कभी पेपर लीक, कभी नकल और अब तकनीकी खराबियां
SSC परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां हो रही हैं। 12 सितंबर से शुरू हुए CGL (कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल) एग्जाम में पहले ही दिन से छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। तीन दिन में दिल्ली, गुरुग्राम, जम्मू, झारखंड और मुंबई सहित 9 सेंटर्स पर एग्जाम कैंसिल कर दिए गए। परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के बाद छात्रों को अचानक बताया गया कि एग्जाम नहीं होगा। इससे छात्र गुस्से में हैं और समय व पैसे की बर्बादी का आरोप लगा रहे हैं।
छात्रों का गुस्सा और विरोध
परीक्षा रद्द होने से निराश छात्र लगातार विरोध जता रहे हैं। वे कहते हैं कि ऑनलाइन एग्जाम में सुधार की मांग लंबे समय से उठ रही है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। “इतने बड़े एग्जाम में सर्वर डाउन होना या तकनीकी खराबियां होना बिल्कुल सही नहीं है,” छात्रों का कहना है।
SSC का जवाब: सेंटर बदलेंगे, कार्रवाई होगी
एग्जाम में आई गड़बड़ियों को लेकर SSC चेयरपर्सन एस. गोपाल कृष्णन ने सफाई दी। उन्होंने बताया कि मिस मैनेजमेंट और तकनीकी समस्याओं वाले सेंटर्स बंद किए जा रहे हैं। ऐसे छात्रों को उसी शहर के दूसरे सेंटर्स में शिफ्ट किया जाएगा और 10 दिनों के भीतर परीक्षा पूरी करवाई जाएगी। उन्होंने दावा किया कि 227 सेंटर्स में से 215 पर परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित हुई है।
गोपाल कृष्णन ने कहा, “अगर भविष्य में भी गड़बड़ियां होंगी तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कुछ पुराने सिस्टम और मशीनों की वजह से दिक्कत आई है, जिसे तुरंत दूसरे सेंटर में शिफ्ट कर ठीक किया जा रहा है।”
एजेंसी एडुक्विटी पर उठ रहे सवाल
गड़बड़ियों के चलते परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी एडुक्विटी करियर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड पर भी सवाल उठने लगे हैं। जुलाई में हुए सिलेक्शन पोस्ट फेज-13 एग्जाम में भी इसी तरह की तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं। माउस न चलना, सर्वर डाउन होना और दूरदराज सेंटर अलॉट होना छात्रों के लिए बड़ी परेशानी बनी थी।
छात्रों का कहना है कि जब कंपनी का रिकॉर्ड ही खराब है, तो उसे टेंडर क्यों दिया गया? पहले SSC की परीक्षाएं टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कराती थी, जिसका सिस्टम ज्यादा मजबूत माना जाता है।
टेंडर प्रक्रिया और विवाद
सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि 2 मार्च 2024 को SSC की कमेटी ने माना था कि TCS की तकनीक सबसे बेहतर है। हालांकि, एडुक्विटी ने सबसे कम कीमत की बोली लगाई। जहां TCS ने 311 रुपये प्रति उम्मीदवार की दर दी, वहीं एडुक्विटी ने मात्र 171 रुपये में परीक्षा कराने का दावा किया। नतीजतन, 273 करोड़ रुपये की बोली लगाकर एडुक्विटी को एग्जाम का ठेका मिल गया।
SSC के नियमों के अनुसार, एजेंसी का चयन क्वालिटी और कॉस्ट बेस्ड सिलेक्शन (QCBS) के तहत होता है। इसमें तकनीकी मूल्यांकन को 70% और लागत को 30% वेटेज दिया जाता है। इसी फॉर्मूले से एडुक्विटी को चुना गया।
सुधार की गुंजाइश या लापरवाही?
SSC के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि एडुक्विटी को लिखित में कई बार सिस्टम सुधारने को कहा गया है। कंपनी ने बदलाव भी किए, लेकिन सब-कॉन्ट्रैक्ट देकर काम करवाने की वजह से गड़बड़ियां पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। अधिकारियों का मानना है कि एजेंसी को तुरंत हटाना संभव नहीं है, क्योंकि इससे सारी परीक्षाएं लेट हो जाएंगी और नए टेंडर की प्रक्रिया में सालभर लग सकता है।
जानकारों का मानना है कि लगातार तकनीकी गड़बड़ियों और परीक्षा रद्द होने से छात्रों का भरोसा डगमगा रहा है। SSC का दावा है कि समस्याएं अस्थायी हैं और जल्द ही हल कर ली जाएंगी। लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी परीक्षाओं में बार-बार हो रही लापरवाही का खामियाजा आखिर कब तक छात्रों को भुगतना पड़ेगा?