Ghazipur: आगनबाड़ी भर्ती में फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड!

लखनऊ/गाज़ीपुर | गरीबी हो या न हो, परिवार की इनकम चाहे जितना हो, फिर भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों में इस समय गरीब साबित होने की होड़ मची हुई है। सिस्टम का खेल यह है कि गरीब बनाने का रेट फिक्स रखा है। जी हां चार से पांच सौ रुपए का भुगतान कीजिए और बन जाइए जिस लेबल का चाहे उस लेबल का गरीब। दरअसल, इन दिनों फर्जी आय प्रमाण पत्र जारी करने का खेल बहुत तेजी से चल रहा है। इसके तीन कारण है। पहला सरकारी नौकरी, दूसरा आरटीई के तहत बच्चों का एडमीशन और तीसरा स्कॉलरशिप पाना। ऐसा नहीं है कि इसके लिए नियम कानून नहीं है, सब कुछ है लेकिन सिस्टम तो अपनी ही चाल चलता है। सिस्टम के कमजोरियों का कर्मचारी पूरा फायदा उठाते हैं। चार से पांच सौ रूपए में सिर्फ आपका नाम और पता देने के बाद बाकि सब यह खुद करा देंते हैं, क्योंकि यहां भी इनका पूरा नेटवर्क काम करता है।

अब भ्रष्टाचार की बात तो मत ही कीजिये, ये वो नशा है जिसकी चपेट अब पूरा समाज आ रहा है। एक फार्मूले की चर्चा तो कई वर्षों से हो रही है, भैया पैसा का व्यवस्था करो, साहब का पॉकेट गर्म करो, सरकारी नौकरी पाओ, पहले अपने निवेश को कैश करो, फिर सिस्टम में ऐसा वायरस छोड़ो की बुढौती तक ऐश करो…

भ्रष्टाचार कोई नयी चीज नहीं लेकिन पहले समाचारों में प्रमुखता थी, इमानदारी और चतुराई का इस्तेमाल करके विज्ञापन भी ले लेते थे और कलम सत्य को प्रमुखता से लिख देती थी लेकिन अब इच्छाओं का ऐसा बोझ है कि मोटा से मोटा विज्ञापन भी उसे पूरा नहीं कर पा रहा है, प्रमुखता छोड़िये भईया, सत्यता तो वही लिखता है जो नयी पत्रकारिता शुरू कर रहा हो या जिसने न बिकने का प्रण ले लिया हो… खैर धर्म जाति और ऊँच नीच की मानसिक प्रताड़नाओं के बिच एक ख़बर आई जिसने समाज के समस्याओं को समझा, समस्या नौकरी की, ईमानदारी से नौकरी पाने की… लेकिन पैसा और असीमित स्वार्थ से भरी इच्छाओं को लेकर कुछ भ्रष्ट लोगों ने सिस्टम को ध्वस्त कर दिया…

उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर से आंगनबाड़ी भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सरकारी – विभाग में नौकरी कर रहे लोगों का भी फर्जी आय प्रमाण पत्र का प्रयोग किया गया है। जिसके आधार पर उनकी पत्नी का चयन हो गया है, शिकायत हुई तो नियुक्ति पत्र रोक दिया गया। एक तरफ दोषी लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। तो वहीँ जनपद के सैदपुर में ऐसे ही एक मामलें में लेखपाल को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने निलंबित कर दिया है। जनपद के जखंनियां में तहसीलदार देवेंद्र यादव ने निर्वाचन कंप्यूटर आपरेटर कन्हैया राजभर के खिलाफ भी एफआईआर का आदेश दिया है। लगातार कार्रवाई हो रही है तो वहीँ आश्चर्य की बात है कि आंगनबाड़ी भर्ती में रेलवे और सरकारी अध्यापक की पत्नी ने भी आवेदन की था। इसके अलावा फर्जी निवास का भी प्रयोग किया गया है।

