रिपोर्ट : अमित कुमार
बलिया (Ballia) में ऐतिहासिक ददरी मेला (Dadri Mela) की तैयारियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नगर पालिका (Nagar Palika) के चेयरमैन संत कुमार गुप्ता और कार्यपालक अधिकारी (EO) के बीच जंग छिड़ गई है। चेयरमैन के भाई विनोद गुप्ता ने EO पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बलिया में ट्रिपल इंजन सरकार पूरी तरह फेल हो गई है। उन्होंने कहा कि 28 साल बाद नगर पालिका में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से चेयरमैन बनने के बावजूद उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है, जिसके कारण कोई विकास कार्य नहीं हो पा रहा है।
चेयरमैन के अधिकारों के हनन का आरोप:
विनोद गुप्ता ने कहा कि EO संविधान को दरकिनार कर अपनी मनमानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि नगर पालिका चेयरमैन को जो अधिकार मिलने चाहिए, उन्हें छीन लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि EO ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए ददरी मेला की जिम्मेदारी खुद संभाल ली है, जबकि यह अधिकार परंपरागत रूप से चेयरमैन का रहा है।
ददरी मेला को लेकर विवाद गहराया:
विनोद गुप्ता ने कहा कि ऐतिहासिक ददरी मेला हमेशा चेयरमैन के नेतृत्व में आयोजित किया जाता रहा है, लेकिन इस बार EO ने चेयरमैन की भूमिका को नजरअंदाज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह मेला न केवल बलिया की परंपरा का प्रतीक है बल्कि नगर की पहचान भी है। यदि इसके आयोजन में किसी तरह की लापरवाही या राजनीति की गई तो इसका गंभीर परिणाम होगा।
भविष्य की राजनीति पर भी जताई चिंता:
विनोद गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में जिस तरह चेयरमैन के अधिकारों को सीमित किया जा रहा है, उससे भविष्य की राजनीति प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि “जब वर्तमान ही नहीं चलने दिया जा रहा तो भविष्य में कैसे चुनाव लड़ेंगे?” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ददरी मेला के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ किया गया तो जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी और इसका असर आगामी चुनावों में साफ दिखाई देगा।
नगर पालिका में बढ़ी तनातनी:
चेयरमैन और EO के बीच चल रहे विवाद के कारण नगर पालिका प्रशासन में तनातनी का माहौल है। ददरी मेला जैसे बड़े आयोजन पर इस तरह का विवाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मेला सदियों से धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का प्रतीक रहा है, ऐसे में इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
ददरी मेला का ऐतिहासिक महत्व:
बलिया का ददरी मेला उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सबसे प्राचीन मेलों में से एक है। हर साल हजारों की संख्या में लोग इस मेले में शामिल होते हैं। यह मेला न केवल व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि जिले की सांस्कृतिक पहचान भी है। ऐसे में इसके आयोजन को लेकर प्रशासनिक टकराव चिंताजनक है।
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