गाजीपुर: पिता-पुत्र की बहादुरी से बचीं 12 जानें, अब सीएमएस राजेश सिंह ने बढ़ाया मदद का हाथ

गाजीपुर (Ghazipur) के सिकंदरपुर घाट (Sikandarpur Ghat) से जुड़ी एक हृदयस्पर्शी घटना एक बार फिर चर्चा में है, जिसने वर्षों पहले पूरे इलाके को भावुक कर दिया था। वर्ष 2014 में अशोक चौधरी (Ashok Chaudhary) और उनके महज 7 वर्षीय बेटे सूरज चौधरी (Suraj Chaudhary) ने साहस और मानवता का ऐसा उदाहरण पेश किया था, जिसे आज भी लोग गर्व के साथ याद करते हैं। उस समय छोटे से सूरज ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी के भंवर में फंसे लोगों को बचाते हुए 11 लोगों की जान बचाई थी, जबकि पिता-पुत्र ने मिलकर कुल 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला था।

2014 की घटना ने छोड़ी अमिट छाप:
सिकंदरपुर घाट पर घटी इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। एक ओर जहां लोग असहाय होकर स्थिति को देख रहे थे, वहीं दूसरी ओर एक छोटा बच्चा अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की मदद कर रहा था। सूरज की यह बहादुरी न केवल उस समय सराही गई, बल्कि आज भी उसे याद कर लोग भावुक हो जाते हैं। यह घटना समाज में साहस और सेवा की भावना का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है।

अब पढ़ाई की राह पर बढ़ रहा सूरज:
वर्षों बाद अब वही सूरज अपनी पढ़ाई पूरी कर आगे बढ़ने की दिशा में प्रयासरत है। उसने 12वीं की परीक्षा पास कर ली है और अब ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने की तैयारी में जुटा है। हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसकी आगे की पढ़ाई में कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं। ऐसे में समाज के कुछ लोग उसकी मदद के लिए आगे आए हैं, जिससे उसके सपनों को नया सहारा मिल सके।

सीएमएस राजेश सिंह ने बढ़ाया सहयोग का हाथ:
इस प्रेरणादायक कहानी से प्रभावित होकर सीएमएस (CMS) राजेश सिंह (Rajesh Singh) ने सूरज की शिक्षा में सहयोग देने का निर्णय लिया। वह बिना किसी औपचारिकता और दिखावे के अशोक चौधरी के घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सूरज को आर्थिक सहायता प्रदान की, लेकिन उन्होंने सहायता राशि को सार्वजनिक करने से इंकार करते हुए सादगी और संवेदनशीलता का परिचय दिया।

सूरज की बहादुरी को सराहा गया:
राजेश सिंह ने सूरज से बातचीत के दौरान उसकी बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि इतनी छोटी उम्र में उसने जो साहस दिखाया, वह अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने सूरज के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस मुलाकात ने न केवल सूरज बल्कि उसके परिवार के लिए भी एक नई उम्मीद जगाई है।

समाज के नायकों को याद रखना जरूरी:
अक्सर समाज के ऐसे सच्चे नायकों को समय के साथ भुला दिया जाता है, जिन्होंने किसी की जान बचाने या समाज के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया हो। लेकिन ऐसे लोगों की कहानियाँ ही आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती हैं। सूरज चौधरी की यह कहानी मानवता, साहस और सेवा का प्रतीक है, जिसे हमेशा याद रखा जाना चाहिए।

समाजसेवियों की रही मौजूदगी:
इस अवसर पर अशोक चौधरी के परिजनों के साथ समाजसेवी उमेश श्रीवास्तव (Umesh Srivastava) और मंटू राय (Mantu Rai) भी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर सूरज के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उसकी आगे की शिक्षा में सहयोग का भरोसा जताया।


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रिपोर्टर: एके सिंह

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