Video: गाजीपुर में ट्रांसफार्मर घोटाला, विभाग पर सवाल

गाजीपुर (Ghazipur) में ट्रांसफार्मर गायब होने और विद्युत व्यवस्था में अनियमितताओं का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। जंगीपुर विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत बेनसागर फीडर से ट्रांसफार्मरों के गायब होने और मानकों की अनदेखी को लेकर विभागीय लापरवाही, भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोप सामने आए हैं। मामले में ऊर्जा मंत्री के निरीक्षण और सांसद अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई तेज हुई है।

ट्रांसफार्मर गायब होने का मामला:
बताया गया कि जुलाई 2025 में जंगीपुर क्षेत्र के बेनसागर फीडर से करीब 9 ट्रांसफार्मर रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गए थे। 19 जुलाई 2025 को तत्कालीन जूनियर इंजीनियर (JE) ने इस संबंध में विभाग को लिखित सूचना दी थी और नोनहरा थाने में मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश भी की थी। इसके बावजूद उस समय कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई और मामला लंबे समय तक दबा रहा।

सांसद के हस्तक्षेप से खुला मामला:
जनवरी 2026 में गाजीपुर (Ghazipur) के सांसद अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) ने ‘दिशा’ बैठक में इस मुद्दे को उठाया। इसके बाद विभाग ने जांच शुरू की और अधिशासी अभियंता (XEN) को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी के बाद पूरे प्रकरण की परतें सामने आने लगीं।

जांच में सामने आए अहम तथ्य:
जांच के दौरान यह सामने आया कि राजीव कुमार गुप्ता (Rajeev Kumar Gupta) के कार्यकाल में 9 गांवों में लगे ट्रांसफार्मर गायब हुए और उनकी क्षमता में अनियमित बदलाव किया गया। इसके अलावा संविदाकर्मी रमेश राम (Ramesh Ram) पर भी आरोप लगा कि उसने कई गांवों से 10 KVA और 25 KVA के ट्रांसफार्मर हटाकर गायब कर दिए थे।

ऊर्जा मंत्री के निरीक्षण में मिली खामियां:
अप्रैल 2026 में ऊर्जा मंत्री ने गाजीपुर (Ghazipur) में महरौड़-रसड़ा मार्ग का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान 11 केवी की विद्युत लाइनें निर्धारित मानकों से नीचे पाई गईं, जिसे सुरक्षा में बड़ी चूक माना गया। इस पर नाराजगी जताते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों पर कार्रवाई:
कार्रवाई के तहत अवर अभियंता धर्मेंद्र पाल (Dharmendra Pal) को निलंबित किया गया है। वहीं, अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार तिवारी (Praveen Kumar Tiwari) और एसडीओ मनोज कुमार वर्मा (Manoj Kumar Verma) को आरोप पत्र जारी किया गया है।

बरामदगी और आगे की जांच:
अधीक्षण अभियंता विवेक खन्ना (Vivek Khanna) ने बताया कि अब तक 10 और 25 KVA के 7 ट्रांसफार्मर बरामद किए जा चुके हैं, जबकि बाकी की तलाश जारी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि एसडीओ प्रमोद यादव (Pramod Yadav) की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

विभाग का सख्त रुख:
मुख्य अभियंता अनिल वर्मा (Anil Verma) ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जहां भी लापरवाही सामने आएगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अन्य मुद्दों पर भी उठे सवाल:
इसी दौरान अभिभावकों ने स्कूलों में कॉपी-किताबों के नाम पर वसूली और कमीशनखोरी को लेकर भी नाराजगी जताई। अभिभावक अंकुर गौतम (Ankur Gautam) और ज्योति (Jyoti) ने इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया।

समयरेखा और प्रमुख तथ्य:
जुलाई 2025 में 9 ट्रांसफार्मर गायब हुए थे, जिनमें से 7 को जनवरी से मार्च 2026 के बीच बरामद कर लिया गया। 10 मार्च 2026 को विभागीय पत्र जारी कर जांच के निष्कर्ष साझा किए गए। इस पूरे मामले में संविदाकर्मी रमेश राम (Ramesh Ram) को मुख्य आरोपी माना गया है।

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