गाजीपुर जिले में करीब पांच माह पहले हुई एक युवती से दुष्कर्म की घटना में पुलिस द्वारा की गई लीपापोती अब उजागर हो गई है। शुरुआत में पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से न लेते हुए तहरीर बदलवाकर छेड़खानी का मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन जैसे ही पीड़िता ने मजिस्ट्रेट (Magistrate) के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए, पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ गई। मामले के दोबारा खुलने के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दुष्कर्म की धारा जोड़ दी और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान के बाद उजागर हुआ मामला:
पीड़िता के अनुसार, घटना के समय पुलिस ने उसकी शिकायत को बदलवाने का दबाव बनाया था, जिसके चलते असल मामला दर्ज नहीं हो सका। लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने सच्चाई सामने आने के बाद मामला फिर से जांच के दायरे में आ गया। पीड़िता के विस्तृत बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि उसके साथ दुष्कर्म की गंभीर वारदात हुई थी, जिसके बाद पुलिस को अपने पुराने रुख में संशोधन करना पड़ा।
एसपी डॉ. ईरज राजा ने बैठाई विभागीय जांच:
मामले के खुलासे के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. ईरज राजा (Dr. Iraj Raja) ने इस पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच की निगरानी उच्चाधिकारियों के स्तर पर की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रारंभिक कार्रवाई में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई। बताया जा रहा है कि जांच की आंच तत्कालीन कोतवाल, विवेचक और अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों तक पहुंच सकती है।
राजनीतिक नाम आने से बढ़ी संवेदनशीलता:
इस पूरे मामले में राजनीति का रंग भी चढ़ने लगा है, क्योंकि भाजपा (BJP) पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला मंत्री मन्नू बिंद (Mannu Bind) का नाम आरोपी के रूप में सामने आया है। इससे पुलिस विभाग के साथ-साथ प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मच गई है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की जाएगी।
आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर:
एसपी के आदेश पर गठित जांच टीम अब इस बात की तह तक पहुंचने में जुटी है कि आखिर शुरुआत में मामला दुष्कर्म के बजाय छेड़खानी में क्यों दर्ज किया गया। विभागीय जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि संबंधित पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी जेल भेजा जा चुका है और पीड़िता की सुरक्षा को लेकर भी पुलिस सतर्क है।
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