गाजीपुर: चीन का बढ़ता सैन्य विस्तार भारत के लिए दीर्घकालिक सामरिक चुनौती : कर्नल संजीव कुमार शाही

PG College Ghazipur (पीजी कॉलेज गाजीपुर) में पूर्व शोध प्रबंध प्रस्तुति संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में सेमिनार हॉल में संपन्न हुआ। संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान रक्षा एवं स्ट्रैटिजिक अध्ययन (सैन्य विज्ञान) विषय के शोधार्थी Colonel Sanjeev Kumar Shahi (कर्नल संजीव कुमार शाही) ने अपने शोध प्रबंध “China Expanding Military and the Developing Threat to Arunachal Pradesh and Andaman and Nicobar Islands” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि चीन का बढ़ता सैन्य विस्तार भारत के लिए दीर्घकालिक सामरिक चुनौती बनकर उभर रहा है।

शोध में चीन की सैन्य रणनीति पर प्रकाश:
अपने शोध प्रबंध में Colonel Sanjeev Kumar Shahi (कर्नल संजीव कुमार शाही) ने बताया कि India (भारत) और China (चीन) एशिया की दो प्रमुख शक्तियां हैं। दोनों देशों के बीच लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) स्थित है, जहां समय-समय पर तनाव की स्थिति बनी रहती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1962 के युद्ध के बाद भी सीमा विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हाल के वर्षों में चीन ने अपने सैन्य आधुनिकीकरण और सामरिक विस्तार को तेज किया है, जिससे भारत के पूर्वोत्तर सीमावर्ती क्षेत्रों और हिंद महासागर क्षेत्र में नई सुरक्षा चुनौतियां सामने आई हैं।

सीमा क्षेत्रों और हिंद महासागर पर बढ़ी चुनौतियां:
प्रस्तुति के दौरान उन्होंने बताया कि चीन ने अपनी सेना People’s Liberation Army (PLA) (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) को आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित किया है। तिब्बत में सड़क, रेलवे, हवाई अड्डों और मिसाइल ठिकानों का विकास उसकी सैन्य तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि चीन Arunachal Pradesh (अरुणाचल प्रदेश) को तथाकथित “दक्षिण तिब्बत” बताकर उस पर दावा करता है। सीमा क्षेत्रों में सैन्य बलों की तैनाती, आधुनिक हथियारों की उपलब्धता, अवसंरचना का विस्तार और समय-समय पर घुसपैठ जैसी घटनाएं इस क्षेत्र को संवेदनशील बनाती हैं।

भारत की सामरिक तैयारियों का उल्लेख:
शोध प्रस्तुति में बताया गया कि भारत ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, सुरंगों और पुलों का निर्माण तेज किया है। इसके साथ ही उन्नत निगरानी प्रणाली, वायुसेना ठिकानों और अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के माध्यम से अपनी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत किया है। Andaman and Nicobar Islands (अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह) की सामरिक महत्ता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो विश्व के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। भारत की त्रि-सेवा Andaman and Nicobar Command (अंडमान एवं निकोबार कमान) इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण सामरिक भूमिका निभाती है।

शोध में दिए गए प्रमुख सुझाव:
Colonel Sanjeev Kumar Shahi (कर्नल संजीव कुमार शाही) ने अपने शोध में सुझाव दिया कि सीमा क्षेत्रों में अवसंरचना विकास की गति और तेज की जाए। आधुनिक रक्षा तकनीकों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली का विस्तार किया जाए। नौसैनिक शक्ति और Andaman and Nicobar Command (अंडमान एवं निकोबार कमान) को और अधिक सशक्त बनाया जाए। साथ ही पड़ोसी देशों के साथ सामरिक सहयोग बढ़ाने, राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहन देने तथा आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

शोधार्थी ने प्रश्नों के दिए उत्तर:
प्रस्तुति के बाद विभागीय शोध समिति, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ, प्राध्यापकों तथा शोधार्थियों ने शोध विषय से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका Colonel Sanjeev Kumar Shahi (कर्नल संजीव कुमार शाही) ने संतोषजनक उत्तर दिया। इसके बाद समिति और महाविद्यालय के प्राचार्य Professor (Dr.) Raghvendra Kumar Pandey (प्रोफेसर डॉ. राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय) ने शोध प्रबंध को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान की।

कई शिक्षकों और शोधार्थियों की रही मौजूदगी:
संगोष्ठी में प्राचार्य एवं शोध निर्देशक Professor (Dr.) Raghvendra Kumar Pandey (प्रोफेसर डॉ. राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय), अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक Professor (Dr.) G. Singh (प्रोफेसर डॉ. जी. सिंह), सैन्य विज्ञान विभागाध्यक्ष Dr. Akhilesh Kumar Singh (डॉ. अखिलेश कुमार सिंह) सहित महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक और शोध छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में Dr. Akhilesh Kumar Singh (डॉ. अखिलेश कुमार सिंह) ने सभी का आभार व्यक्त किया, जबकि संचालन Professor (Dr.) G. Singh (प्रोफेसर डॉ. जी. सिंह) ने किया।

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