Video: नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी को 10 वर्ष की सजा!

रिपोर्टर: हसीन अंसारी

गाजीपुर जनपद में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। वर्ष 2017 में दर्ज इस प्रकरण में आरोपी को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई है। साथ ही अदालत ने आरोपी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला गाजीपुर की पॉक्सो स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनाया गया, जिससे क्षेत्र में न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

मामला वर्ष 2017 का:
यह मामला Ghazipur (गाजीपुर) जिले के Gahmar Police Station (गहमर थाना) क्षेत्र से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने नाबालिग लड़की को बहला-फुसला कर अपने साथ भगा लिया था। इसके बाद वह उसे लगभग एक महीने तक अपने कब्जे में रखकर लगातार दुष्कर्म करता रहा। पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई:
मामले की सुनवाई POCSO Special Court (पॉक्सो स्पेशल कोर्ट) में हुई। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को विस्तार से सुना। इस दौरान गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया गया। अदालत ने पाया कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपी के खिलाफ पर्याप्त और ठोस हैं, जिससे उस पर लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं।

गवाहों और साक्ष्यों का महत्व:
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने यह स्पष्ट किया कि पीड़िता नाबालिग थी और आरोपी ने उसकी उम्र व स्थिति का फायदा उठाया। गवाहों के बयानों से यह भी सामने आया कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से अपराध को अंजाम दिया। मेडिकल साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों ने भी अभियोजन के पक्ष को मजबूती प्रदान की, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।

अदालत का कड़ा रुख:
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म जैसे अपराध समाज के लिए बेहद घातक हैं और ऐसे मामलों में सख्त सजा आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके। इसी को ध्यान में रखते हुए आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जिसे न अदा करने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा गया है।

न्याय से बढ़ा भरोसा:
इस फैसले के बाद क्षेत्र में यह संदेश गया है कि नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कानून पूरी सख्ती से कार्रवाई करता है। पीड़िता के परिजनों और समाज के लोगों ने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताया है। यह फैसला उन लोगों के लिए चेतावनी माना जा रहा है, जो इस तरह के अपराध करने की सोच रखते हैं।

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