रिपोट-हसीन अंसारी
आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा (Chhath Puja) पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह चार दिनों तक चलने वाला पर्व महिलाओं की आस्था, संयम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। आज सुबह से ही महिलाओं ने अपने घरों में छठ प्रसाद बनाने की तैयारी शुरू कर दी। दिनभर की व्यस्तता के बाद शाम होते ही महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजे सूप और प्रसाद लेकर गंगा घाटों की ओर रवाना हुईं, जहां उन्होंने डूबते सूर्य को अर्ध्य देकर पर्व के तीसरे दिन का समापन किया।
गाजीपुर नवापुर गंगा घाट पर उमड़ी श्रद्धा:
गाजीपुर (Ghazipur) के नवापुर गंगा घाट पर छठ पूजा के अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। घाट पर गूंजते छठ गीतों और गूंजती मंत्रध्वनियों ने वातावरण को पूरी तरह भक्ति में रंग दिया। व्रती महिलाओं ने डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य अर्पित कर अपने परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना की।
किन्नर समाज ने निभाई परंपरा:
इस बार छठ पर्व की विशेषता यह रही कि गाजीपुर के नवापुर गंगा घाट पर किन्नर समाज के लोगों ने भी पूरे विधि-विधान से छठ पूजा का आयोजन किया। पारंपरिक परिधान में सजे किन्नर समाज के सदस्य गंगा घाट पहुंचे और पूजा बेदी पर विधिवत अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने हाथों में सूप लेकर गंगा में प्रवेश किया और डूबते सूर्य को अर्ध्य अर्पित किया।
गुरु परंपरा से जुड़ा छठ व्रत:
किन्नर समाज के लोगों ने बताया कि उनका अपना कोई पारिवारिक जीवन नहीं होता, लेकिन उनके यजमान ही उनका परिवार हैं। वे अपने यजमानों की खुशी, सुख और समृद्धि के लिए हर साल यह व्रत करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले उनके गुरु छठ पूजा करते थे, उसी परंपरा को अब वे लोग भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनके अनुसार यह व्रत सिर्फ एक धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि आस्था से जुड़ा भावनात्मक संबंध है।
महिलाओं ने बताया छठ का महत्व:
व्रती महिलाओं ने भी छठ पर्व के महत्व को बताते हुए कहा कि यह व्रत न केवल सूर्य और छठी मइया के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम है बल्कि यह परिवार के स्वास्थ्य, संतति और समृद्धि की मंगल कामना से जुड़ा है। महिलाओं ने बताया कि इस पर्व में आत्मिक शुद्धि और अनुशासन की भावना का विशेष महत्व होता है।
भक्ति और उत्साह से संपन्न हुआ पर्व:
गाजीपुर के घाटों पर शाम के समय का दृश्य अत्यंत मनमोहक रहा। गंगा में उतरते सूर्य की लालिमा और जल में प्रतिबिंबित दीपों की रौशनी ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया। व्रती महिलाओं और किन्नर समाज दोनों ने श्रद्धा के साथ छठ मइया की आराधना की और सूर्य को अर्ध्य देने के बाद गंगा स्नान कर अपने घरों को लौट गईं।
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