इधर सूत्रों ने दावा है कि नियुक्ति पत्र पाने वाले आवेदकों से संबंधित विभाग के कर्मचारी की वसूली की शिकायते आ रही हैं। हालांकि, विभागीय अधिकारी शिकायत के आधार पर जांच में जुट गए है। जिले की 16 ब्लाकों में बाल विकास के आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के 290 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगा गया था। जिसमें चार आवेदन सही नहीं पाया गया। टोटल 286 पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई। बीते 20 फरवरी को फाइनल सूची जारी कर दी गई। सूची जारी होते ही आवेदकों ने संबंधित अधिकारियों के यहां शिकायत पत्र देने लगे। सैकड़ों शिकायत आने के बाद अधिकारियों ने गंभीर शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए करीब 14 शिकायतों की जांच के लिए भेजा है। जिनकी नियुक्ति पत्र रोका गया है। वहीं, विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बहुत ऐसे शिकायत मिले थे जिसका तत्काल निस्तारण कर दिया गया।

जन्संदेश टाइम्स में प्रकाशित खबर के अनुसार प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी ज्योती चौरसिया ने बताया कि गंभीर शिकायत में दस लोगों की नियुक्ति रोकी गई है। इसके पहले भी कुछ रोके गए थे। उन्होंने बताया कि शिकायत के आधार पर दो से तीन लोगों को नियुक्ति पत्र देने के बाद रोका गया है। जांच पूरी होने के बाद कमेटी के निर्णय पर आगे कोई फैसला होगा। उन्होंने यह भी बताया कि फर्जी आय प्रमाण पत्र में संबंधित के खिलाफ तहसीलों पर कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।

रेलवे और शिक्षक की पलियों को आंगनबाड़ी में चयन, शुरू हुई जांच

जखनियां तहसील के मनिहारी की बात करें तो आगनबाड़ी भर्ती में धुरेहरा ग्राम पंचायत में आवेदक पूजा यादव ने फर्जी आय प्रमाण पत्र लगाकर आवेदन किया था। जिसका चयन भी हो गया। आवेदक के पति शशिकान्त यादव रेलवे ग्रुप डी में नौकरी करते हैं। वहीं, आवेदक सिंपी यादव की शादी 24 फरवरी 2025 को त्रिलोकपुर में हुई थी, जिसका फर्जी आय प्रमाण पत्र जारी हो गया और उनका भी चयन हो गया। इसके अलावा एक सफाईकर्मी की पुत्री पूजा यादव ने फर्जी आय लगाकर आवेदन किया । जिसका भी प्रतिक्षारत में चयन हो गया। इसी प्रकार चौखड़ी में एक पूजा यादव का चयन हो गया है, इनके पति सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापक हैं।

ग्राम प्रधान की पत्नी ने भी किया था आवेदन

ये तो छोड़िये खबर के अनुसार अन्य ब्लाकों में भी फर्जीवाड़ा किया गया है। जिसमें बिरनो ब्लाक के बोगना में ईडब्लूएस का प्रमाण पत्र लगाया गया। जिसकी जांच चल रही है। इसी प्रकार जलालाबाद में सिपाही की पत्नी ने आंगनबाड़ी में आवेदन किया था, करंडा में कटैला ग्राम प्रधान की पत्नी ने आवेदन किया था। जिसकी नियुक्ति रोक दी गई है। इसी प्रकार जनपद के जमानियां, कासिमाबाद, रेवतीपुर में भी फर्जीवाड़ा का मामला पाया गया है। गाजीपुर जनपद में तो हद हो गयी, लेकिन ये हुआ कैसे? इसको भी समझते हैं, थोड़ा विस्तार से, क्योंकि ये मनोरंजन नहीं है…

सीधा सीधा आप ये समझिये कि बाल विकास परियोजना के तहत आगनबाड़ी भर्ती के लिए महिलाओं की नियुक्ति होती है, आगनबाड़ी कार्यकत्री, सहायिका और मिनी आगनबाड़ी कार्यकत्री जैसे पदों पर नियुक्ति की जाती है, वरिष्ठ पदों की पूर्ति के बाद सीधी भर्ती समाचार पत्रों के माध्यम से निकाली जाती है और पहली प्राथमिकता उसी ग्राम सभा या वार्ड की गरीबी रेखा से निचे जीवन यापन करने वाले परिवार के विधवा महिला को दी जाती है, दूसरी प्राथमिकता तलाकशुदा को दी जाती है और जब दोनों तरह के अभ्यर्थी न मिले तब, ऐसे ही परिवार में जो माहिला हों उन्हें प्राथमिकता दी जाती है।

