सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई, पीएम मोदी करेंगे मुख्यमंत्रीयों संग मीटिंग…

सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती का फैसला लिया है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं के बीच राहत की उम्मीद और संतुलन की स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई है। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 कर दिया गया है, जबकि डीजल पर ₹10 प्रति लीटर की ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इस फैसले की जानकारी न्यूज एजेंसी PTI (Press Trust of India) के माध्यम से सामने आई है।

अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर:
यूएस-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतें 73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 105 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। इस तेजी के कारण तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा और उन्हें घाटे का सामना करना पड़ा। ऐसे में कीमतों में सीधे बढ़ोतरी की संभावना को रोकने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर कीमतों को स्थिर बनाए रखने का प्रयास किया है।

कटौती का वास्तविक असर क्या होगा:
हालांकि एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती की गई है, लेकिन इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को तुरंत मिलने की संभावना कम है। भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम सरकार नहीं बल्कि तेल कंपनियां तय करती हैं। Indian Oil (Indian Oil Corporation), Bharat Petroleum (Bharat Petroleum Corporation Limited) और Hindustan Petroleum (Hindustan Petroleum Corporation Limited) जैसी कंपनियां कच्चे तेल की लागत और अपने मुनाफे के आधार पर कीमतें तय करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां इस राहत का उपयोग अपने पुराने घाटे को पूरा करने में करेंगी।

तेल कंपनियों की मजबूरी:
पिछले कुछ समय से कंपनियां महंगा कच्चा तेल खरीद रही थीं, लेकिन घरेलू बाजार में कीमतें नहीं बढ़ा रही थीं। इससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनियां पेट्रोल पर लगभग ₹24 प्रति लीटर और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर तक का घाटा झेल रही हैं। अब एक्साइज ड्यूटी में कटौती से उन्हें इस नुकसान की भरपाई का अवसर मिलेगा।

प्राइवेट कंपनियों की स्थिति:
सरकारी कंपनियों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी दबाव में हैं। Nayara Energy (Nayara Energy Limited) ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। Bhopal (Madhya Pradesh, India) में इस कंपनी का पेट्रोल ₹111.72 और डीजल ₹94.88 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इससे साफ है कि मौजूदा बाजार में लागत के हिसाब से कीमतें बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

भविष्य में कीमतों का अनुमान:
आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर रहेंगी। अगर वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ता है और सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा की गई एक्साइज कटौती एक ‘कुशन’ की तरह काम करेगी, जिससे उपभोक्ताओं पर अचानक बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा।

सरकार पर आर्थिक प्रभाव:
एक्साइज ड्यूटी घटाने से केंद्र सरकार के राजस्व में कमी आएगी। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि यह फैसला उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि वैश्विक संकट का पूरा असर देश पर न पड़े।

राज्यों की भूमिका भी अहम:
केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद अब राज्यों पर भी वैट (VAT) कम करने का दबाव बढ़ सकता है। यदि राज्य सरकारें भी अपने हिस्से का टैक्स घटाती हैं, तो उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंप पर ₹2 से ₹5 प्रति लीटर तक की वास्तविक राहत मिल सकती है।

कीमतों के उतार-चढ़ाव का गणित:
यह आम धारणा है कि कंपनियां कच्चे तेल के महंगा होने पर कीमतें तुरंत बढ़ा देती हैं, लेकिन सस्ता होने पर नहीं घटातीं। इसके पीछे ‘अंडर-रिकवरी’ का कारण होता है। जब कीमतें अचानक बढ़ती हैं, तो कंपनियां तुरंत भार उपभोक्ताओं पर नहीं डालतीं और घाटा उठाती हैं। बाद में, जब कीमतें घटती हैं, तो वे पहले उस घाटे की भरपाई करती हैं। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति और पुराने महंगे स्टॉक की लागत भी कीमतों को प्रभावित करती है।

प्रधानमंत्री की बैठक और तैयारी:
Narendra Modi (Prime Minister of India) 27 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में ईरान से जुड़े हालात और उनके प्रभाव पर चर्चा की संभावना है। इससे पहले 24 मार्च को राज्यसभा में उन्होंने संकेत दिया था कि अगर यह तनाव जारी रहा, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं और केंद्र व राज्यों को मिलकर काम करना होगा।

ईंधन उपलब्धता पर सरकार का बयान:
सरकार ने देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी की खबरों को खारिज किया है। Ministry of Petroleum and Natural Gas (Ministry of Petroleum and Natural Gas, India) के अनुसार, भारत के पास लगभग 60 दिनों का पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है।

नॉलेज बॉक्स: एक्साइज ड्यूटी क्या है:
एक्साइज ड्यूटी एक प्रकार का इनडायरेक्ट टैक्स है, जो देश में उत्पादित वस्तुओं पर लगाया जाता है। पेट्रोल और डीजल के मामले में यह टैक्स रिफाइनरी से निकलने के बाद प्रति लीटर के हिसाब से लिया जाता है। यह फिक्स्ड होता है, इसलिए सरकार इसे घटाकर राहत दे सकती है या बढ़ाकर राजस्व बढ़ा सकती है।

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