एटा: मेडिकल कॉलेज में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने किया बहिष्कार, पत्रकारों में आक्रोश।

एटा जनपद में मेडिकल कॉलेज में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उस समय स्थिति बदल गई, जब प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने सामूहिक रूप से कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। इस फैसले के बाद पत्रकारों में आक्रोश साफ तौर पर देखने को मिला और पूरे मामले ने चर्चा का रूप ले लिया। बताया गया कि यह कदम पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता के मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने के विरोध में उठाया गया।

A group of men standing together outdoors, some smiling at the camera while others are engaged in conversation. The setting appears to be a busy street with vehicles and posters in the background.

अभद्रता के आरोपों पर बढ़ा विवाद:
पत्रकारों का कहना है कि हाल ही में हुए एक घटनाक्रम में उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया था, लेकिन इस मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई। इसी को लेकर पत्रकारों में नाराजगी लगातार बढ़ती रही। आरोप है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उदासीन रवैया अपनाए हुए है, जिससे पत्रकार समुदाय में असंतोष और गहरा गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस का सामूहिक बहिष्कार:
इसी नाराजगी के चलते मेडिकल कॉलेज (Medical College) में आयोजित प्रेस वार्ता का पत्रकारों ने एकजुट होकर बहिष्कार किया। यह प्रेस वार्ता एक विधायक की मौजूदगी में हो रही थी, लेकिन पत्रकारों ने इसमें शामिल न होकर अपनी असहमति स्पष्ट रूप से जताई। इस दौरान किसी भी पत्रकार ने कार्यक्रम को कवर नहीं किया, जो उनकी एकजुटता का संकेत माना जा रहा है।

A group of men posing for a selfie in a street, with motorcycles in the background. They are wearing casual clothing and are gathered around a motorcycle.

पत्रकार एकता की दिखाई ताकत:
इस बहिष्कार के जरिए पत्रकारों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सम्मान और अधिकारों के मुद्दे पर वे एकजुट हैं। साथियों से भी अपील की गई कि वे अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए इसी तरह संगठित रहें। यह कदम केवल विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे पत्रकार एकता की एक मजबूत मिसाल के रूप में भी देखा जा रहा है।

प्रशासन पर उठे सवाल:
मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। पत्रकारों का मानना है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई की जाती, तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाता है और क्या कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

बढ़ता आक्रोश और आगे की रणनीति:
इस घटनाक्रम के बाद पत्रकारों में आक्रोश और अधिक बढ़ गया है। चर्चा है कि यदि जल्द ही मामले में कार्रवाई नहीं होती है, तो विरोध के स्वर और तेज हो सकते हैं। फिलहाल, पत्रकारों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वे सम्मान से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे।


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रिपोर्टर: विपिन कुमार

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