यदि गरीब रेखा से निचे का कोई महिला अभ्यर्थी न हो तो इसी फार्मूले के तहत गरीबी रेखा से ऊपर वाले को मौका दिया जाता है। यदि इनमे से कोई न हो तो फिर सम्बंधित न्याय पंचायत चयन करता है। अब किसी को आगनबाड़ी भर्ती के तहत नियुक्ति लेनी है तो उसे आय प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है, नौकरी की आवश्यकता गरीबी रेखा से निचे वालों को है तो आवेदन देते हैं और आय प्रमाण पत्र बनवाते हैं।

अब सवाल है कि कैसे पता चलेगा कि कौन गरीबी रेखा से निचे है? ये लेखपाल बतायेंगें, जी हाँ वैसे तो लेखपाल आय प्रमाण पत्र जारी नहीं करते लेकिन लेखपाल की भूमिका मुख्य रूप से आय की जांच और सत्यापन से संबंधित है। लेखपाल, राजस्व विभाग के अधिकारी हैं, जो क्षेत्र के राजस्व अभिलेखों को बनाए रखते हैं और आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन की जांच करते हैं। वे आय के स्रोतों, भूमि के स्वामित्व आदि की जांच करते हैं और आय की मात्रा निर्धारित करते हैं।

तरह तरह के व्यंजनों और सुख सुविधाओं से किसी के इच्छाओं की भूख शांत नहीं होती तो वो गरीबी रेखा से निचे वालों के हक़ को भी निगलने का प्रयास करता हैं, भले ही इश्वर उसे अगले जन्म में कीड़ा बनाएं, अरे मान्यताओं के अनुसार… खैर इसके लिए भी तो आय प्रमाण पत्र चाहिए… चाहिए की नहीं… चाहिए न… अब जिसको फर्जी चाहिए वो इमानदार लोगों की नज़र में देश का गद्दार है और कानून की नज़र जो है उसे वो सजा मिलेगी…

फर्जी आय प्रमाणपत्र के मास्टरमाइंड पर मुकदमा

जी हाँ यहीं से शुरू होता है फर्जी आय प्रमाण पत्र का खेल जिसके आधार पर सरकारी स्कूल के शिक्षक और रेलवे में तैनात लोगों की पत्नियों का चयन हो गया है। इसके अलावा कई ग्राम प्रधान और पूर्व ग्राम प्रधान के घर के महिलाओं का भी चयन हुआ है। शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने कुछ की नियुक्ति पत्र रोक दी है। वहीं, जखनियां तहसील में फर्जी आय प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। तहसीलदार देवेंद्र यादव ने कई वर्षों से कंप्यूटर आपरेटर के पद पर तैनात कन्हैया राजभर के खिलाफ भुड़कुड़ा कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। जखनियां तहसील में निर्वाचन विभाग में लंबे अरसे से तैनात चर्चित कंप्यूटर आपरेटर कन्हैया राजभर कई लेखपालों की आईडी इस्तेमाल कर फर्जी आय प्रमाण पत्र, निवास और जाति जारी कर रहा था। आश्चर्य की बात है कि इसकी जानकारी लेखपालों को भी नहीं थी। लेकिन आंगनबाड़ी भर्ती में शिकायत के बाद फर्जी आय प्रमाण पत्र जारी करने का भंडाफोड़ हुआ है। जिसके बाद अधिकारियों ने मास्टरमांइड कंप्यूटर आपरेटर पर कार्रवाई की है। आंगनबाड़ी भर्ती में नियुक्ति पाने के लिए फर्जी आय प्रमाण पत्र में संबंधित विभाग ने शिकायत के बाद दस लोंगो की नियुक्ति पत्र रोक दी है। कुछ नियुक्ति पाए लोगों को भी रोका गया है। हालांकि, अभी भी ऐसे कई आवेदकों का चयन हो गया है। जिनके आय प्रमाण पत्र फर्जी है। सूत्रों का दावा है कि मनिहारी विकास खंड में कई ग्राम प्रधान और पूर्व प्रधान के परिवार की महिलाओं का भी चयन हो गया है। जिसमें कुछ की बहु और कुछ के भाई की पत्नी हैं।

