिले को निकलवाने में लगे थेे। उनके निकलते ही उन्होंने भीड़ को धकियाना शुरू किया और खुद निकलने लगे। बस इसी बीच भगदड़ मच गई। अगर वे शायद भीड़ को नहीं धकियाते तो शायद महिलाएं न गिरतीं और भगदड़ में उनके गिरने पर मौत नहीं होतीं।

एसआईटी रिपोर्ट का आधार

इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के नाम पर तहसील पुलिस प्रशासन के अधिकारियों पर गाज गिर गई है। एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर यह माना गया है कि निचले स्तर से सूचनाएं नहीं दी गईं। सही से समन्वय नहीं किया गया। मगर उन रिपोर्टों को नहीं देखा जा रहा, जिनमें पत्राचार किया गया है। फोर्स आदि की अनुमति मांगी गई है।

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में छह अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की है। जिनमें एसडीएम पर मौके पर न जाने का आरोप है, जबकि पुलिस के अधिकारियों पर सूचनाएं न देने व सही से समन्वय न करने का आरोप है। इसी आधार पर ये कार्रवाई तय की गई है। बाकी आयोजकों व सेवादारों को हादसे का मुख्य जिम्मेदार माना गया है। जिनकी वजह से ये घटना हुई है।

लेकिन बाबा का क्या? कौन बचा रहा है इस बाबा को? क्या अब मौतों के सौदागर से वोटों की राजनीति होगी? पुलिस ने इस केस में एफआईआर दर्ज की लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि इस एफआईआर में उस स्वंयभू बाबा का नाम ही नहीं है, जिसके उपदेश सुनने के लिए लाखों लोगों की भीड़ जुटी थी। अब सवाल ये भी उठता है कि क्या खुद को भगवान बताने वाले इस स्वंयभू बाबा के प्रवचन नेताओं को भी पसंद हैं?

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