धोखाधड़ी मामले में उत्तर प्रदेश के देवरिया जेल में बंद पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने जेल के भीतर ऐसा कदम उठाया है, जिसने प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ा दी है। गिरफ्तारी से जुड़े सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न कराए जाने के विरोध में उन्होंने शुक्रवार से जेल में अनशन शुरू कर दिया है। इस कदम को उन्होंने अपनी कानूनी लड़ाई का हिस्सा बताते हुए प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक में गतिविधियां तेज हो गई हैं।
सीसीटीवी फुटेज को लेकर विरोध:
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी शाहजहांपुर में ट्रेन के अंदर हुई थी, जहां सीसीटीवी कैमरे लगे थे। उन्होंने प्रशासन से गिरफ्तारी के दौरान के सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर उपलब्ध कराने की मांग की थी। आरोप है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद संबंधित फुटेज उन्हें अब तक नहीं दिया गया। उनका कहना है कि फुटेज और डीवीआर को जानबूझकर गायब किया जा रहा है, ताकि दोषी पुलिसकर्मियों को बचाया जा सके।
जेल में शुरू किया अनशन:
अपनी मांगें पूरी न होने से नाराज होकर अमिताभ ठाकुर ने शुक्रवार से देवरिया जेल में अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक गिरफ्तारी से संबंधित सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। अनशन की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े इंतजामों पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा।
कड़ी सुरक्षा में कोर्ट पेशी:
शुक्रवार को अमिताभ ठाकुर को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय में पेश किया गया। पेशी के दौरान उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत में इस मामले को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं, हालांकि किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले अदालत ने अगली तारीख तय कर दी।
शनिवार को फिर होगी सुनवाई:
अदालत ने शनिवार को दोबारा सुनवाई करने का आदेश दिया है। इस दौरान मामले के विवेचक को सभी पत्रावलियों और जांच रिपोर्ट के साथ न्यायालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि न्यायालय इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करना चाहता है और सभी तथ्यों को सामने लाने पर जोर दे रहा है।
प्रशासन पर गंभीर आरोप:
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी से जुड़े साक्ष्य जानबूझकर छिपाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सीसीटीवी फुटेज सामने आ जाए, तो कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। इसी वजह से फुटेज उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उन्होंने इसे अपनी कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
जेल और जिला प्रशासन में हलचल:
अनशन की खबर फैलते ही जेल प्रशासन और जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। अधिकारियों की निगरानी बढ़ा दी गई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि जेल में कानून-व्यवस्था और कैदी की सुरक्षा बनी रहे।
मामले पर टिकी निगाहें:
अमिताभ ठाकुर के इस कदम के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उनकी जमानत याचिका, अनशन और सीसीटीवी फुटेज को लेकर उठे सवालों पर अब सबकी निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि न्यायालय इस पूरे प्रकरण में क्या रुख अपनाता है और जांच से जुड़े दस्तावेजों को लेकर क्या निर्देश देता है।
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