जातीय रैलियों पर रोक से जुड़े मामले में हाईकोर्ट (High Court) में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार (Central Government) और उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) ने लखनऊ पीठ (Lucknow Bench) में अपना जवाब दाखिल किया। दोनों पक्षों ने कोर्ट को बताया कि जातीय रैलियों पर रोक संबंधी दिशा-निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं और सरकार इस मामले में सख्त रुख अपनाए हुए है।
सरकार ने दिया स्पष्ट जवाब:
राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया कि प्रदेश में जातीय आधार पर किसी भी प्रकार की रैली या आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए पहले ही संबंधित विभागों को आदेश जारी किए जा चुके हैं। सरकार ने यह भी बताया कि पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर इस निर्देश की सख्ती से निगरानी की जा रही है ताकि कोई उल्लंघन न हो।
आपराधिक मामलों में नहीं लिखी जाएगी जाति:
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि अब किसी भी आपराधिक मामले की रिपोर्ट या चार्जशीट में आरोपी की जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा। इस संबंध में डीजीपी (DGP) कार्यालय की ओर से सभी जिलों को सर्कुलर जारी किया गया है। यह कदम समाज में समानता और गैर-भेदभाव के सिद्धांत को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
याची ने मांगा प्रतिउत्तर का समय:
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकार के जवाब पर प्रतिउत्तर दाखिल करने के लिए उन्हें समय चाहिए। कोर्ट ने याची की इस मांग को स्वीकार करते हुए प्रतिउत्तर दाखिल करने की अनुमति दे दी।
अगली सुनवाई की तारीख तय:
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 17 नवंबर तय की है। इस दिन याची द्वारा दायर प्रतिउत्तर पर सुनवाई की जाएगी। उम्मीद है कि इस सुनवाई में कोर्ट जातीय रैलियों पर रोक से जुड़े दिशा-निर्देशों पर और स्पष्ट आदेश दे सकता है।
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