रिपोर्टर: प्रदीप शर्मा
गाजीपुर शहर में इन दिनों बंदरों का आतंक आमजन के लिए गंभीर परेशानी का कारण बना हुआ है। शहर के विभिन्न इलाकों में लगातार हो रहे हमलों से लोग भय के साये में जीने को मजबूर हैं। रेलवे स्टेशन, घनी आबादी वाले मोहल्लों और कॉलोनियों में बंदरों की बढ़ती संख्या से रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों पर हमलों की शिकायतें लगातार सामने आने के बाद नगर पालिका परिषद ने इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाया है। लोगों की मांग और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मथुरा से विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम को बुलाया गया है, जो शहर में अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ रही है।

नगर पालिका परिषद ने शुरू कराया रेस्क्यू अभियान:
शहरवासियों की शिकायतों के बाद नगर पालिका परिषद ने बंदरों के रेस्क्यू के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। इसके तहत टेंडर प्रक्रिया संपन्न कर मथुरा से एक्सपर्ट रेस्क्यू टीम को गाजीपुर बुलाया गया। बीते तीन दिनों से यह टीम शहर के अलग-अलग इलाकों में लगातार अभियान चला रही है। नगर पालिका परिषद का उद्देश्य शहर को बंदरों के आतंक से मुक्त करना और नागरिकों को राहत पहुंचाना है। रेस्क्यू टीम प्रशिक्षित उपकरणों और सुरक्षित तरीकों से बंदरों को पकड़ रही है, ताकि किसी को नुकसान न पहुंचे।
अब तक सैकड़ों बंदर पकड़े गए:
रेस्क्यू अभियान के तहत अब तक 342 बंदरों को पकड़ा जा चुका है। पकड़े गए सभी बंदरों को सुरक्षित रूप से सोनभद्र के जंगलों में छोड़ा गया है, जहां उनका प्राकृतिक वातावरण मौजूद है। नगर पालिका परिषद का कहना है कि शहर का वातावरण बंदरों के रहने के अनुकूल नहीं है, इसी कारण वे आक्रामक व्यवहार कर रहे थे। जंगलों में छोड़े जाने के बाद बंदरों के हमलों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
अष्टभुजी कॉलोनी में जारी कार्रवाई:
फिलहाल रेस्क्यू अभियान सदर कोतवाली क्षेत्र की अष्टभुजी कॉलोनी में चलाया जा रहा है। यहां पिछले कुछ दिनों से बंदरों के झुंड लोगों के घरों की छतों और गलियों में सक्रिय थे। मथुरा से आई टीम इलाके में लगातार निगरानी कर रही है और एक-एक कर बंदरों को पकड़ने में जुटी हुई है। स्थानीय लोगों ने भी अभियान में सहयोग करते हुए नगर पालिका और रेस्क्यू टीम का समर्थन किया है।
प्राकृतिक वातावरण की कमी से बढ़ी समस्या:
नगर पालिका परिषद के अधिकारियों के अनुसार गाजीपुर शहर में बंदरों के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण नहीं है। भोजन और सुरक्षित ठिकानों की कमी के कारण बंदर आक्रामक हो रहे थे और इंसानी बस्तियों में घुसकर नुकसान पहुंचा रहे थे। इसी वजह से कई जगहों पर लोगों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आईं। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया।
प्रति बंदर हो रहा है खर्च:
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी Dharmendra Kumar Rai (धीरेंद्र कुमार राय) ने बताया कि बंदरों के रेस्क्यू पर प्रति बंदर लगभग 500 रुपये का खर्च आ रहा है। यह राशि रेस्क्यू टीम, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं में खर्च की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक गाजीपुर शहर से सभी बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचा दिया जाता।
लोगों ने ली राहत की सांस:
रेस्क्यू अभियान शुरू होने के बाद शहरवासियों ने राहत महसूस की है। जिन इलाकों में बंदरों का आतंक ज्यादा था, वहां अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती दिख रही है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से इस समस्या को लेकर शिकायतें की जा रही थीं और अब जाकर प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई की है। आने वाले दिनों में अभियान पूरा होने के बाद शहर को बंदरों के आतंक से पूरी तरह मुक्त करने की उम्मीद जताई जा रही है।
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