गन्ने के दाम पर सियासी संग्राम! विपक्ष ने BJP पर साधा निशाना…

महंगाई के अनुपात में मूल्य न मिलने से किसान परेशान:
केंद्र सरकार द्वारा गन्ने के मूल्य में मात्र 30 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी के फैसले पर विपक्ष ने कड़ी नाराजगी जताई है। विपक्ष का कहना है कि महंगाई के अनुपात में किसानों को उनकी लागत के अनुरूप मूल्य नहीं मिल रहा, जिससे उन्हें बेहद कम लाभ हो रहा है। बयान में कहा गया कि भाजपा (BJP) की नीयत किसानों को लेकर पहले ही संदिग्ध साबित हो चुकी है, जब तीन कृषि कानून लाए गए थे। उस समय किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को भाजपा नेताओं द्वारा खालिस्तानी और आतंकवादी आंदोलन बताया गया था।

तीन कृषि कानूनों का दर्द अभी ताज़ा है:
विपक्ष ने याद दिलाया कि तीन काले कानूनों के खिलाफ देशभर में किसानों ने ऐतिहासिक आंदोलन किया था, जिसमें लगभग 700 किसानों ने अपनी जान गंवाई थी। उस समय भी सरकार ने किसानों की आवाज़ को अनसुना किया और अंततः मजबूरी में कानून वापस लेने पड़े। किसानों के हित में बोलने वालों को उस समय बदनाम करने का प्रयास किया गया था।

कांग्रेस सरकार के समय किसानों को मिला था लाभ:
विपक्ष ने अपने बयान में यह भी कहा कि कांग्रेस (Congress) नेतृत्व वाली यूपीए (UPA) सरकार ने हमेशा किसानों के हित में काम किया। उस दौरान 72,000 करोड़ रुपए के किसानों के ऋण माफ किए गए थे और भूमि अधिग्रहण कानून बनाकर किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा सुनिश्चित किया गया था। इसके विपरीत, भाजपा की मोदी (Modi) सरकार के कार्यकाल में किसानों को सिर्फ निराशा और वादों का झुनझुना मिला है।

MSP पर कानून और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों की मांग:
किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा दिया जाए ताकि किसी भी फसल को लागत से कम पर बेचने की मजबूरी न रहे। विपक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार को चाहिए कि वह स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करे और लागत के अनुपात में फसलों का मूल्य तय करे। तभी किसानों की वास्तविक समृद्धि और आय दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा हो सकेगा।

गन्ना किसानों के लिए 30 रुपए की बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं:
विपक्ष का कहना है कि भाजपा जब विपक्ष में थी तो गन्ने के दाम बढ़ाने की बात करती थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद वही मुद्दे भुला दिए गए। वर्तमान में गन्ना किसानों को महंगी खाद, बीज और डीजल की लागत झेलनी पड़ रही है, ऐसे में मात्र 30 रुपए की वृद्धि उनके साथ मजाक के समान है। यदि सरकार वास्तव में किसानों की हितैषी है तो उसे लागत मूल्य के अनुसार गन्ने के दाम तय करने चाहिए।

किसान सम्मान के हकदार, राजनीति के मोहरे नहीं:
विपक्षी दलों ने कहा कि भाजपा को समझना होगा कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं हैं, बल्कि वही इस देश की रीढ़ हैं। दिन-रात खेतों में मेहनत करने वाले अन्नदाता के पसीने की कीमत तय करने का समय आ गया है। किसानों को सम्मानजनक जीवन और उनकी मेहनत का सही मूल्य देना ही सरकार की असली जिम्मेदारी है।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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