52 करोड़ की लागत से रेल-कम-रोड ब्रिज के एप्रोच का निर्माण शुरू, 2027 तक होगा चालू…

गाजीपुर जिले के जमानियां क्षेत्र में गंगा नदी पर बने रेल-कम-रोड ब्रिज के फ्लाई-ओवर से जुड़ी डबल लेन एप्रोच रोड के निर्माण की प्रक्रिया अब जमीन पर उतर चुकी है। इस परियोजना के तहत फ्लाई-ओवर के दोनों ओर एप्रोच रोड का निर्माण शुरू कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। यह कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जा रहा है, जिस पर कुल 52 करोड़ रुपये की लागत प्रस्तावित है।

परियोजना का पहला चरण शुरू:
एप्रोच रोड निर्माण के पहले चरण में पाइलिंग का कार्य प्रारंभ किया गया है। संबंधित अधिकारियों के अनुसार, इस चरण को परियोजना की नींव माना जा रहा है। पाइलिंग पूरी होने के बाद आगे के निर्माण कार्यों को गति दी जाएगी। एनएचएआई की ओर से इस परियोजना के लिए लगभग डेढ़ वर्ष की समयसीमा निर्धारित की गई है, जिसके भीतर निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

लोड टेस्टिंग के बाद होगा आवागमन:
निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात आवश्यक तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से लोड टेस्टिंग शामिल है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एप्रोच रोड और फ्लाई-ओवर पर भारी वाहनों का संचालन सुरक्षित रूप से किया जा सके। सभी औपचारिकताओं के बाद इसे आम वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा।

एप्रोच रोड की लंबाई और चौड़ाई:
अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, फ्लाई-ओवर के दोनों ओर बनने वाली एप्रोच रोड की कुल लंबाई 1 किलोमीटर 260 मीटर होगी। प्रस्तावित चौड़ाई 16.100 मीटर तय की गई है, जिससे डबल लेन यातायात को सुचारू रूप से संचालित किया जा सकेगा। चौड़ी सड़क होने से वाहनों के जाम की समस्या में भी कमी आने की संभावना है।

24 पीलरों पर खड़ी होगी परियोजना:
इस परियोजना के तहत कुल 24 पीलरों का निर्माण किया जाना है। इन पीलरों की मजबूती के लिए कुल 105 पाइलिंग की योजना बनाई गई है। वर्तमान में 45 पाइलिंग का कार्य पूरा हो चुका है। शेष पाइलिंग पूरी होते ही पीलरों और वायडक्ट के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा, जिससे परियोजना अगले चरण में प्रवेश करेगी।

P-1 और P-2 साइड का विस्तृत प्लान:
तकनीकी योजना के अनुसार, P-1 साइड पर 3 पीलर और P-2 साइड पर 21 पीलर बनाए जाने प्रस्तावित हैं। फ्लाई-ओवर और एप्रोच रोड को मिलाकर इस पूरी परियोजना की कुल लंबाई 3 किलोमीटर 110 मीटर होगी। यह संरचना क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।

प्रस्ताव से स्वीकृति तक की प्रक्रिया:
एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, एप्रोच रोड निर्माण का प्रस्ताव लगभग डेढ़ वर्ष पहले 2024 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को भेजा गया था। 2025 की शुरुआत में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिली और इसके लिए बजट आवंटन किया गया। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत की गई।

भूमि अधिग्रहण की स्थिति:
परियोजना के लिए सदर और जमानियां तहसील क्षेत्र के छह गांवों की लगभग चार हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इस प्रक्रिया में दर्जनों किसानों की भूमि शामिल रही। अधिकारियों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य को गति दी जा सकी।

कनेक्टिविटी में होगा बड़ा सुधार:
एप्रोच रोड के निर्माण से क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार होने की संभावना है। स्थानीय आवागमन के साथ-साथ दूरस्थ क्षेत्रों से जुड़ाव भी आसान होगा। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित और सुगम बन सकेगी।

भारी वाहनों के लिए सुविधा:
इस फ्लाई-ओवर और एप्रोच रोड से 100 टन भार क्षमता तक के भारी वाहन भी आसानी से गुजर सकेंगे। इससे व्यापार, परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मालवाहक वाहनों के सुचारू संचालन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

2027 तक पूरा करने का लक्ष्य:
एनएचएआई के डिप्टी मैनेजर देवदत्त सिंह ने एप्रोच रोड निर्माण कार्य शुरू होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा कर वाहनों के आवागमन के लिए खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। समयबद्ध ढंग से कार्य पूरा करने के लिए निगरानी और तकनीकी मानकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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