5849 आय, 1966 जाति और 1865 निवास प्रमाण पत्र मिले फर्जी

खबर के अनुसार तहसीलदार देवेंद्र कुमार यादव ने बताया कि तहसील में कंप्यूटर ऑपरेटर कन्हैया राजभर पुत्र देवनारायण राजभर निवासी मनिहारी थाना शादियाबाद जो पूर्व में स्थानीय तहसील पर तैनात लेखपाल संध्या सिंह, रवि भूषण, सिंघलानी व कैलाश सिंह के स्थानांतरण के वावजूद उनकी आईडी को एक्टिव रखते हुए फर्जी प्रमाण पत्र जारी किया था। तहसलीदार ने बताया कि जांच में पता चला कि 5 हजार 849 आय प्रमाण पत्र, 1 हजार 966 जाति और 1 हजार 865 निवास प्रमाण पत्र फर्जी निर्गत किए गए हैं। जिसकी जानकारी होने के बाद कोतवाली मुड़कुड़ा में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इधर, बताया जा रहा है कि यह आकडा 2021 के बाद का है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज के पहले इसने कितने फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए होंगे।

इधर अधिकारियों के मुताबिक सभी प्रकरण संज्ञान में है। जांच की जा रही है।

आंगनबाड़ी भर्ती में पूरी पारदर्शिता का ध्यान रखकर चयन किया गया है। फर्जी आय प्रमाण पत्र की जांच कराई जा रही है। किसी अपात्र का चयन नहीं होगा। जिनकों नियुक्ति पत्र मिला है, वह अपने तैनाती स्थान पर ज्वाइन करें”: सीडीओ संतोष कुमार वैश्य

दस लेखपाल निलंबित, पांच संविदा कर्मी पर मुकदमा

इस खेल में कईयों के हाथ होने की संभावना है, इधर जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने इस प्रकरण में अब तक 10 लेखपालों को निलंबित कर दिया है। वहीं, सीडीओ के स्टेनो को हटाकर जमानियां ब्लॉक में भेज दिया है। नए स्टेनो के रूप में डीडीओ ऑफिस के बाबू को तैनात किया है। वहीं जमानियां एसडीएम के पास से डीपीओ के अतिरिक्ति चार्ज को हटा लिया है। आंगनबाड़ी भर्ती में सीडीओ के स्टेनो राधेश्याम यादव की बेटी और चौकड़ी निवासी पूजा का आय प्रमाणपत्र भी फर्जी पाया गया। बीपीएल श्रेणी का मिला, जबकि उनके पति अजीत कुमार सरकारी शिक्षक हैं। इसी तरह फौजी, रेलवे, पुलिस के सिपाही, शिक्षक, ग्राम प्रधान तक की पत्नियों का चयन हो गया था। इन सभी प्रकरण को डीएम ने गंभीरता से लिया और संबंधित प्रमाणपत्र को जारी करने वाले 10 लेखपालों को निलंबित कर दिया। हालांकि, तीन लेखपाल पहले से ही निलंबित हो चुके हैं। इसके साथ ही कासिमाबाद, सदर, सैदपुर, जखनियां और जमानियां में प्रमाणपत्र जारी होने की तिथि पर तैनात पांच तहसीलदारों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

निलंबित लेखपाल की साथियों के संग दबंगई

जनपद के जखनियां तहसील के मुख्य गेट के सामने सीएससी केंद्र के संचालनकर्ता व पेशे से अधिवक्ता फरहाद अंसारी पुत्र सुल्तान अंसारी ग्राम जखनियां अपनी जन सेवा केंद्र चलाते हैं। तहसील लगातार कई दिनों से फर्जी आय और जाति प्रमाण पत्र को लेकर सुर्खियों में चल रहा है। इसी प्रकरण में विभागीय कार्रवाई भी चल रही है। इसी कार्रवाई के तहत बुधवार को लेखपाल राहुल यादव का निलंबन विभाग द्वारा किया गया था। जिससे बौखलाए लेखपाल ने अपने साथियों के साथ तहसील गेट के सामने संचालक के केंद्र पर पहुंचा और बोलेरो गाड़ी में उसको भरकर तहसील परिसर में लेकर आया । लेखपाल ने अपने साथियों संग फरहद अंसारी को बुरी तरह से मारा पीटा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह लोग नशे में भी थे। पीड़ित ने बताया कि मैं ऑनलाइन फार्म भरता हूं, मेरी क्या गलती है। मामले की जानकारी जब तहसील के अधिवक्ताओं को हुई तो पूरा संगठन इकट्ठा हो गया और लामबंद होकर लेखपाल और उसके साथियों के ऊपर कार्रवाई की मांग करने लगा। लेकिन सीएससी केंद्र के संचालनकर्ता और लेखपाल का क्या कनेक्शन है? ये भी बड़ा सवाल है।

