गाज़ीपुर में मौत को दावत देता स्कूल…

।। Special Report ।। सरकारी महकमे में फाइलें चींटी की चाल चलती है जिसे अपने गंतव्य तक पहुंचने में कई साल लग जाते हैं ऐसे में बीते हुए सालों में उन फाइलों पर कोई निर्णय नहीं लेने की वजह से कई लोगों की जान जोखिम में डालना पड़ता है कुछ ऐसा ही नजारा गाजीपुर के नूरुद्दीनपुर प्राथमिक विद्यालय की है जहां पर 2 साल पहले विद्यालय के धवस्तीकरण की कार्रवाई पूर्ण हो चुकी है लेकिन अभी तक विद्यालय का धवस्तीकरण नहीं हुआ जिसके चलते छात्र और अध्यापक डर के साए में रहने को मजबूर रहते हैं इतना ही नहीं इस विद्यालय को प्रतिवर्ष बारिश के मौसम में पलायन का दंश भी झेलना पड़ता है।

जनपद गाजीपुर का नूरुद्दीन पूरा प्राथमिक विद्यालय है जहां पर विद्यालय के नाम पर तीन से चार कमरे बनाए गए थे लेकिन सभी कमरे पूर्ण रूप से जर्जर हो चुके हैं जो तस्वीरों में भी देखा जा सकता है की कैसे छत के बीम लटके पड़े हैं ऐसे में मात्र एक रूम सही होने के कारण उसी रूम में एक से लेकर कक्षा 5 तक के छात्रों की एक साथ पढ़ाई कराई जाती है जिनमें छात्रों की संख्या तकरीबन 100 के पार है ऐसे में सवाल उठता है कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत बेसिक शिक्षा विभाग निजी विद्यालयों से दो-दो हाथ करने का दावा करता है ऐसे में जब एक ही कमरे में 5 पाठ के चलेंगे तो कैसे निजी विद्यालयों से दोनों हाथ करेंगे यह एक बड़ा सवाल है वही कमरों की वजह से छात्र और टीचर के साए में रहते हैं कभी-कभी छात्र जर्जर रूम में जाकर खेला करते हैं जिससे हमेशा हादसे की अंदेशा बनी रहती है।

वहीं विद्यालय के प्रिंसिपल ने बताया कि इस विद्यालय धवस्तीकरण की कार्रवाई 2 साल पहले पूरी हो चुकी है लेकिन ना जाने किन कारणों से अभी तक इसे ध्वस्त नहीं किया गया है इतना ही नहीं यह विद्यालय प्रत्येक वर्ष बारिश के मौसम में पानी से पूरी तरह से भर जाता है जिसके चलते यहां के छात्र और टीचर को पलायन कर पास के विद्यालय पर शरण लेना पड़ता है इन सभी समस्याओं को लेकर इन लोगों ने एबीएसए को कई बार पत्र लिख चुके हैं लेकिन अभी तक उनकी समस्याओं का कोई निपटारा नहीं हुआ है।

वहीं इस मामले पर बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राज से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जर्जर विद्यालयों के धवस्तीकरण की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है बहुत ज्यादा उन विद्यालयों का धवस्तीकरण करा दिया जाएगा ऐसे में वहां के जो भी छात्र और टीचर है उन्हें दूसरे विद्यालयों पर शिफ्ट कर उनके शिक्षा की पूरी व्यवस्था की जा रही है।

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