वाराणसी: किसानों के संकट पर संसद में आवाज उठाएं राहुल गांधी: समाजसेवी सुबेदार यादव
वाराणसी में समाजसेवी सूबेदार यादव ने किसानों की समस्याओं और उनकी उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों को लेकर संसद में आवाज उठाने की अपील की है। उन्होंने संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को पत्र भेजकर किसानों की समस्याओं को संसद के पटल पर मजबूती से उठाने का आग्रह किया है। सूबेदार यादव का कहना है कि जब देश का अन्नदाता संकट में हो तो लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत संसद इस मुद्दे पर मौन नहीं रह सकती।
जबरन भूमि अधिग्रहण को लेकर चिंता:
सूबेदार यादव ने अपने पत्र में कहा कि विकास परियोजनाओं, औद्योगिक गलियारों और निजी पूंजीपतियों के लाभ के नाम पर देश के विभिन्न हिस्सों में बहुफसली और उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण की स्थिति किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि उचित मुआवजा और किसानों की सहमति के बिना उनकी कृषि भूमि लिए जाने से उनकी आजीविका प्रभावित होती है।
उपजाऊ जमीन छिनने से बढ़ेगा संकट:
समाजसेवी सूबेदार यादव के अनुसार किसान की कृषि भूमि ही उसकी आजीविका का प्रमुख आधार होती है। उपजाऊ जमीन छिन जाने की स्थिति में किसान अपने ही खेत से बेदखल होकर भूमिहीन मजदूर बनने के लिए मजबूर हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव से अपील:
सूबेदार यादव ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव से आग्रह किया है कि वे संसद में किसानों की आवाज बनें और जबरन भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दे को सदन में उठाएं। उन्होंने सरकार से ऐसी नीतियों पर रोक लगाने की मांग संसद के माध्यम से उठाने की अपील की है, जिनसे किसानों की कृषि भूमि प्रभावित हो रही है।
उचित मुआवजा और सहमति की मांग:
पत्र के माध्यम से किसानों की भूमि से जुड़े मामलों में उचित मुआवजा और सहमति सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई है। सूबेदार यादव ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून के नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। उनका आग्रह है कि किसानों की शत-प्रतिशत सहमति और पारदर्शी पुनर्वास व्यवस्था के बिना कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिए।
संसदीय समिति के गठन की मांग:
सूबेदार यादव ने इस विषय की गंभीरता को देखते हुए विशेष संसदीय जांच या चर्चा की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि किसानों की भूमि से जुड़े इस मुद्दे पर संसद में गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि किसानों की समस्याओं और उनके अधिकारों पर प्रभावी चर्चा हो सके।
सड़क से संसद तक हक की लड़ाई:
सूबेदार यादव ने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी उपजाऊ जमीनों का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि किसानों की उपजाऊ भूमि जबरन छीन ली गई तो देश के सामने खाद्य सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने विपक्ष के शीर्ष नेताओं से अपील की कि वे संसद में अन्नदाताओं के अधिकारों के संरक्षण का मुद्दा मजबूती से उठाएं।
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रिपोर्टर: जफ़र इकबाल