गाजीपुर की इन हस्तियों ने विश्व में लहराया परचम…

कुछ हस्तियाँ असी भी होती हैं जिनके कार्यों से केवल उनका नाम रोशन नहीं बल्कि उस देश का नाम रोशन हो जाता है जहाँ की मिटटी में उन हस्तियों का जन्म होता है. ये हस्तियाँ केवल खुद के नहीं जीती. इनका जीवन समाज के लिए एक सन्देश बन जाता है. ऐसे एक हस्ती हैं उपेन्द्र राय. उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर के शेरपुर गाँव के रहने वाले उपेन्द्र राय के जीवन के संघर्षों ने उपेन्द्र राय को एक ऐसे शिखर पर पहुंचा दिया है जहाँ से वो युवाओं के लिए प्रेरणा बन गये हैं.

सहारा न्यूज नेटवर्क (Sahara News Network) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं एडिटर इन चीफ उपेन्द्र राय (Upendra Rai) को पत्रकारिता के क्षेत्र में सत्य के लिए समर्पण और साहस के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट के उच्च सदन (हाऊस आफ लार्ड्स) के चोलमोंडेली कक्ष में सम्मानित किया गया। यह सम्मान हाऊस आफ लार्ड्स (House of Lords) के सदस्य लार्ड जान बेकेट टेलर ( लार्ड टेलर आफ वारविक) ने बड़ी- बड़ी हस्तियों तथा भारतीय मूल के लोगों से भरी सभा में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच दिया। इस दौरान उन्होंने श्री राय की पत्रकारिता के क्षेत्र में हासिल की गई उपलब्धियों की चर्चा करते हुए जम कर तारीफ की। गाजीपुर जिले के मुहम्मदाबाद क्षेत्र के शेरपुर के मूल निवासी उपेन्द्र राय की इस बड़ी उपलब्धि पर गांव समेत पूरे जनपद में हर्ष की लहर व्याप्त है। बता दें कि तीन साल पहले वर्ल्ड बुक आफ रिकार्ड की ओर से भी उन्हें निर्भिक पत्रकारिता के लिए एक बड़े सम्मान से नवाजा जा चुका है।

लंदन के हाउस ऑफ लार्ड्स में आयोजित एक भव्य समारोह में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए श्री राय ने राष्ट्रभाषा हिंदी की अहमियत पर काफी जोर दिया। जय हिंद और जय भारत से अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए सबसे पहले उन्होंने हिन्दी को लेकर अपने अनुभव को साझा किया। कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रभाषा के प्रयोग तथा बढ़ावा को लेकर काफी गंभीर है। अधिकतर देशी- विदेशी सभाओं में वह लोग अपना संबोधन हिंदी में देते है। उन्होंने अमित शाह के हिंदी प्रेम का भी उल्लेख करते हुए बताया कि गृह मंत्री बनने के बाद उनके एक सीनियर अफसर ने उन्हे अंग्रेजी में पत्र लिखा तो उन्होंने पत्र यह कह कर वापस कर दिया कि अगर यह पत्र हिंदी में होता तो मुझे बहुत खुशी होती। श्री राय ने आगे कहा कि कहीं भी हिंदी बोलने में हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए और जब बहुत जरूरी हो तभी अंग्रेजी का प्रयोग किया जाना चाहिए। बताया कि अंग्रेजी जानना बहुत जरूरी है लेकिन हर जगह बोलना उतना आवश्यक नहीं है जहां हिंदी में काम हो जाय। हमारी मातृभाषा हिंदी एक बहुत समृद्ध भाषा है, इसको हर स्तर पर बढ़ावा देना चाहिए। ब्रिटेन की राजधानी लंदन में मिले इस सम्मान को उन्होंने एक उपलब्धि बताते हुए आयोजकों को खुले हृदय से धन्यवाद दिया। इस सम्मान के बाद सहारा इंडिया परिवार भी एक वैश्विक पहचान लेकर उभरा है। विनम्र, हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के उपेंद्र राय की यह खासियत है कि वह बहुत जल्द लोगों के हृदय में अपनी छाप छोड़ देते हैं।

वैसे तो जनपद गाजीपुर (Ghazipur) को पहचान की आवश्यकता नहीं है, यह एक ऐसी धरती बन गई जहाँ से निकला पेड़ एक विशन वृक्ष के रूप में ऐसे फल दे रहा जिसकी गूंज पुरे विश्व में हो रही है. जनपद के करइल का क्षेत्र गौरवान्वित है। इस मिट्टी की मेधा की सुगंध इंग्लैंड तक पहुंच गई। जिले के गोड़उर गांव की बिटिया गीतांजलि श्री (Geetanjli Shree) ने विश्व का सबसे बड़ा साहित्य पुरस्कार बुकर (International Booker Award) प्राप्त कर विश्व पटल पर चमक बिखेर दी हैं। गीतांजलि श्री को उनके उपन्यास ‘रेत की समाधि’ के अंग्रेजी संस्करण ‘टाम्ब आफ सैंड’ (Tomb of Sand) को बुकर सम्मान के लिए चुना गया। गीतांजलि श्री के बाबा स्व. रामसेवक पांडेय झारखंड में शिक्षा विभाग में अधिकारी थे। उनके बेटे स्व. अनिरुद्ध पांडेय प्रयागराज से सेवानिवृत्त जिलाधिकारी थे। अनिरुद्ध पांडेय के दो पुत्रों और तीन पुत्रियों में गीतांजलि श्री बीच की हैं। गीतांजलि के भाई स्व. शैलेंद्र पांडेय आइएएस थे और दूसरे भाई ज्ञानेंद्र पांडेय आस्ट्रेलिया में प्रोफेसर।

इनके परिवार के चचेरे चाचा-चाची का परिवार गाजीपुर में रहता है। गीतांजलि श्री बचपन में पिता के साथ गांव आतीं थीं, लेकिन बाद में पढ़ाई की व्यस्तता में गांव आना जाना नहीं हुआ। बावजूद इसके उनका अपने गांव की माटी और यहां के रीति रिवाज व खानपान से काफी गहरा लगाव है। संगे संबंधियों और गांव के लोग इनके पिताजी के यहां आते जाते थे। गीतांजलि श्री को गाजीपुर की बाटी-चोखा, राब, मकूनी, ढूंढी-ढूढा, मिर्च के अचार काफी पसंद हैं। उन्होंने अपने इंटरव्यू में कहा है कि आज मैं जो कुछ भी हूं उसमें अपना गांव रीति-रिवाज और अपनी जड़ों के कारण हूं।

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