रुहेलखंड की सियासत में धर्मेंद्र कुमार कश्यप के बयान से बड़ा राजनीतिक हलचल पैदा हो गया है। आंवला से दो बार सांसद रहे और कश्यप समाज के प्रमुख नेताओं में शामिल धर्मेंद्र कुमार कश्यप ने भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) छोड़ने का खुला ऐलान किया है। सोशल मीडिया पर समुद्र किनारे सूर्यास्त की तस्वीर के साथ लिखे गए ‘टाटा बाय-बाय’ शब्दों के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर अब उनके बयानों से काफी हद तक स्थिति साफ होती दिखाई दे रही है। उनके आवास के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटी है और उन्होंने पार्टी के भीतर हुई कथित अनदेखी तथा 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने खिलाफ हुए कथित भीतरघात को लेकर नाराजगी जाहिर की है।
अपनों के धोखे और पार्टी की अनदेखी पर जताई नाराजगी:
मीडिया से बातचीत में धर्मेंद्र कश्यप ने 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने खुले तौर पर उनकी खिलाफत की और उन्हें हराने का काम किया, अगर वही लोग पार्टी की अग्रिम पंक्ति में बैठेंगे तो उन्हें निश्चित तौर पर कष्ट होगा। उन्होंने कहा कि जब ऐसे लोगों के खिलाफ पार्टी कोई कार्रवाई नहीं करेगी और चिंता भी व्यक्त नहीं करेगी, तो उनके जैसे स्वाभिमानी व्यक्ति के लिए ‘टाटा बाय-बाय’ कहना स्वाभाविक हो जाता है।
धर्मेंद्र कश्यप ने अपने बयान में शायराना अंदाज भी अपनाया। उन्होंने कहा, “जब से चला हूं मंजिल पर मेरी निगाह है, कभी मील का पत्थर नहीं देखा।” भाजपा के बैनर और पोस्टर उनके आवास से हटने तथा नई राजनीतिक राह चुनने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि इसे बिल्कुल निश्चित माना जाए।
समाजवादी पार्टी में जाने के दिए संकेत:
धर्मेंद्र कश्यप ने अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा पूरी तरह नहीं किया, लेकिन उनके बयानों से समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) में जाने के संकेत जरूर मिले। सपा में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनका अगला ठिकाना क्या होगा, यह बहुत जल्द सबके सामने आ जाएगा।
उन्होंने बताया कि आंवला के साथ पूरे बरेली मंडल और जनपद में उनके समर्थकों की बड़ी बैठक बुलाई जा रही है। इसी बैठक में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की राय ली जाएगी। इसके बाद ही किसी नए राजनीतिक दल में शामिल होने की औपचारिक घोषणा किए जाने की बात कही गई है।
अपनी बेटी कीर्ति कश्यप की सक्रिय राजनीति और दातागंज से दावेदारी को लेकर भी धर्मेंद्र कश्यप ने कहा कि टिकट जहां से चाहेंगे, वहां से मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी कोई भी हो, अंतिम फैसला समर्थकों की बैठक में तय होगा।
राज्यसभा की अनदेखी या भीतरघात की नाराजगी?:
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची सामने आने के बाद से ही धर्मेंद्र कश्यप के तेवर चर्चा में थे। सूची में बरेली क्षेत्र से कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री व झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को जगह दी गई। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में मामूली अंतर से हारने वाले धर्मेंद्र कश्यप को राज्यसभा के लिए जगह नहीं मिली।
हालांकि धर्मेंद्र कश्यप ने कैमरे पर कहा कि राज्यसभा से उनका कोई खास मतलब नहीं था, लेकिन संगठन में लगातार कथित उपेक्षा और 2024 की हार के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे नेताओं को महत्व मिलने से उनकी नाराजगी सामने आई है। सोशल मीडिया प्रोफाइल से पार्टी से जुड़ी पहचान हटाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाली तस्वीर बदलने की चर्चाओं ने भी उनके राजनीतिक रुख को लेकर अटकलों को बढ़ाया।
पंचायत से संसद तक रहा सियासी सफर:
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ। वर्ष 1995 से 2000 के बीच उन्होंने क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में चुनावी राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2000 से 2002 के बीच वह जिला पंचायत सदस्य चुने गए। वर्ष 2002 में बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) के टिकट पर सन्हा, अब बिथरी चैनपुर, विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बने।
सत्ता परिवर्तन के बाद वर्ष 2003 से 2007 के बीच वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। वर्ष 2007 में सपा के टिकट पर दोबारा विधायक बने और प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। वर्ष 2009 में सपा के टिकट पर आंवला लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और मेनका गांधी को कड़ी टक्कर दी। इस चुनाव में उन्हें 7,681 वोटों के अंतर से हार मिली।
वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी की लहर के दौरान धर्मेंद्र कश्यप भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने सपा के कुंवर सर्वराज सिंह को 1.38 लाख से अधिक मतों के अंतर से हराकर पहली बार लोकसभा चुनाव जीता। वर्ष 2019 में भाजपा के टिकट पर उन्होंने बसपा की रुचि वीरा को 1.13 लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया और लगातार दूसरी बार लोकसभा पहुंचे।
वर्ष 2024 में भाजपा ने उन्हें तीसरी बार आंवला से चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि कड़े मुकाबले में वह समाजवादी पार्टी के नीरज मौर्य से 15,969 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। इसके बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं बनी हुई थीं।
धर्मेंद्र कश्यप की राजनीतिक प्रोफाइल:
धर्मेंद्र कुमार कश्यप का जन्म 1 जून 1968 को बरेली के कांधरपुर में बताया गया है। उन्होंने 10वीं तक शिक्षा प्राप्त की है और कृषि उनका पेशा बताया गया है। उनके पिता का नाम महेंद्र पाल कश्यप, माता का नाम कुमार दाई कश्यप और पत्नी का नाम सरोज कश्यप है। उनकी राजनीतिक पहचान उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और आंवला से दो बार लोकसभा सांसद के तौर पर रही है।
धर्मेंद्र कश्यप को रुहेलखंड में गैर-यादव पिछड़ा वर्ग, विशेष रूप से कश्यप समाज के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में गिना जाता है। अब भाजपा छोड़ने के उनके ऐलान और आगे की राजनीतिक दिशा पर समर्थकों की बैठक के बाद तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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