Lucknow। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को शुरू हुए तीन दिवसीय “रोजगार महाकुंभ 2025” में हजारों की संख्या में युवा पहुंचे। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। सरकार का दावा है कि इस आयोजन से करीब 50 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसमें 100 से अधिक कंपनियां भाग ले रही हैं, जिनमें 20 से ज्यादा विदेशी कंपनियां भी शामिल हैं। मंगलवार सुबह तक आयोजन स्थल इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के आसपास करीब 1 लाख युवाओं का जमावड़ा लग गया। 2 किमी एरिया में युवा ही युवा नजर आ रहे थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश में अब हर युवा को नौकरी की गारंटी मिलेगी। हमारी सरकार न्यूनतम मजदूरी की भी गारंटी दे रही है। कंपनियों को अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा, उसका खर्च सरकार वहन करेगी। राज्य में कोई युवा बेरोजगार न रहे, यह हमारा संकल्प है। बीते आठ सालों में 8.5 लाख से अधिक सरकारी भर्तियाँ की गई हैं, जिनमें पुलिस और शिक्षकों की बड़ी संख्या शामिल है।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में स्वरोजगार को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। “हमारी सरकार युवाओं को बिना ब्याज और बिना गारंटी के ऋण उपलब्ध करा रही है। CM युवा उद्यमी योजना और ODOP जैसी योजनाओं के तहत लाखों युवाओं ने अपना व्यवसाय शुरू किया है। छह महीने के भीतर ही 70 हजार से ज्यादा युवाओं को लाभ दिया गया है।”
भीड़ और अव्यवस्था से परेशान अभ्यर्थी
हालांकि, रोजगार महाकुंभ में उमड़ी भीड़ ने आयोजन की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। मंगलवार सुबह तक आयोजन स्थल और आसपास के इलाकों में लगभग एक लाख युवा जमा हो गए थे। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से लेकर दो किलोमीटर तक सिर्फ अभ्यर्थियों का हुजूम दिखाई दे रहा था।
कई युवाओं ने मीडिया से बातचीत में अव्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। एक अभ्यर्थी ने कहा, “हम रात से यहां लाइन में खड़े हैं। खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। किसी अधिकारी ने हमारी बात तक नहीं सुनी। नौकरी दिलाने का दावा किया गया था लेकिन यहां तो सीवी तक कूड़े में फेंक दी जा रही हैं।”
एक अन्य उम्मीदवार ने आरोप लगाया कि उन्हें नौकरी को लेकर भ्रमित किया जा रहा है। “पहले कहा गया कि जर्मनी में जॉब मिलेगी, अब कह रहे हैं कि दुबई में ऑफर है। हमें समझ ही नहीं आ रहा कि किस स्टॉल पर जाएं।”
अभ्यर्थियों ने यह भी शिकायत की कि मेले में कोई मार्गदर्शन केंद्र नहीं बनाया गया है। “किस स्टॉल पर जाना है, कौन-सी कंपनी किस सेक्टर की भर्ती कर रही है—इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही। हम घंटों से एक स्टॉल से दूसरे स्टॉल भटक रहे हैं।”
प्रशासनिक चुनौती और सुधार की कोशिशें
युवाओं की भारी भीड़ के कारण कई बार हालात बेकाबू हो गए। स्थिति को संभालने के लिए लखनऊ की डीएम विशाख जी. अय्यर और पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सिंह सेंगर खुद मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर युवाओं को नियंत्रित करने और बैठाने की व्यवस्था की। फिर भी, भीड़ में मौजूद कई अभ्यर्थी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते नजर आए। उनका कहना था कि रोजगार मेले को लेकर बड़े दावे किए गए थे, लेकिन हकीकत में यहां अफरा-तफरी और अव्यवस्था है।
युवाओं का कहना है कि यहां कोई सुनवाई नहीं है। कोई नौकरी नहीं है, न खाने की व्यवस्था, न पीने की। हम लोग रात से ही यहां आ गए थे। इंतजार में थे कि नौकरी मिलेगी, लेकिन यहां तो कोई सुनवाई ही नहीं हुई। वे बेरोजगारी हाय-हाय के नारे लगा रहे थे। उनका ये भी आरोप है कि उनकी सीवी लेकर उसे कूड़े में फेंक दिया गया।
बेरोजगारों का कहना था कि अव्यवस्था का आलम यह कि हमें किस स्टॉल पर जाना है, यह बताने वाला भी कोई नहीं था। इस स्टॉल से उस स्टॉल भटक रहे थे। कुछ युवाओं ने कहा कि जर्मनी में जॉब का ऑफर देकर बुलाया था। अब कह रहे हैं कि दुबई में नौकरी मिलेगी।

सरकार का लक्ष्य और भविष्य की राह
योगी ने कहा- परंपरागत उद्गम सिर्फ यूपी के अंदर है। 2017 में जब हम लोग आए थे तो हम लोगों ने फिर से उन बंद संस्थाओं को देखा। प्रत्येक जनपद के लिए एक जनपद-एक उत्पाद की एक नई स्कीम को आगे बढ़ाया। आज उसी का परिणाम है कि ओडीओपी ने प्रदेश के अंदर एमएसएमई के क्षेत्र में पूरे प्रदेश के अंदर 96 लाख यूनिट को फिर से पुनर्जीवित करके करोड़ों युवाओं को काम देने और उसी के जनपद में रोजगार देने में मदद की। एमएसएमई प्रोडक्ट और उससे जुड़े हुए जो हमारे लघु और कुटीर उद्योग थे। इसका एहसास हम लोगों को तब हुआ जब कोरोनाकाल में बड़े पैमाने पर प्रवासी, कामगार और श्रमिक अपने-अपने जनपदों की तरफ प्रवेश किए।
सीएम ने कहा- हम लोगों ने 24 जनवरी 2025 को सीएम युवा उद्यमी स्कीम लॉन्च की। जिसके तहत युवाओं की रुचि के अनुसार रोजगार मिलेगा। उनको ब्याज मुक्त, गारंटी मुक्त, ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई गई। उसके लिए हमारी गवर्नमेंट 10% मार्जिन मनी भी उपलब्ध करा रही है। अब तक 70000 युवाओं ने इस स्कीम के साथ जुड़कर के स्वयं का उद्यम स्थापित करने की दिशा में काम प्रारंभ किया है।
पिछले 8 वर्ष के अंदर उत्तर प्रदेश पुलिस में 2 लाख 19 हजार भर्तियां हमने कीं और सरकारी नौकरी दी। उत्तर प्रदेश के अंदर 156000 शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न किया और अलग-अलग विभागों को देख तो शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, विश्वविद्यालय इन सभी को अगर हम जोड़ते हैं तो यह संख्या साढ़े 8 लाख होती है, जो देश में सबसे अधिक है। अब तक 33 से ज्यादा सैक्टोरियल पॉलिसी हमने तैयार की है।
“लखनऊ का रोजगार महाकुंभ युवाओं की उम्मीदों और नाराजगी—दोनों का प्रतीक बन गया है। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को नौकरी और न्यूनतम वेतन की गारंटी का भरोसा दिया है, वहीं दूसरी ओर अभ्यर्थियों ने अव्यवस्था और बेरोजगारी से जूझने की पीड़ा भी सामने रखी है। अगले दो दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और प्रशासन इस बड़े आयोजन को कितनी पारदर्शिता और सुचारुता से आगे बढ़ा पाते हैं।”



