रिपोर्ट: जफर इकबाल
जमानियां, गाजीपुर: स्थानीय स्टेशन बाजार स्थित हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग के तत्वावधान में हिंदी पखवाड़े के अवसर पर “हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में युवाओं की भूमिका” विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अखिलेश कुमार शर्मा ‘शास्त्री’ ने किया। संगोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना और स्वागत गीत के साथ हुआ, जिसने उपस्थित सभी लोगों में उत्साह का संचार किया।
युवाओं में भाषा और साहित्य के प्रति जिम्मेदारी
कार्यक्रम की शुरुआत में हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज में परिवर्तन की हर लहर का सूत्रपात युवाओं से ही होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में युवा पीढ़ी की भूमिका बेहद अहम है। “युवा न केवल भाषा को जीवंत रख सकते हैं, बल्कि इसे आधुनिक तकनीक और नवाचारों के साथ जोड़कर वैश्विक मंच पर भी ले जा सकते हैं। हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए युवाओं को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी,” उन्होंने कहा।
तकनीक और समकालीन चुनौतियां
इसी कड़ी में असिस्टेंट प्रोफेसर बिपिन कुमार ने हिंदी भाषा और साहित्य से जुड़ी तकनीकी भाषा और समकालीन चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “डिजिटल युग में हिंदी को तकनीक के साथ जोड़ना आवश्यक है। सोशल मीडिया, ब्लॉग, और अन्य डिजिटल मंचों के माध्यम से हिंदी साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए हमें तकनीकी ज्ञान और भाषाई शुद्धता दोनों पर ध्यान देना होगा।”
भाषा विवाद और सामाजिक एकता
कार्यक्रम में डॉ. लालचंद पाल ने वर्तमान परिदृश्य में भाषा और साहित्य को लेकर चल रहे विवादों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “आज के समय में भाषा को लेकर अनावश्यक विवाद खड़े किए जा रहे हैं, जो हमारे सांस्कृतिक और सामाजिक एकता के लिए ठीक नहीं हैं। भाषा और साहित्य को विवाद का विषय बनाने के बजाय हमें इसे एकता और समृद्धि का माध्यम बनाना चाहिए। युवाओं को इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।”
सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रस्तुतियां
महाविद्यालय के एनसीसी प्रभारी कैप्टन अंगद प्रसाद तिवारी ने छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “हिंदी भाषा की प्रगति में कोई कमी नहीं है, बशर्ते हम अपनी भाषा और संस्कृति को गर्व के साथ अपनाएं और इसके प्रचार के लिए निरंतर प्रयास करें।”
अध्यक्षीय उद्बोधन में संदेश
कार्यक्रम के अंत में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. अखिलेश कुमार शर्मा ‘शास्त्री’ ने कहा, “साहित्य केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि यह हमारी चेतना, अंतर्मन और संस्कृति का शुद्धिकरण करने का माध्यम है। हिंदी भाषा हमारी संस्कृति और संस्कारों की वाहक है, जो समाज को जोड़ने का सेतु बनती है। युवाओं को चाहिए कि वे साहित्य के इस महत्व को समझें और हिंदी को अपनी अभिव्यक्ति का प्रमुख माध्यम बनाएं।” उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि हिंदी साहित्य को पढ़ने और लिखने की आदत डालें, ताकि यह भाषा और समृद्ध हो।
संगोष्ठी में छात्रों की भागीदारी
कार्यक्रम का संचालन ज्ञानप्रकाश ने कुशलता के साथ किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक तिवारी ने किया। संगोष्ठी में रिया, श्रेया, कृष्णा, अनुशीला, वंदना, खुशबू, अक्षया सहित परास्नातक और स्नातक स्तर के कई छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे और उन्होंने सक्रिय भागीदारी दिखाई।
इस संगोष्ठी ने छात्रों और उपस्थित लोगों को हिंदी भाषा और साहित्य के महत्व को समझने, तकनीक के माध्यम से इसे आगे बढ़ाने और सामाजिक एकता के लिए जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया। युवा पीढ़ी को अपनी भूमिका के प्रति जागरूक करना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रहा।