प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आज दिल्ली (Delhi) से देहरादून (Dehradun) तक बनने वाले बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करेंगे। 212 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे की खास बात यह है कि इसके शुरुआती 18 किलोमीटर तक यात्रियों को टोल नहीं देना होगा। यह परियोजना न केवल उत्तराखंड (Uttarakhand) बल्कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा यूपी से होकर गुजरता है।
यूपी से होकर गुजरता है अधिकांश हिस्सा:
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का लगभग 135 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से होकर गुजरता है, जो कुल लंबाई का करीब 64 प्रतिशत है। इस वजह से यह परियोजना यूपी के कई जिलों के विकास और कनेक्टिविटी को नई गति देने वाली मानी जा रही है। गाजियाबाद (Ghaziabad), बागपत (Baghpat), शामली (Shamli) और सहारनपुर (Saharanpur) जैसे जिलों को इससे सीधा लाभ मिलेगा।
कम समय में पूरा होगा सफर:
अब तक दिल्ली (Delhi) से देहरादून (Dehradun) तक का सफर नेशनल हाईवे-58 (NH-58) के जरिए किया जाता था, जिसमें 6 से 7 घंटे तक का समय लगता था और कई जगहों पर जाम की समस्या रहती थी। नए एक्सप्रेस-वे के बनने से यह सफर काफी आसान और तेज हो जाएगा, जिससे यात्रियों को समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
टोल फ्री और आधुनिक डिजाइन:
इस 6 लेन एक्सप्रेस-वे की शुरुआत दिल्ली (Delhi) के अक्षरधाम (Akshardham) से होती है। यहां शुरुआती 18 किलोमीटर तक टोल फ्री रखा गया है। इस हिस्से में 12 लेन का रास्ता विकसित किया गया है, जिसमें एक्सप्रेस-वे के साथ सर्विस रोड भी शामिल हैं। इससे स्थानीय ट्रैफिक और लंबी दूरी के वाहनों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की खासियत:
इस एक्सप्रेस-वे की एक बड़ी विशेषता इसका वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जिसे देश का पहला और एशिया (Asia) का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर माना जा रहा है। जहां-जहां जंगल क्षेत्र आता है, वहां सड़क को एलिवेटेड बनाया गया है ताकि नीचे से जंगली जानवर सुरक्षित रूप से गुजर सकें और ऊपर से वाहन तेजी से चल सकें।
इंटरचेंज और सुविधाएं:
पूरे एक्सप्रेस-वे पर कई महत्वपूर्ण इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिससे आसपास के शहरों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। मंडोला (Mandola) में इसे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे (Eastern Peripheral Expressway) से जोड़ा गया है। इसके अलावा खेकड़ा (Khekra), बागपत (Baghpat), बड़ौत (Baraut), कैराना (Kairana) और देवबंद (Deoband) जैसे स्थानों पर भी इंटरचेंज बनाए गए हैं।
यात्रियों की सुरक्षा के विशेष इंतजाम:
एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। यहां 113 अंडरपास, 5 रेलवे ओवरब्रिज और 62 बस शेल्टर बनाए गए हैं। इसके साथ ही 16 एंट्री-एग्जिट पॉइंट भी हैं। पूरे मार्ग पर निगरानी के लिए कैमरे लगाए गए हैं, जिससे किसी भी दुर्घटना की स्थिति में 10 मिनट के भीतर सहायता पहुंचाई जा सकेगी।
महाकुंभ को ध्यान में रखकर योजना:
सहारनपुर (Saharanpur) से आगे यह एक्सप्रेस-वे उत्तराखंड (Uttarakhand) में प्रवेश करता है और हरिद्वार (Haridwar) व रुड़की (Roorkee) तक जाता है। हरिद्वार महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए सहारनपुर के पास से हरिद्वार-रुड़की के लिए अलग 6 लेन का मार्ग भी विकसित किया गया है, जिससे भीड़भाड़ की स्थिति में ट्रैफिक को सुचारू रखा जा सके।
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