ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सामुदायिक शौचालयों की सफाई और रखरखाव से जुड़े केयर-टेकरों की समस्याओं को लेकर Jan Kalyan Care Taker Association (जन कल्याण केयर टेकर एसोसिएशन) ने शासन का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन का कहना है कि सामुदायिक शौचालयों के संचालन और प्रबंधन से जुड़ी कुछ समस्याओं का समाधान पहले हुए प्रयासों से अवश्य हुआ है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में अभी भी कई व्यावहारिक कठिनाइयां बनी हुई हैं। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए संगठन ने संबंधित अधिकारियों से आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।
शासनादेश के अनुपालन पर जताई चिंता:
संगठन की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि 10 सितंबर 2025 को Panchayat Raj Anubhag-3 (पंचायत राज अनुभाग-3) से प्रमुख सचिव Anil Kumar (अनिल कुमार) द्वारा Swachh Bharat Mission Gramin (स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण) के मिशन निदेशक, सभी जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को एक शासनादेश जारी किया गया था। संगठन का कहना है कि इस शासनादेश में दिए गए निर्देशों का समयबद्ध और प्रभावी अनुपालन अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाया है, जिसके कारण जमीनी स्तर पर कई समस्याएं बनी हुई हैं।
वर्तमान व्यवस्था को बताया जटिल:
ज्ञापन में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक शौचालयों के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था शासनादेश संख्या 1759/33-3-2020-31/2019 दिनांक 15 जुलाई 2020 के तहत लागू की गई थी। संगठन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था काफी जटिल है, जिससे संचालन कार्य प्रभावित होता है। इसी कारण इस व्यवस्था में आवश्यक संशोधन किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि कार्य प्रणाली अधिक सरल और प्रभावी बन सके।
मानदेय भुगतान में बताई जा रही परेशानी:
संगठन के अनुसार वर्तमान व्यवस्था के चलते सामुदायिक शौचालयों के प्रबंधक, सफाई एवं रखरखाव के लिए जिम्मेदार केयर-टेकरों के मानदेय का नियमित और समयबद्ध भुगतान प्रभावित हो रहा है। संगठन का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया में आ रही बाधाओं के कारण केयर-टेकरों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में भुगतान व्यवस्था को सरल और सुचारु बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।
शासन से हस्तक्षेप की मांग:
Jan Kalyan Care Taker Association (जन कल्याण केयर टेकर एसोसिएशन) ने अपने ज्ञापन के माध्यम से अनुरोध किया है कि पत्र में उठाए गए बिंदुओं का संज्ञान लेकर आवश्यक प्रशासनिक निर्देश जारी किए जाएं। संगठन का कहना है कि यदि व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाते हैं तो सामुदायिक शौचालयों का संचालन अधिक प्रभावी होगा और केयर-टेकरों को भी समय पर मानदेय प्राप्त हो सकेगा।
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