काशी की देव दीपावली पर कुछ है बेहद खास…

वाराणसी (Varanasi) में 5 नवंबर को देव दीपावली का भव्य आयोजन होगा। इस बार की देव दीपावली विशेष होगी क्योंकि यह देश के वीर शहीदों को समर्पित की जाएगी। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शहीद हुए 26 जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए पूरी काशी (Kashi) दीपों की रोशनी में नहाएगी। गंगा के घाटों पर लाखों दीप प्रज्वलित होंगे और पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग जाएगा।

भव्य आयोजन की तैयारी पूरी:
देव दीपावली के मौके पर इस वर्ष वाराणसी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। अनुमान है कि लगभग दो लाख लोग गंगा आरती के साक्षी बनेंगे। इनमें से कई घाटों पर मौजूद रहेंगे, जबकि अनेक लोग गंगा नदी में नावों से इस अद्भुत दृश्य का आनंद लेंगे। आयोजन को लेकर प्रशासन और गंगा सेवा निधि (Ganga Seva Nidhi) की ओर से पूरी तैयारियां कर ली गई हैं।

शहीदों को समर्पित देव दीपावली:
इस बार की देव दीपावली ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शहीद हुए 26 जवानों की स्मृति को समर्पित होगी। उनके सम्मान में घाटों पर विशेष दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति गीतों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। काशी के घाटों से देशभक्ति की भावना का संदेश पूरे देश में गूंजेगा।

महाआरती का भव्य आयोजन:
गंगा आरती का आयोजन इस बार और भी विशेष रहेगा। इस पवित्र अवसर पर 21 अर्चक और 42 देवी-कन्याएं महाआरती करेंगी। यह अनुष्ठान गंगा सेवा निधि (Ganga Seva Nidhi) के तत्वावधान में संपन्न होगा। आरती के दौरान मंत्रोच्चारण, घंटों की ध्वनि और दीपों की रौशनी का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

पहली बार यूट्यूब (YouTube) पर लाइव प्रसारण:
इस वर्ष पहली बार संस्था की ओर से अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर देव दीपावली महाआरती का लाइव प्रसारण किया जाएगा। इसके माध्यम से देश और विदेश में बसे भारतीय इस पावन क्षण का अनुभव घर बैठे कर सकेंगे। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) भी इस आयोजन को ऑनलाइन देखेंगे।

आतिशबाजी और लेजर शो का आकर्षण:
देव दीपावली के अवसर पर गंगा किनारे 15 मिनट तक भव्य आतिशबाजी होगी जो आसमान को रोशन कर देगी। इसके अलावा तीन शिफ्ट में करीब एक घंटे का लेजर शो भी आयोजित किया जाएगा। इस शो में काशी की आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक झलक दिखाई जाएगी, जो दर्शकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव साबित होगी।

गंगा आरती की परंपरा और इतिहास:
गंगा आरती की परंपरा की शुरुआत काशी के घाटों से हुई थी। इस परंपरा को गंगा सेवा निधि ने कई वर्ष पूर्व शुरू किया था, जिसका उद्देश्य गंगा की पवित्रता और धार्मिक महत्व को बनाए रखना था। आज यह परंपरा देव दीपावली जैसे महोत्सवों में पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित करती है।

काशी में भक्ति और श्रद्धा का संगम:
देव दीपावली के अवसर पर वाराणसी के सभी घाटों को दीपों से सजाया जाएगा। दशाश्वमेध, अस्सी और राजेंद्र प्रसाद घाट समेत सैकड़ों घाटों पर दीपों की पंक्तियाँ सजेंगी। हर ओर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल होगा। लोग अपने परिवार के साथ दीप जलाकर गंगा मईया से आशीर्वाद मांगेंगे।


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डिस्क्लेमर:यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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