राजनीति और सत्ता. कहा जाता है कि नेता सत्ता पाने के लिए राजनीति में हर तरह के दांव पेंच इस्तेमाल करके एक रणनीति बनाता है। चाहे वो जनता को अपनी ओर आकर्षित करने की नीति हो या किसी मजबूत नेता को सत्ता की कुर्सी से उतरने की रणनीति हो। राजनीति में अब वो दौर शायद कम होता चला गया जिसमे नेता जनहित के लिए अपने आपको समर्पित कर दे। राजनीति के जानकारों का कहना है कि ये राजनीति का वो दौर है जिसमे जिसके पास जो भी ताकत है उसका इस्तेमाल सत्ता को बरकरार रखने या सत्ता को हासिल करने के लिए किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि ऐसा पहले हुआ नही लेकिन अब इसका शत प्रतिशत इस्तेमाल करने का प्रयास है। इस ताकत द्वारा दूसरे नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं, वो जेल में जाते हैं और जनता के सामने, जनता की सेवा के लिए जनता की मतों से जिम्मेदारी संभाल रहे नेता को भ्रष्टाचारी बना दिया जाता है। राजनीति में इस प्रयोग का क्या नफा नुकसान हो सकता है इस पर एक अलग बहस हो सकती है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ED ने गिरफ़्तार कर लिया। वो मुख्यमंत्री रहते हुए जेल में जाने वाले पहले मुख्यमंत्री हैं। अन्ना आंदोलन से जनता को हक दिलाने की लड़ाई लड़ते लड़ते, देश की राजनीति बदलने के लिए राजनीति का सहारा लिया और जनता ने उनका साथ भी दिया। राजधानी दिल्ली में जहां बड़ी संख्या ऐसे लोग रहते हैं, जो वहां अपने परिवार को पालने के लिए नौकरी करने आते हैं, पढ़ने आते हैं, रोजगार करने आते हैं। केजरीवाल सरकार के बिजली और पानी वाले योजना का सबसे ज्यादा लाभ उन्हें ही मिला। मोहल्ला क्लिनिक का नया प्रयोग उन सभी के काम आया। लेकिन जनता के हित बात करने वाले और भ्रष्टाचार से लड़ने का दावा करने वाले केजरीवाल खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गए। केजरीवाल के साथी, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन पहले से ही जेल में हैं। कहा जा रहा है कि अभी तक तो आरोप भी सिद्ध नहीं हुए। लेकिन रिमांड बढ़ती जा रही है। जानकारों का कहना है कि ED, CBI, Income Tax जैसे एजेंसियों की कमांड केंद्र सरकार के हाथ में होती है।
लोकसभा चुनाव से पहले देश के कई बड़े नेताओं पर ED की कार्रवाई हुई और चल रही है। ये गंभीर सवाल है कि क्या विपक्ष के नेताओं पर ही भ्रष्टाचार के आरोप हैं, बाकी सब ईमानदार हैं? ये दौर आश्चर्य से भरा हुआ है, जिस पर जनता भी भरोसा नही कर पा रही है।
दिल्ली की सियासत में बड़ा उफान बृहस्पतिवार को देखने को मिला। शाम ढलते ही मुख्यमंत्री निवास पर प्रवर्तन निदेशालय की टीम पहुंच गई और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से शराब नीति मामले में पूछताछ शुरू कर दी। रात होते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। शराब घोटाले में आम आदमी पार्टी के दो बड़े नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह पहले ही जेल जा चुके हैं। अब तक किन-किन लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है, नई शराब नीति में किस तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और इसकी जांच कैसे शुरू हुई? इन्हीं सवालों का जवाब आपको यहां मिलेगा।
नई शराब नीति क्या थी?
17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने राज्य में नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इसके पहले दिल्ली में शराब की 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत प्राइवेट थीं। नई नीति लागू होने के बाद 100 प्रतिशत प्राइवेट हो गईं। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा।
जांच कैसे शुरू हुई?
जुलाई 2022 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव ने आबकारी नीति में अनियमितता होने के संबंध में एक रिपोर्ट उपराज्यपाल को सौंपी थी। इसमें नीति में गड़बड़ी होने के साथ ही तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर उपराज्यपाल ने नई आबकारी नीति (2021-22) के क्रियान्वयन में नियमों के उल्लंघन और प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देकर 22 जुलाई, 22 को सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इस पर सीबीआई ने सिसोदिया समेत 15 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।
भ्रष्टाचार के क्या आरोप लगे?
सीबीआई और ईडी का आरोप है कि आबकारी नीति को संशोधित करते समय अनियमितता की गई और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ दिया गया। इसमें लाइसेंस शुल्क माफ या कम किया गया। इस नीति से सरकारी खजाने को 144.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मामले में जांच की सिफारिश करने के बाद 30 जुलाई, 22 को दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति को वापस लेते हुए पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी थी। आबकारी विभाग के प्रमुख रहते हुए मनीष सिसोदिया ने मार्च 2021 में नई आबकारी नीति का ऐलान किया था। 17 नवंबर 2021 को इसे लागू किया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा था कि नई नीति के तहत शराब की बिक्री में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इसके पहले दिल्ली में शराब की 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत निजी थीं। नई नीति लागू होने के बाद 100 प्रतिशत प्राइवेट हो गईं। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा।
दिल्ली आबकारी नीति मामले में कब क्या हुआ
17 नवंबर 2021: दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति लागू की।
8 जुलाई 2022: दिल्ली के मुख्य सचिव ने नीति में घोर उल्लंघन की रिपोर्ट दी।
22 जुलाई 2022: उपराज्यपाल ने नियमों के उल्लंघन की सीबीआई जांच की सिफारिश की।
19 अगस्त 2022: सीबीआई ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया, समेत तीन अन्य लोगों के घर पर छापे मारे।
22 अगस्त 2022: प्रवर्तन निदेशालय ने आबकारी नीति पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया।
सितंबर 2022: आम आदमी पार्टी के संचार प्रमुख विजय नायर को सीबीआई ने गिरफ्तार किया।
मार्च 2023: प्रवर्तन निदेशालय ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया।
अक्तूबर 2023: आप नेता संजय सिंह को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया।
अक्तूबर 2023: ईडी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पहला समन भेजा।
16 मार्च 2024: भारत राष्ट्र समिति की नेता के कविता को ईडी ने गिरफ्तार किया।
21 मार्च 2024: दिल्ली आबकारी नीति मामले में केजरीवाल बृहस्पतिवार को नौवीं बार ईडी के समन में शामिल नहीं हुए। कुछ घंटों बाद हाईकोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से इनकार कर दिया।
शराब नीति मामले में अब तक गिरफ्तारी
विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, समीर महेंद्रू, पी सरथ चंद्रा, बिनोय बाबू, अमित अरोड़ा, गौतम मल्होत्रा, राघव मंगुटा, राजेश जोशी, अमन ढाल, अरुण पिल्लई, मनीष सिसोदिया, दिनेश अरोड़ा, संजय सिंह, के. कविता