रिपोर्ट: हसीन अंसारी
Ghazipur: नोनहरा थाना पुलिस की पिटाई से भाजपा कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोमवार को पूर्वांचल छात्र सेना के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान पूर्व छात्रनेता व भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष निमेष पांडेय के नेतृत्व में सैकड़ों लोग मौजूद रहे। ज्ञापन में पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा पर गंभीर आरोप लगाए गए और उन्हें जांच प्रभावित करने वाला बताया गया।
पुलिस पर बर्बरता के आरोप
ज्ञापन में कहा गया कि नोनहरा थाने पर भाजपा कार्यकर्ताओं के शांतिपूर्ण धरने को दबाने के लिए पुलिस अधीक्षक के संरक्षण में पुलिसकर्मियों ने बर्बर लाठीचार्ज किया। इसी दौरान भाजपा कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय की मौत हो गई और कई अन्य कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। आरोप लगाया गया कि पुलिस का रवैया लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने वाला और जनविरोधी है।
पीड़ित परिवार से मिलने वालों को रोका गया
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला महामंत्री राघवेंद्र सिंह ने कहा कि गाजीपुर पुलिस ने मनमाने तरीके से पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे प्रतिनिधिमंडल को रोक दिया। इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा के प्रतिनिधि, पूर्व जिलाध्यक्ष रामतेज पांडे, पूर्व विधायक भोनू सोनकर, मंडल अध्यक्ष सैदपुर नरेंद्र पाठक सहित कई वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता शामिल थे। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के भाजपा विरोधी रवैये को उजागर करती है।
302 की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग
छात्रनेता विवेकानंद पांडेय ने कहा कि यदि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल नहीं भेजा गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि मृतक सियाराम उपाध्याय गरीब परिवार से आते थे, इसलिए पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
एसआईटी जांच पर संदेह
निमेष पांडेय ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा गठित एसआईटी जांच निष्पक्ष तभी हो सकेगी जब पुलिस अधीक्षक को गाजीपुर से हटा दिया जाए। उनका कहना है कि पद पर रहते हुए एसपी स्वयं जांच को प्रभावित कर सकते हैं क्योंकि वे इस पूरे मामले में सह अभियुक्त हैं।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी
ज्ञापन देने के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से अलका अग्रवाल, कंचन रावत, अतुल तिवारी, सत्यम भौबे, अभिषेक तिवारी, पवन तिवारी, ऋषिकांत श्रीवास्तव, अभिषेक सिंह, अखिलेश सिंह, रिंकू सिंह, संतोष चौबे, मिठू भौबे, राहुल दूबे, रुद्रमणि तिवारी, मंटू मिश्रा, विकास मिश्रा, चमचम चौबे, गोल्डन सिंह, आशीष सिंह, सुरेश यादव और वीरेंद्र यादव शामिल थे।
एसआईटी जांच पर सवाल, गाजीपुर में भाजपा कार्यकर्ता की मौत पर बढ़ा बवाल