गाजीपुर (Ghazipur) में विशाल भारत संस्थान (Vishal Bharat Sansthan) द्वारा “परिवार से मातृभूमि तक” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को जोड़ना और समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर आपसी समरसता को बढ़ावा देना बताया गया। संगोष्ठी में हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों की भागीदारी रही, जहां सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव पर विस्तार से विचार साझा किए गए।

संगोष्ठी में सामाजिक एकता पर जोर:
कार्यक्रम में मुख्य रूप से समाज में भाईचारे और एकता को मजबूत करने पर चर्चा की गई। आयोजकों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि भारत की मिट्टी से जुड़े सभी लोग एक ही सांस्कृतिक धारा का हिस्सा हैं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी इस विचार को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
कार्यकर्ताओं को दिलाई गई शपथ:
संगोष्ठी के दौरान विशाल भारत संस्थान (Vishal Bharat Sansthan) के नए कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ा गया और उन्हें शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही नए सदस्यों को संगठन की जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया ताकि संस्था के कार्यों को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।
राजीव गुरु ने रखे विचार:
संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव गुरु ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में विभाजन की भावना राजनीतिक कारणों से बढ़ाई जाती है, जबकि वास्तविक उद्देश्य लोगों को जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्था का प्रयास हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच दूरी को कम करना है।
नौशाद अहमद दूबे का उल्लेख:
कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष नौशाद अहमद दूबे का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि उनका पारिवारिक संबंध ब्राह्मण परंपरा से जुड़ा हुआ है और वे अपने नाम के साथ “दूबे” का प्रयोग करते हैं। इसे समाज में पहचान और मूल जड़ों को समझने के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
संस्कृति को बताया समाधान का माध्यम:
मीडिया से बातचीत में राजीव गुरु ने कहा कि समाज में बढ़ती दूरियों को कम करने के लिए संस्कृति सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों की परंपराओं को समझकर ही समाज में एकता को मजबूत किया जा सकता है। इसी दिशा में संस्था लगातार कार्य कर रही है।
इतिहास और पहचान पर चर्चा:
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भारत में रहने वाले मुसलमानों की जड़ें इसी देश से जुड़ी हुई हैं और वे विदेशी मूल के नहीं हैं। इस विषय पर चर्चा कर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
भारत और पाकिस्तान पर टिप्पणी:
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि भारत एक प्राचीन सभ्यता है, जबकि पाकिस्तान का गठन वर्ष 1947 में हुआ था। इस संदर्भ में यह संदेश दिया गया कि देशों का अस्तित्व समय के साथ बदलता है, लेकिन भारत की सांस्कृतिक जड़ें सदियों पुरानी हैं।
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रिपोर्ट: प्रदीप शर्मा
ब्यूरो : हसीन अंसारी