खबर के अनुसार कोतवाल शैलेश मिश्रा ने बताया कि तहरीर मिली है। जल्द से जल्द आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत करते हुए कार्रवाई की जाएगी। वहीँ मामले को बिगड़ते व गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार देवेंद्र यादव ने अधिवक्ताओं से कहा कि आय और जाति के फर्जी मामले में लेखपाल का निलंबन पहले हो चुका है। मामला थाने का है, थाना इस पर कार्रवाई करेगी। फर्जी मामले में इनका निलंबन कर दिया गया है। तहसीलदार ने कहा कि मारपीट हुई है, जिसकी तहरीर पीड़ित द्वारा थाने में दी गई। पुलिस अपना काम कर रही है। मेरे द्वारा विभागीय जांच कर उस पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

…आखिर कौन है भर्ती फर्जीवाड़ा का मास्टरमाइंड ?

अब तक की शिकायतों से पता चला है कि सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा जनपद गाजीपुर के जखनिया तहसील स्थित मनिहारी बाल विकास परियोजना में है। जहां रेलवे और शिक्षक की पत्नियों तक का चयन हो गया था। बड़ा सवाल तो यही है, जब पात्र गरीबी रेखा से निचे मौजूद हैं तो फिर नियुक्ति दूरों की क्यों? सवाल केवल फर्जी प्रमाण पत्र तक सिमित नहीं है, सवाल तो ये भी है कि क्या कहीं इन भर्तीयों में गद्दियों से साहब की पॉकेट तो गर्म नहीं की गयी है?

खबर के अनुसार चौखड़ी गांव निवासी शिकायतकर्ता अर्चना यादव के परिजनों से नियुक्ति के बदले लाखों रूपए की डिमांड की जा चुकी है। तो वहीं आर्थिक रूप से कमजोर अर्चना की आय को भी फर्जी बताया जा रहा है। हल्का लेखपाल प्रभात राय तो आय बनाने को तैयार भी नहीं थे। जबकि अर्चना के पिता किसान है, उनके पास करीब एक से डेढ़ बीघा जमीन है। वहीं, गाजीपुर सदर में भी बड़े फर्जीवाड़े की आशंका हैं। सदर विकास परियोजना का प्रभार एक सुरपवाइजर देख रहीं है। जहां कई अनियमितता की शिकायते हैं। नगर क्षेत्र के मुक्तिपुरा निवासी शिकायतकर्ता सुष्मिता पत्नी आशीष प्रजापति ने डीएम को लिखित पत्र देकर शिकायत किया है कि संबुल सबा का मायका नुरूद्दीनपुरा में है। इनके पति पुलिस विभाग में कार्यरत है। वहीं, इनके माता- पिता बाल विकास विभाग में कार्यरत थे। जो रिटायर्ड हो चुके है। आरोप लगाया है कि इनकी चयन में फर्जी आय और फर्जी तलाक प्रमाण पत्र के आधार पर किया गया है। वहीँ भांवरकोल बाल विकास परियोजना में भी फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है। वीरपुर गांव निवासी शिकायतकर्ता आरती देवी पत्नी रामअवध ने 11 अप्रैल को जिला कार्यक्रम अधिकारी से शिकायत किया है कि वीरपुर गांव में आंगनबाड़ी के पद पर मानक को ताक पर रखकर किया गया है। आरोप लगाया है कि चयनित अर्चना देवी के पति रमेश वर्तमान समय में रेलवे में तैनात है। उनकी वास्तविक आय करीब पांच लाख है। लेकिन लेखपाल ने 41 हजार का आय प्रमाण पत्र जारी किया है, जो फर्जी है। उसने बताया कि 21 मार्च को भी इसके खिलाफ शिकायत की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कहा जा रहा है कि फर्जीवाड़ों के मास्टरमाइंड का नेटवर्क बहुत दूर तक है। गहनता से जांच के बाद अभी और फर्जीवाड़ा मामले सामने आ सकते है।

