वाराणसी/गाज़ीपुर। एक वायरल वीडियो को लेकर सियासी हंगामा मचा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी की पूर्व विधायक सुनीता सिंह के पुत्र प्रशांत सिंह ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में प्रशांत सिंह ने अजय राय पर उनकी छवि खराब करने, और उन्हें मानसिक, व्यक्तिगत और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। यह मामला उस वीडियो से जुड़ा है जिसमें प्रशांत सिंह कथित तौर पर एक बाउंड्री वॉल उठाते दिख रहे हैं, और यह वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।
वायरल वीडियो का विवाद
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को एक बाउंड्री वॉल उठाते हुए दिखाया गया है, और दावा किया जा रहा है कि यह व्यक्ति गाजीपुर जिले के जमुनिया से पूर्व बीजेपी विधायक सुनीता सिंह के बेटे प्रशांत सिंह हैं। यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया, जिसमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी शामिल हैं। वीडियो के वायरल होने से प्रशांत सिंह और उनके परिवार के लिए यह एक संवेदनशील मामला बन गया।
मानहानि और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
कानूनी नोटिस में, प्रशांत सिंह ने अजय राय से वायरल वीडियो को तुरंत हटाने और अपनी पोस्ट के लिए बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वीडियो झूठा और मानहानिकारक है और यह उनके चरित्र और प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश्य से बनाया गया है। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर अजय राय इस मांग को नहीं मानते हैं तो उन पर मानहानि का मुकदमा चलाया जाएगा। प्रशांत सिंह ने आरोप लगाया है कि इस घटना से उन्हें मानसिक, व्यक्तिगत और आर्थिक रूप से भारी क्षति हुई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप-प्रत्यारोप
यह कानूनी नोटिस एक ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच पहले से ही राजनीतिक मतभेद हैं, और यह घटना इन दोनों दलों के बीच तनाव को और बढ़ा सकती है। प्रशांत सिंह का यह कदम कांग्रेस के लिए एक चुनौती है, खासकर जब अजय राय जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मामले में सीधे तौर पर शामिल हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और अजय राय इस कानूनी नोटिस का जवाब कैसे देते हैं और यह मामला आगे चलकर क्या मोड़ लेता है।
विधायक पुत्र का स्पष्टीकरण
प्रशांत सिंह के मुताबिक, वायरल वीडियो पूरी तरह से गलत है और इसका उद्देश्य सिर्फ उन्हें बदनाम करना है। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक विरोधियों द्वारा उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए जानबूझकर यह वीडियो वायरल किया गया। इस कानूनी नोटिस के माध्यम से, प्रशांत सिंह ने अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा करने और झूठे आरोपों का खंडन करने का फैसला किया है। यह कदम यह दिखाता है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपनाने को तैयार हैं। यह कानूनी लड़ाई अब एक राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है।