रिपोर्टर: अनुज कुमार
लखनऊ में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर विश्व हिन्दू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के तहत हजरतगंज (Hazratganj) स्थित गांधी प्रतिमा से माध्यमिक शिक्षक विभाग (Secondary Education Department) तक पैदल मार्च निकाला गया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर एकजुटता दिखाई। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और प्रशासन की मौजूदगी में संपन्न हुआ।
पैदल मार्च के जरिए रखी गईं मांगें:
विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च के दौरान शिक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़ी पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं। कार्यकर्ताओं का कहना था कि वर्तमान समय में शिक्षा के वातावरण को अनुशासित, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाए जाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से संगठन ने अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से सरकार और शिक्षा विभाग के समक्ष रखा।
पहचान सुनिश्चित करने के लिए नियमों की मांग:
परिषद की ओर से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में चेहरा ढकने वाले बुर्के पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई। संगठन का तर्क था कि इससे छात्रों की पहचान सुनिश्चित होगी और नकल जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। कार्यकर्ताओं का कहना था कि परीक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।
कैंपस और हॉस्टल की सुरक्षा पर जोर:
प्रदर्शन के दौरान कैंपस में बढ़ते विवादों को लेकर भी चिंता जताई गई। परिषद ने मांग की कि शैक्षणिक संस्थानों के हॉस्टलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर सख्ती से रोक लगाई जाए। संगठन के अनुसार बाहरी लोगों की आवाजाही से अनुशासन भंग होता है और छात्रों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।
बिना पंजीकरण वाली कोचिंग पर कार्रवाई की मांग:
विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रही कोचिंग संस्थाओं को बंद कराने की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि ऐसी संस्थाएं न तो मानकों का पालन करती हैं और न ही छात्रों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर जिम्मेदार होती हैं। इसके साथ ही सभी कोचिंग संस्थानों की नियमित जांच की मांग भी उठाई गई।
बेसमेंट में चल रही कोचिंग पर सुरक्षा चिंता:
परिषद ने बेसमेंट में संचालित कोचिंग और लाइब्रेरी को सुरक्षा कारणों से बंद कराने की मांग रखी। संगठन का कहना था कि आपात स्थिति में बेसमेंट में मौजूद छात्रों की जान को खतरा हो सकता है, इसलिए ऐसे स्थानों पर शैक्षणिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
स्कूलों में ड्रेस कोड और नियमित कक्षाएं:
प्रदर्शन के दौरान स्कूलों में ड्रेस कोड सख्ती से लागू करने और उसका उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई। इसके साथ ही सभी स्कूलों में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। परिषद का कहना था कि अनुशासन और नियमित पढ़ाई से ही शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन:
मार्च के समापन पर संगठन की ओर से संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंपा गया। परिषद के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि सरकार और शिक्षा विभाग इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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