फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और फेक ट्रांजैक्शन के जरिए नकली दवाएं खपाने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़, अब तक 6 एफआईआर

Lucknow (लखनऊ)। प्रदेश में नकली और अधोमानक दवाओं के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत Food Safety and Drug Administration (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और फर्जी बैंक लेनदेन के माध्यम से नकली दवाओं की सप्लाई करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में Aminabad Police Station (अमीनाबाद थाना) में अब तक छह एफआईआर दर्ज की गई हैं। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत की जा रही है और नकली दवाओं के पूरे नेटवर्क को समाप्त करने के उद्देश्य से लगातार अभियान जारी रहेगा।

फर्जी बिलिंग से चल रहा था संगठित नेटवर्क:

FSDA (एफएसडीए) आयुक्त Dr. Roshan Jacob (डॉ. रोशन जैकब) ने बताया कि जांच के दौरान यह सामने आया कि Mishra Associates (मिश्रा एसोसिएट्स), Mishra Medical Agency (मिश्रा मेडिकल एजेंसी), Shree Ashok Pharmaceuticals (श्री अशोक फार्मास्युटिकल्स), Bharat Pharma (भारत फार्मा) तथा MDH Pharma (एम.डी.एच. फार्मा) के संचालक बिना वास्तविक दवा आपूर्ति के केवल कागजी स्तर पर क्रॉस-बिलिंग कर रहे थे। फर्जी बैंक लेनदेन दिखाकर नकली और काउंटरफिट दवाओं को वैध साबित करने का प्रयास किया जा रहा था। इसी आधार पर Manish Mishra (मनीष मिश्रा), Amod Kumar Mishra (आमोद कुमार मिश्रा), Sunny Kashyap (सन्नी कश्यप), Devendra Shukla (देवेन्द्र शुक्ला) और Rahul (राहुल) के विरुद्ध BNS (भारतीय न्याय संहिता) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

भौतिक सत्यापन में सामने आई सच्चाई:

जांच के दौरान अधिकारियों ने संबंधित फर्मों का भौतिक सत्यापन भी किया। इसमें पाया गया कि Bharat Pharma (भारत फार्मा) और MDH Pharma (एम.डी.एच. फार्मा) के नाम पर जिन स्थानों से करोड़ों रुपये की दवा खरीद-बिक्री दिखाई गई थी, वहां वास्तविक रूप से किसी भी प्रकार का दवा भंडारण मौजूद नहीं था। संबंधित प्रोपराइटर Amreen Ahsan (अमरीन अहसन) और Mantasha (मंतशा) ने लिखित बयान में बताया कि उनकी जानकारी के बिना उनकी फर्मों का संचालन Devendra Shukla (देवेन्द्र शुक्ला) द्वारा किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान न तो दवाओं का स्टॉक मिला और न ही खरीद से संबंधित बिल प्रस्तुत किए जा सके। विभाग के अनुसार इससे फर्जी बिलिंग के जरिए नकली दवाओं के कारोबार की पुष्टि हुई।

दवा की कीमतों में अंतर से बढ़ा संदेह:

जांच में यह भी सामने आया कि Mishra Medical Agency (मिश्रा मेडिकल एजेंसी) और Mishra Associates (मिश्रा एसोसिएट्स) ने प्रसिद्ध एंटीबायोटिक दवा Augmentin Duo 625 की खरीद वास्तविक लागत लगभग 116.70 रुपये के स्थान पर केवल 56.60 रुपये में दर्शाई थी। जब संबंधित वितरक Medi King Pharma (मेडी किंग फार्मा) से जानकारी ली गई तो उसने ऐसी किसी भी बिक्री से लिखित रूप में इनकार कर दिया। इस तथ्य के बाद जांच एजेंसियों का संदेह और मजबूत हो गया कि बाजार में नकली दवाओं की आपूर्ति की जा रही थी।

पुलिस और विभाग ने मिलकर की कार्रवाई:

Dr. Roshan Jacob (डॉ. रोशन जैकब) ने बताया कि इस अभियान में स्थानीय पुलिस प्रशासन का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। Lucknow Police Commissionerate (लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट) की टीम के सहयोग से कार्रवाई को प्रभावी ढंग से अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि Chief Minister Yogi Adityanath (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) की मंशा के अनुरूप नकली दवाओं के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को संदिग्ध थोक दवा कारोबारियों, एजेंटों और सप्लाई चेन पर लगातार निगरानी रखने, दोषी पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त करने और कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

जुलाई में लगातार दर्ज हुई छह एफआईआर:

विभाग के अनुसार जुलाई माह में नकली दवाओं के नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई की गई। 6 जुलाई को Alambagh (आलमबाग) में नकली दवाओं की खेप पकड़े जाने के बाद पहली एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद 19 जुलाई को Aminabad (अमीनाबाद) स्थित अवैध गोदाम से लगभग 21 लाख रुपये मूल्य की नकली दवाएं बरामद की गईं। 16 और 17 जुलाई को बिना लाइसेंस दवा भंडारण और परिवहन के मामलों में कार्रवाई की गई। 24 और 25 जुलाई को फर्जी बिलिंग से जुड़े मामलों में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज हुईं। इसके बाद 29 जुलाई को छठी एफआईआर दर्ज कर विभाग ने स्पष्ट किया कि नकली दवाओं के नेटवर्क के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

संदिग्ध फर्मों पर कार्रवाई और अंतरराज्यीय जांच:

जांच पूरी होने तक SKG Medicals (एसकेजी मेडिकल्स), Gayatri Pharma and Surgical (गायत्री फार्मा एंड सर्जिकल), Health Plus (हेल्थ प्लस), MK Pharma (एमके फार्मा), Maa Ambe Pharma (मां अम्बे फार्मा), RN Pharma (आरएन फार्मा), Sunlight Pharma (सनलाइट फार्मा), Sonal Pharma (सोनल फार्मा) और Supervision Pharma (सुपरविजन फार्मा) के संचालन पर रोक लगाकर उनके वित्तीय रिकॉर्ड और लेजर की जांच शुरू की गई है। कई प्रतिष्ठानों को सील भी किया गया है।

विभाग ने बताया कि जांच अब Rajasthan (राजस्थान) और Uttarakhand (उत्तराखंड) तक पहुंच चुकी है। प्रारंभिक जांच में अमीनाबाद से बरामद नकली दवाओं के तार राजस्थान से जुड़े कुछ आरोपियों तक मिले हैं, जबकि Dehradun (देहरादून) में नकली दवा निर्माण से जुड़े मामले में भी चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। विभाग का कहना है कि नकली दवाओं के पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच जारी है।

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