गाज़ीपुर: पी.जी. कॉलेज “लिविंग इन हार्मनी” पर अकादमिक संगोष्ठी का आयोजन!

रिपोर्टर: सुधांश रंजन पांडेय

गाज़ीपुर (Gazipur) में पी.जी. कॉलेज के अंग्रेज़ी विभाग द्वारा “लिविंग इन द हार्मनी” विषय पर एक महत्वपूर्ण अकादमिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं में प्रकृति एवं मानव संबंधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

A formal event in a hall with a podium, where a woman is handing a certificate to a man while three other men look on.

मुख्य वक्ता और अध्यक्षता:
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता पर्यावरण विभाग, बी.एच.यू. (Banaras Hindu University) के प्रोफेसर पी.सी. अभिलाष थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रविशंकर सिंह ने की। संगोष्ठी का संचालन डॉ. रामनारायण तिवारी ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रोफेसर पी.सी. अभिलाष का स्वागत करते हुए अंग्रेज़ी विभाग के विद्यार्थी एवं युवादर्द पत्रिका के संपादक असितांग कुमार सिंह ने की।

प्रकृति और मानव संबंध पर व्याख्यान:
प्रोफेसर पी.सी. अभिलाष ने अपने व्याख्यान में कहा कि सभी प्राणी दो प्रकार के होते हैं—एक वे जो प्रकृति के विधि-विधान के अनुरूप सामंजस्य स्थापित करते हैं, और दूसरे वे जो अपनी इच्छाओं के अनुसार प्रकृति का शोषण करते हैं। उन्होंने मनुष्य को दूसरी श्रेणी में रखते हुए बताया कि लोभ, लालच और इच्छाओं के कारण मनुष्य पर्यावरण संकट का मुख्य कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति के परिणामस्वरूप पर्यावरण की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।

व्याख्यान की कार्यप्रणाली:
प्रोफेसर अभिलाष ने विषय का प्रस्तुतीकरण पीपीटी (PPT) के माध्यम से किया। व्याख्यान में अन्वेषणात्मक और समालोचनात्मक विश्लेषण पर जोर दिया गया। उन्होंने बताया कि यदि मनुष्य यह समझ जाए कि प्रकृति केवल मनुष्य के लिए नहीं बनी है, बल्कि मनुष्य भी प्रकृति के लिए है, तो पर्यावरण समस्याओं का समाधान संभव है। उनका कहना था कि मानव को स्वयं पर नियंत्रण रखना चाहिए और प्रकृति को उसके स्वाभाविक तरीके से कार्य करने देना चाहिए।

प्रश्नोत्तर सत्र:
व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इसमें ईशी राय, सुधांशु पांडेय, आशीष पांडेय, गौरव दुबे, असितांग कुमार सिंह, अंजलि सिंह और काज़ी फ़रीद आलम ने अपने प्रश्न प्रस्तुत किए। प्रोफेसर अभिलाष ने सभी प्रश्नों का विस्तृत उत्तर देते हुए छात्रों का ध्यान साहित्य और पर्यावरणीय समस्याओं की ओर आकर्षित किया और उन्हें समझाया कि कैसे साहित्य के माध्यम से सामाजिक जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।

संगोष्ठी का समापन:
संगोष्ठी के अंत में कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर राघवेंद्र पांडेय ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए और कार्यक्रम का समापन किया। छात्रों और शिक्षकों ने कार्यक्रम को अत्यंत प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद बताया।


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