लगातार दो दिनों की तेजी के बाद आज 5 फरवरी को गोल्ड और सिल्वर मार्केट में तेज गिरावट दर्ज की गई। वायदा बाजार और सर्राफा बाजार दोनों में सोने और चांदी के भाव नीचे आए हैं। मुनाफा वसूली और कमजोर फिजिकल डिमांड के चलते निवेशकों को झटका लगा है। बाजार में आई इस गिरावट ने हाल के रिकॉर्ड स्तरों के बाद की स्थिति को साफ तौर पर सामने रखा है।
वायदा बाजार में चांदी के दामों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। वहीं सोने के भाव भी हजारों रुपये तक लुढ़क गए। जानकारों का कहना है कि हालिया उछाल के बाद निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफा वसूली की, जिससे कीमतों पर दबाव बना।
MCX में चांदी और सोने की स्थिति:
वायदा बाजार MCX (Multi Commodity Exchange) में चांदी के दाम करीब 28 हजार रुपये यानी लगभग 11 प्रतिशत गिर गए। इसके बाद 1 किलो चांदी का भाव घटकर करीब 2.40 लाख रुपये पर आ गया। वहीं सोने के दाम में भी करीब 3 हजार रुपये यानी लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। MCX पर 10 ग्राम सोना करीब 1.50 लाख रुपये पर कारोबार करता दिखा।
इससे पहले 29 जनवरी से 2 फरवरी के बीच भी बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। उस दौरान चांदी की कीमतों में करीब 1.60 लाख रुपये की कमी आई थी, जबकि सोना लगभग 26 हजार रुपये सस्ता हुआ था। लगातार उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
सर्राफा बाजार में आज के भाव:
सर्राफा बाजार में भी आज गिरावट दर्ज की गई। India Bullion and Jewellers Association (IBJA) के अनुसार, चांदी 30,230 रुपये गिरकर 2,52,232 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 3,613 रुपये कम होकर 1,53,012 रुपये पर आ गया। दोपहर 12 बजे के आसपास जारी हुए इन भावों से साफ है कि बाजार में दबाव बना हुआ है।
MCX और सर्राफा बाजार में अंतर क्यों:
अक्सर निवेशकों के मन में यह सवाल उठता है कि MCX और सर्राफा बाजार के दाम अलग-अलग क्यों होते हैं। MCX एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जहां सोने-चांदी की खरीद-बिक्री शेयर बाजार की तरह होती है। यहां हर सेकंड बोलियां लगती हैं, जिससे कीमतें तेजी से बदलती रहती हैं।
वहीं सर्राफा बाजार में फिजिकल सोना और चांदी की खरीद होती है। इसमें धातु को लाने, ले जाने और स्टोर करने का खर्च भी जुड़ा होता है, जिस कारण दोनों बाजारों के भाव अलग नजर आते हैं।
गिरावट की दो प्रमुख वजह:
पहली वजह प्रॉफिट बुकिंग मानी जा रही है। हाल के दिनों में सोने-चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। ऐसे में निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए बड़े पैमाने पर बिकवाली की।
दूसरी वजह फिजिकल डिमांड में कमी है। ऑल टाइम हाई के बाद बाजार में फिजिकल डिमांड कमजोर पड़ी है। साथ ही औद्योगिक उपयोग को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं, जिसका असर कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।
मार्जिन बढ़ने से बढ़ा दबाव:
सेबी रजिस्टर्ड कमोडिटी एक्सपर्ट Anuj Gupta (अनुज गुप्ता) के अनुसार, Chicago Mercantile Exchange (CME) ने कॉपर के बाद अब सोने और चांदी पर भी मार्जिन मनी बढ़ा दी है। सोने पर मार्जिन 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि चांदी पर इसे 11 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।
मार्जिन बढ़ने का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। जब ट्रेडर्स को ज्यादा मार्जिन देना पड़ता है और उनके पास अतिरिक्त पैसा नहीं होता, तो वे अपनी पोजीशन बेचने लगते हैं। एक साथ बिकवाली बढ़ने से बाजार में गिरावट तेज हो जाती है।
मार्जिन क्या होता है:
कमोडिटी मार्केट में किसी बड़े सौदे के लिए पूरी रकम तुरंत नहीं देनी होती। कुल कीमत का एक हिस्सा सिक्योरिटी के तौर पर जमा करना पड़ता है, जिसे मार्जिन कहा जाता है। मार्जिन बढ़ने का मतलब है कि अब ट्रेडर्स को पहले से ज्यादा पैसा लगाना पड़ेगा। इससे बाजार में दबाव बनता है और दाम नीचे आने लगते हैं।
ज्वेलरी खरीदते समय रखें सावधानी:
सोना खरीदते समय ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
पहली बात, हमेशा Bureau of Indian Standards (BIS) का हॉलमार्क लगा सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है।
दूसरी बात, खरीद के दिन सोने की कीमत अलग-अलग स्रोतों से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है, इसलिए सही जानकारी के बाद ही खरीदारी करना बेहतर होता है।
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