जाली दस्तावेज़ से मिली नौकरी होगी शून्य, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, जाली दस्तावेज़ से मिली नौकरी नियुक्ति के समय से ही शून्य मानी जाएगी
  • कोर्ट ने बीएसए के आदेश को सही ठहराया, जिसके तहत वेतन की वसूली का निर्देश दिया गया था
  • शिक्षक की नियुक्ति रद्द करने के साथ-साथ प्राप्त वेतन वापस करने का आदेश भी वैध माना गया
  • अदालत ने स्पष्ट किया – जाली प्रमाणपत्र पर बनी नियुक्ति वैधानिक नहीं हो सकती

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने सरकारी नौकरी पाने के लिए जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया है तो उसकी नियुक्ति उसी क्षण से ही शून्य मानी जाएगी। साथ ही वह व्यक्ति उस पद पर कभी भी वैधानिक रूप से कार्यरत नहीं माना जाएगा।

यह फैसला न्यायमूर्ति सैयद वाजिद हसन रिजवी और न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने शिक्षा अधिकारी द्वारा 6 अगस्त 2022 को दिए गए आदेश को सही ठहराया, जिसमें जाली प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति पाए एक सहायक अध्यापक की सेवा समाप्त कर दी गई थी और वेतन वापसी का आदेश दिया गया था।

मामला प्रतापगढ़ जिले का है, जहां अभ्यर्थी ने वर्ष 2010 में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति पाई थी। जांच में पता चला कि उसने बीटीसी प्रशिक्षण का जाली प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। प्राथमिक शिक्षा विभाग ने जब दस्तावेज़ों की जांच कराई तो फर्जीवाड़ा सामने आया। इसके बाद बीएसए ने उसकी नियुक्ति रद्द करते हुए वेतन वापसी का आदेश पारित कर दिया।

अभ्यर्थी ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन कोर्ट ने कहा कि फर्जी प्रमाणपत्र पर मिली नियुक्ति को वैधानिक नहीं माना जा सकता। इसलिए नियुक्ति तिथि से ही उसे शून्य घोषित किया जाता है। साथ ही, उस अवधि में जो भी वेतन लिया गया है, उसे वापस करना ही होगा।

हाईकोर्ट का यह फैसला साफ संदेश देता है कि फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे नौकरी पाना अब किसी भी हाल में संभव नहीं है। न केवल नियुक्ति रद्द होगी, बल्कि वेतन की भी वसूली की जाएगी। यह निर्णय उन तमाम मामलों के लिए नजीर बनेगा जहां सरकारी सेवाओं में फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे प्रवेश करने की कोशिश की जाती है।

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading