मेरठ (Meerut) दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मंच पर उस समय भावुक हो गए, जब उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों और गरीबी के दिनों को याद किया। मौका था नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhas Chandra Bose) की 129वीं जयंती पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का। कार्यक्रम के दौरान भाषण देते हुए डिप्टी सीएम कई बार भावनाओं में बहते नजर आए और उनकी आवाज भर्रा गई।
नेताजी की जयंती पर आयोजित कवि सम्मेलन:
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और स्थानीय लोग मौजूद रहे। इसी मंच से डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अपने मन की बात साझा की। उन्होंने कहा कि नेताजी का जीवन संघर्ष, त्याग और देशसेवा का प्रतीक है और ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है।
गरीब को देखकर होता है गहरा दर्द:
मंच से बोलते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि जब भी वह किसी गरीब व्यक्ति को देखते हैं, तो उनका मन बहुत दुखी हो जाता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद गरीबी को बहुत करीब से देखा है और इसलिए गरीब की पीड़ा को समझते हैं। उनके अनुसार, गरीबी सिर्फ अभाव नहीं होती, बल्कि आत्मसम्मान और संघर्ष की परीक्षा भी होती है।
खुद को पद से नहीं, सेवा से जोड़ता हूं:
डिप्टी सीएम ने साफ शब्दों में कहा कि वह खुद को डिप्टी सीएम नहीं, बल्कि गरीब का सेवक मानते हैं। उन्होंने कहा कि पद और जिम्मेदारी का असली मतलब तब है, जब उससे समाज के कमजोर वर्ग को राहत और सम्मान मिल सके। इसी भावना के साथ वह अपने सार्वजनिक जीवन को आगे बढ़ा रहे हैं।
संघर्ष भरे पुराने दिनों की याद:
अपने पुराने दिनों को याद करते हुए ब्रजेश पाठक भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि जब वह लखनऊ (Lucknow) आए थे, तब उनके पास सर्दी में पहनने के लिए जूते तक नहीं थे। उन्होंने कहा कि उन दिनों की कठिनाइयों ने उन्हें मजबूत बनाया और आज भी वह अनुभव उन्हें जमीन से जोड़े हुए है।
गरीबी के अनुभव ने सिखाया संवेदना का पाठ:
डिप्टी सीएम ने कहा कि गरीबी में जीवन बिताने का अनुभव इंसान को संवेदनशील बनाता है। उन्होंने बताया कि वह गरीब आदमी की पीड़ा को अच्छी तरह समझते हैं, क्योंकि वह खुद उस दौर से गुजर चुके हैं। यही कारण है कि जनसेवा को वह अपने जीवन का मूल उद्देश्य मानते हैं।
कार्यक्रम में भावनात्मक माहौल:
डिप्टी सीएम के भाषण के दौरान पूरे पंडाल में भावनात्मक माहौल देखने को मिला। कई लोगों की आंखें नम हो गईं। कवि सम्मेलन के मंच से कही गई उनकी बातें सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचती नजर आईं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों के जरिए उनके विचारों का समर्थन किया।
सेवा और संवेदना का संदेश:
अपने संबोधन के अंत में ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाज का असली विकास तभी संभव है, जब आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति का जीवन बेहतर हो। उन्होंने कहा कि सत्ता और पद स्थायी नहीं होते, लेकिन सेवा और संवेदना से कमाया गया सम्मान हमेशा साथ रहता है।
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