‘और’ ऐसे खुलती चली गई परत दर परत…

आंगनबाड़ी भर्ती को लेकर एक गरीब लड़की की आस जगी। सोची थी कि घर को संभाल लूंगी। उसने अपनी दरिद्रता दूर करने के लिए आवेदन किया था। शासन के सभी शों को पूरा किया था, लेकिन घोटालेबाजों ने इनकी मंशा पूरी नहीं होने दी, काबिल को खारिज कर दिया। धन्य है ये लोग और इनकी इच्छाएं… जो अपने धर्म को ही नहीं बल्कि देश को भी धोखा दे रहे हैं…

इस फर्जीवाड़े से जुडी बड़ी ख़बर जनसंदेश टाइम्स समाचार पत्र में मिलती है, अखबार लिखता है कि शिकायतकर्ता ने इस फर्जीवाड़े की शिकायत बीते 17 मार्च को जखनियां तहसील के संर्पूण समाधान दिवस और सीएम पोर्टल पर किया था। जिसमें बताया था कि जखनिया तहसील के गांव सभा धुरेहरा में सहज सेवा केंद्र संचालकों ने लेखपालों की फर्जी आईडी से फर्जी आय प्रमाण पत्र जारी किया है। शिकायतकर्ता ने नौ लोगों की सूची प्रस्तुत की थी। जिसमें रेलवे में गुपडी में नौकरी कर रहे विजय प्रकाश यादव की पत्नी पूजा यादव तथा सिम्पी यादव हैं, जिसकी शादी 24 फरवरी को हुई थी। वहीं, बिरनो ब्लाक में तैनात सफाईकर्मी राजन यादव की बेटी पूजा यादव सहित कई अन्य गंभीर शिकायते थी।

अखबार लिखता है कि शिकायतकर्ता को न्याय नहीं मिलने पर बीते चार अप्रैल को ‘जनसंदेश टीम’ ने सीडीओ संतोष कुमार वैश्य से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी ज्योति चौरसिया भी मौजूद थी। जनसंदेश टीम ने शिकायतकर्ता अर्चना यादव की बात रखते हुए अन्य भर्ती फर्जीवाड़ा की जानकारी दी। बताया कि स्टेनो राधेश्याम यादव की बेटी पूजा यादव की मनिहारी के चौखड़ी गांव में फर्जी रूप से आगनबाड़ी में चयन हुआ है। लड़‌की के पत्ति सरकारी शिक्षक है। वहीं, मनिहारी ब्लाक के रंजीतपुर के प्रधान की बहु और चौखड़ी गांव के पूर्व प्रधान पवन यादव की पत्नी की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा किया गया है। बताया कि यह तीनों स्टेनो के रिश्तेदार हैं। इसके अलावा बाल विकास परियोजना मनिहारी में लाखों रूपए के अवैध वसूली की शिकायतें भी की गयी।

गरीबों के हक पर डाका डालने वालों पर कब होगी कार्रवाई?

बहुचर्चित आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला में एक से बढ़कर एक कारनामा सामने आया है। अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों का खेल सामने आया है। वहीं अमीर से गरीब बनने का भी खेल सामने आया है। भर्ती घोटाले में जहां दस लेखपाल को निलंबित और पांच संविदाकर्मियों को बर्खास्त किया गया है। वहीं, संबंधित तहसीलदारों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। लेकिन गरीबों के हक पर डाका डालने वालों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अधिकारियों को जांच में फर्जी मिले सभी आवेदकों के चयन को खारिज कर दिया गया। इसके अलावा जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई। लेकिन अमीर से गरीब बनने वाले आवेदकों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

लोग तो दबी जुबान से कह रहे हैं कि फर्जीवाड़ा करने वाले ना अपने धर्म का पालन कर सके और न ही देश के साथ वफादारी… धर्म लालच और धोखा नहीं सिखाता, वो अपने ही धर्म के विरुद्ध गये और देश के क़ानून का पालन नही किया…

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