उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित देवा शरीफ दरगाह पर इस बार होली के अवसर पर सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा दृश्य देखने को मिला। सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर बड़ी संख्या में विभिन्न धर्मों के लोगों ने एक साथ रंगों का त्योहार मनाया। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर भाईचारे और एकता का संदेश दिया। इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु और जायरीन भी पहुंचे, जिन्होंने दरगाह परिसर में एक साथ होली का आनंद लिया।
सवा सौ साल पुरानी परंपरा का निर्वहन:
बाराबंकी (Barabanki) जिले के देवा शरीफ (Dewa Sharif) में स्थित सूफी संत हाजी वारिस अली शाह (Haji Waris Ali Shah) की दरगाह पर होली खेलने की परंपरा लगभग सवा सौ साल से अधिक पुरानी बताई जाती है। इस परंपरा के तहत हर वर्ष होली के अवसर पर विभिन्न धर्मों के लोग दरगाह परिसर में इकट्ठा होकर प्रेम और भाईचारे के साथ रंगों का उत्सव मनाते हैं। इस वर्ष भी देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु दरगाह पहुंचे और वारिस पिया के जयकारों के बीच गुलाल उड़ाकर एकता का संदेश दिया।
दरगाह परिसर में रंग और रूहानियत का संगम:
दरगाह परिसर में बुधवार को होली का उत्सव बेहद उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। ढोल-नगाड़ों की थाप और रूहानी कव्वालियों के बीच लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशी जाहिर की। बड़ी संख्या में युवतियां और महिलाएं भी इस आयोजन में शामिल हुईं। उन्होंने गुलाल लगाकर और गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर होली की खुशियां साझा कीं। कई महिलाएं और युवतियां हाथों में हाथ डालकर कव्वाली की धुन पर झूमती और नृत्य करती नजर आईं।
“जो रब है वही राम” का संदेश:
दरगाह पर मनाई जाने वाली इस होली का मूल संदेश सूफी संत हाजी वारिस अली शाह द्वारा दिया गया विचार है—“जो रब है वही राम।” इसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए यहां हर धर्म के लोग बिना किसी भेदभाव के एक-दूसरे के साथ रंग खेलते हैं। इस अवसर पर मौजूद लोगों ने बताया कि यह आयोजन सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि इंसानियत, प्रेम और आपसी सद्भाव का प्रतीक है।
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु और जायरीन:
देवा शरीफ की इस अनोखी होली को देखने और इसमें भाग लेने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे। मजार पर हाजिरी देने आए अजय कुमार निगम (Ajay Kumar Nigam) और प्रताप जायसवाल (Pratap Jaiswal) सहित कई श्रद्धालुओं ने बताया कि देवा शरीफ की होली का माहौल बेहद अलग और खास होता है। यहां हर व्यक्ति एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा करता है और दिलों को जोड़ने का संदेश देता है।
अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका आयोजन:
देवा शरीफ की होली अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुकी है। यहां का यह आयोजन रंगों के साथ-साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में सभी धर्मों के लोग मिलकर गुलाल उड़ाते हैं और समाज को एकता का संदेश देते हैं।
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