रिपोर्ट: हसीन अंसारी
Ghazipur: जिले में दशहरा की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। विजयदशमी पर रावण के पुतले का दहन हर साल लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा है। इस बार गाजीपुर में रावण का विशालकाय बोलने वाला पुतला तैयार किया गया है, जो करीब 60 फीट ऊंचा होगा और दर्शकों को अपनी तकनीकी विशेषताओं से चकित कर देगा।
रावण पुतले का निर्माण और तकनीकी विशेषताएं
अति प्राचीन रामलीला कमेटी द्वारा तैयार किए जा रहे इस पुतले में आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया गया है। रावण के मुख में माइक्रोफोन और स्पीकर लगाए जाएंगे, जिससे रामलीला के दौरान संवाद अदायगी और मुखर प्रदर्शन संभव होगा। इस बार रावण के पुतले का दहन इलेक्ट्रिक तीरों के माध्यम से होगा, जिसे डीएम और एसपी बटन दबाकर संचालित करेंगे।
मुख्य कारीगर छोटे लाल प्रजापति ने बताया कि पिछले 30–35 वर्षों से वे रावण के पुतले का निर्माण करते आ रहे हैं। इस बार पांच कारीगरों की टीम ने पिछले दो महीनों से इस विशालकाय पुतले को तैयार करने में जुटी रही। पुतले में इलेक्ट्रिक हीटर और बारूद लगाए गए हैं, जिनसे दहन के समय शानदार दृश्य देखने को मिलेगा। इसके अलावा पुतले के अंदर हजारों रुपए के पटाखे भी लगाए गए हैं, जो आग लगने के दौरान दृश्य को और भी भव्य बनाएंगे।
रावण का धनुष और पुतले की ऊंचाई
इस बार रावण का धनुष लगभग 35 फीट लंबा बनाया गया है। पुतले की कुल ऊंचाई 60 फीट है, जो इसे गाजीपुर में दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण बनाएगा। पहले रावण के पुतले खड़ा करने के लिए हाथियों का सहारा लिया जाता था, बाद में ट्रैक्टर का उपयोग किया गया, लेकिन अब क्रेन की मदद से 60 फीट ऊंचा पुतला सुरक्षित तरीके से स्थापित किया गया है।
लागत और प्रयास
कारीगरों के अनुसार इस विशालकाय रावण पुतले के निर्माण में लगभग 5–6 लाख रुपए की लागत आई है। इसके निर्माण में पिछले दो महीनों से दिन-रात मेहनत की जा रही थी। कारीगरों का कहना है कि इस बार तकनीकी उन्नति और भव्यता को ध्यान में रखकर पुतला बनाया गया है ताकि दशहरा समारोह में दर्शकों को अद्वितीय अनुभव मिल सके।
दशहरा महोत्सव का आयोजन
लंका स्थित रामलीला मैदान में दशहरा पर्व सदियों से बड़े धूमधाम से मनाया जाता रहा है। इस अवसर पर वन्दे वाणी विनायको आदर्श रामलीला मंडल के कलाकार राम-रावण युद्ध और रावण दहन का सजीव मंचन करेंगे। भीड़ की संख्या को देखते हुए अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी ने एलईडी की व्यवस्था की है, जिससे आयोजन का प्रसारण भी किया जाएगा।
आधुनिक और पारंपरिक का संगम
इस वर्ष के दशहरा आयोजन में पारंपरिक उत्सव और आधुनिक तकनीक का शानदार संगम देखने को मिलेगा। बोलने वाला पुतला, इलेक्ट्रिक तीर, माइक्रोफोन और स्पीकर जैसी तकनीक इसे अन्य वर्षों के आयोजन से विशेष बनाएगी। दर्शकों को न केवल भव्य दृश्य देखने को मिलेगा, बल्कि रामलीला के संवादों का अनुभव भी वास्तविक लगेगा।
निष्कर्ष
गाजीपुर में दशहरा महोत्सव न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय कला, शिल्प और कारीगरों की मेहनत का भी प्रतीक है। इस बार 60 फीट ऊंचा बोलने वाला रावण पुतला और आधुनिक तकनीक इसे और भी आकर्षक और यादगार बनाने में सफल होगी।
गाजीपुर में दशहरा: 60 फीट ऊंचा बोलने वाला रावण तैयार