लखनऊ (Lucknow) में काशीराम जी सांस्कृतिक स्थल स्मृति उपवन आशियाना में आयोजित हिंदुस्तान हस्तशिल्प महोत्सव 2025 ने स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय हुनर को नई दिशा देने का संदेश दिया। यह महोत्सव देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक भारत, श्रेष्ठ भारत और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को समर्पित रहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने स्वदेशी उत्पादों के बढ़ते महत्व पर अपने विचार साझा किए। महोत्सव का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को मंच प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था।

स्वदेशी उत्पादों के उपयोग पर जोर:
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता तभी संभव है जब देश का हर नागरिक स्वदेशी उत्पादों को अपनाए। महोत्सव में देशभर से आए हस्तशिल्पियों ने अपने उत्कृष्ट कार्य का प्रदर्शन किया, जिसे लोगों ने सराहा। यह आयोजन न केवल पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है।
हस्तशिल्पियों के हुनर का प्रदर्शन:
महोत्सव में विभिन्न राज्यों से आए हस्तशिल्प कलाकारों ने अपने उत्पादों को प्रदर्शित कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। लकड़ी, धातु, मिट्टी, वस्त्र और प्राकृतिक उत्पादों की सैकड़ों श्रेणियों ने आयोजन को विशेष बना दिया। आयोजन स्थल पर उमड़ी भीड़ ने यह दर्शाया कि लोग आज भी भारतीय कला और संस्कृति के रंगों से बेहद प्रभावित हैं।
विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने की उपस्थिति:
कार्यक्रम में पूर्व महापौर संयुक्ता भाटिया (Samyukta Bhatia), विधायक राजेश्वर सिंह (Rajeshwar Singh), पूर्व विधायक सुरेश तिवारी (Suresh Tiwari), पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री संदीप बंसल (Sandeep Bansal), सभासद नागेंद्र सिंह (Nagendra Singh), भोजपुरी समाज के अध्यक्ष प्रभुनाथ राय (Prabhunath Rai), अवधी संस्थान के अध्यक्ष विनोद मिश्रा (Vinod Mishra), भाजपा नेता संतोष श्रीवास्तव (Santosh Srivastava) और समीर शेख (Sameer Sheikh) सहित कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
आयोजन टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका:
महोत्सव के संयोजक अरुण प्रताप सिंह (Arun Pratap Singh) और गुंजन वर्मा (Gunjan Verma) ने कार्यक्रम संचालन एवं समन्वय की जिम्मेदारी निभाई। उनके मार्गदर्शन में हस्तशिल्पियों को उचित मंच प्राप्त हुआ और आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आए लोगों ने भी आयोजन टीम के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए इसे अत्यंत सार्थक बताया।
स्थानीय कलाकारों के लिए अवसर:
इस आयोजन ने स्थानीय कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। प्रतिनिधियों का कहना था कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल क्षेत्रीय कला को बढ़ावा देते हैं, बल्कि कलाकारों के आर्थिक विकास में भी सहायक होते हैं। स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग से इन कलाकारों के भविष्य को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम:
महोत्सव में यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि आत्मनिर्भर भारत का मार्ग स्वदेशी उत्पादों को सम्मान देने से ही प्रशस्त होगा। आयोजन में लोगों ने घरेलू उत्पादों के महत्व को समझते हुए स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को अपनी प्राथमिकता बनाने पर जोर दिया।