देवरिया (Deoria) में जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने कलेक्ट्रेट कार्यकक्ष में जल संसाधन से जुड़े विभागों की बैठक कर विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में जल निगम ग्रामीण एवं शहरी, बाढ़ खंड, सिंचाई, लघु सिंचाई तथा नलकूप विभाग के कार्यों की जानकारी ली गई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को परियोजनाओं में तेजी लाते हुए निर्धारित समयसीमा में गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए।

परियोजनाओं की नियमित निगरानी के निर्देश:
जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि विभागीय परियोजनाओं और विकास कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होने देने तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सभी कार्य पूरे कराने पर जोर दिया। जिलाधिकारी ने जनहित से जुड़ी योजनाओं में लापरवाही और शिथिलता से बचने के निर्देश दिए।
पाइपलाइन के बाद सड़कों की मरम्मत पर जोर:
जल निगम की योजनाओं की समीक्षा के दौरान पाइपलाइन बिछाने के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों का पुनर्निर्माण समय से पूरा कराया जाए, ताकि आम लोगों को आवागमन में परेशानी न हो। इसके साथ ही पेयजल परियोजनाओं को भी निर्धारित अवधि में पूरा कराने पर जोर दिया गया।
बाढ़ और कटान से बचाव की तैयारियों पर चर्चा:
बाढ़ खंड के कार्यों की समीक्षा करते हुए जलस्तर और वर्षा से संबंधित आंकड़ों को नियमित रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने बाढ़ और कटान से बचाव के कार्यों की प्रभावी निगरानी करने तथा आवश्यक तैयारियां समय से पूरी रखने को कहा। उन्होंने संबंधित कार्यों में सतर्कता और समयबद्धता बनाए रखने पर जोर दिया।
नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने के निर्देश:
सिंचाई विभाग की योजनाओं की जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी ने नहरों में पानी की उपलब्धता और टेल तक उसकी पहुंच सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने नहरों की ब्लॉकवार स्थिति का विवरण तैयार रखने के निर्देश दिए। आवश्यकता के अनुसार नहरों की सिल्ट सफाई कराने पर भी जिलाधिकारी ने जोर दिया, ताकि सिंचाई से जुड़ी व्यवस्था बेहतर तरीके से संचालित हो सके।

राजकीय नलकूपों को क्रियाशील रखने पर जोर:
नलकूप विभाग की समीक्षा के दौरान सभी राजकीय नलकूपों को क्रियाशील रखने और किसानों को निर्बाध सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। यांत्रिक और विद्युत खराबी के कारण बंद नलकूपों को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराने को कहा गया। इसके साथ ही नए नलकूपों की स्थापना और पुराने नलकूपों की मरम्मत का कार्य भी समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के निर्देश दिए गए।
भूजल नियमों और प्रक्रिया की दी जानकारी:
बैठक में भूजल से जुड़े प्रकरणों की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि उत्तर प्रदेश भूजल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम, 2019 के तहत निर्धारित नियम और शर्तें लागू हैं। भूजल पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए संबंधित वेब पोर्टल विकसित किया गया है।
बताया गया कि किसी व्यवसायिक, औद्योगिक, इंफ्रास्ट्रक्चर और बल्क यूजर अथवा ड्रिलिंग एजेंसी द्वारा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किए जाने पर धारा-39 के तहत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। प्रथम अपराध पर दो लाख से पांच लाख रुपये तक का अर्थदंड अथवा छह माह से एक वर्ष तक का कारावास अथवा दोनों दंड दिए जा सकते हैं। अपराध की पुनरावृत्ति होने पर प्राधिकार पत्र निरस्त करते हुए निर्धारित दंड को दोगुना किए जाने का प्रावधान बताया गया।
लघु सिंचाई योजना के आवेदनों की जानकारी:
मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया गया कि ऑनलाइन पोर्टल पर जनपद में उथले नलकूप के 2,438, मध्यम गहरे नलकूप के 37 तथा पंपसेट एवं हौज के 137 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश:
जिलाधिकारी ने कहा कि जल संसाधन से जुड़ी योजनाएं किसानों और आमजन के हितों से सीधे जुड़ी हैं। इसलिए इनके क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजनाओं की गुणवत्ता, प्रगति और समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता बाढ़, अधिशासी अभियंता सिंचाई, अधिशासी अभियंता नलकूप, जल निगम के अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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रिपोर्टर: गुड़िया मद्धेशिया
