अलीगढ़ (Aligarh) में पुलिस अधीक्षक अपराध (Superintendent of Police, Crime) ममता कुरील (Mamta Kuril) द्वारा साइबर अपराधों को रोकने और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण गोष्ठी आयोजित की गई। यह बैठक पुलिस लाइन (Police Line) स्थित नवीन सभागार में आयोजित हुई, जिसमें थानों पर नियुक्त साइबर टीम के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। गोष्ठी के दौरान बढ़ते साइबर अपराधों, खासकर वित्तीय ठगी (Financial Fraud) के मामलों को रोकने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और तकनीकी जानकारी दी गई।
साइबर ठगी पर नियंत्रण के उपाय बताए गए:
गोष्ठी में पुलिस अधीक्षक अपराध ममता कुरील ने बताया कि वर्तमान समय में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए हर स्तर पर त्वरित कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने थानों पर नियुक्त साइबर टीमों को निर्देशित किया कि किसी भी पीड़ित को “नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल” (National Cyber Crime Reporting Portal – NCRP), समन्वय पोर्टल (Coordination Portal) और प्रतिबिम्ब पोर्टल (Pratibimb Portal) के माध्यम से तत्काल राहत दिलाई जाए। इन पोर्टलों पर रिपोर्ट दर्ज होते ही संबंधित बैंक और सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय स्थापित कर ठगी की गई राशि को रोका जा सकता है।
ऑनलाइन सुरक्षा और डाटा संरक्षण पर चर्चा:
गोष्ठी में ऑनलाइन ठगी के तरीकों, ई-मेल (E-mail) के माध्यम से की जा रही धोखाधड़ी और संवेदनशील जानकारी साझा करने में सावधानी पर विस्तृत चर्चा हुई। ममता कुरील ने कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांतों के बारे में बताया, जिसमें ई-मेल आईडी की सुरक्षा, पासवर्ड मैनेजमेंट, और “एन.आई.सी.” (NIC) मेल लॉगिन की सुरक्षा प्रणाली पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई। उन्होंने यह भी बताया कि व्यक्तिगत जानकारी या बैंक डिटेल साझा करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि साइबर अपराधी छोटी-छोटी चूकों का फायदा उठाकर ठगी को अंजाम दे देते हैं।
बच्चों से जुड़ी साइबर सुरक्षा पर भी जोर:
गोष्ठी के दौरान चाइल्ड पोर्नोग्राफी (Child Pornography) जैसे गंभीर मामलों पर भी चर्चा की गई। पुलिस अधीक्षक अपराध ने टीम को ऐसे अपराधों के प्रति संवेदनशील रहने और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अपराधों में न केवल तकनीकी जांच जरूरी होती है, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
तकनीकी प्रशिक्षण और जांच प्रक्रिया पर मार्गदर्शन:
ममता कुरील ने उपस्थित पुलिसकर्मियों को सी.डी.आर. (Call Detail Record) और मोबाइल टॉवर लोकेशन (Mobile Tower Location) के विश्लेषण की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि इन तकनीकी उपकरणों के सही उपयोग से अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में आसानी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि हर साइबर टीम सदस्य को आधुनिक तकनीक और डिजिटल साक्ष्यों के उपयोग में दक्ष होना चाहिए ताकि किसी भी घटना की जांच तेजी से पूरी की जा सके।
साइबर अपराधों पर सख्त निगरानी का आह्वान:
गोष्ठी के अंत में पुलिस अधीक्षक अपराध ने सभी कर्मचारियों से साइबर अपराधों के मामलों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तभी प्रभावी होगी जब तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर सतर्कता बरती जाए। साथ ही उन्होंने आम जनता को भी जागरूक करने की जरूरत पर बल दिया ताकि लोग किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
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साइबर अपराध पर मंथन, ठगी रोकने की तैयारी