अभिनेंद्र की कलम से…….
राजनीति एक ऐसी किताब है जिसकी गहराई का कोई अंत नहीं. इस विद्या में जीत पाने के सकारात्मक बिंदु तो है ही, साथ ही धन, बल, लोभ, डर पैदा करने की महत्वपूर्ण विद्या भी है। लेकिन अब राजनीति के किताब का नया वर्जन भी आ गया है जिसमे इन सबके साथ विजेता के मुख से जीत का निवाला कैसे छिनते हैं इसकी हर संभव तकनीक की जानकारी है. ये संभावनाओं का समाज है और मैं भी सम्भावना कर रहा हूँ कि शायद ऐसी राजनीति की किताब आ चुकी है और इस किताब को पढ़ कर चुनावी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाला आज का असली चाणक्य है.
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इस वक़्त भाजपा उत्तर प्रदेश में बुलंदियों पर है. प्रदेश ने जहाँ लगातार दूसरी बार केंद्र में सरकार बनाने में मदद किया तो वही राज्य में भी भाजपा का परचम लहरा रहा है. इस बार भाजपा ने पंचायत चुनावों में अपना झंडा तो गाड़ ही दिया साथ समाजवादी पार्टी के किले को नस्ते नाबुत कर दिया. पूर्वांचल के आजमगढ़ और बलिया में भले समाजवादी पार्टी ने अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया हो लेकिन ज्यतादर जिलों में भाजपा का ही परचम लहराया. जिला पंचायत के बाद ब्लाक प्रमुख के चुनाव में भी भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया. जानकारों का मानना है कि इन सबके पीछे एक अच्छी रणनीति थी. जिसका श्रेय भाजपा के उन नेताओं को जाता जिनको सूबे के शीर्ष नेतृत्व ने जिम्मेदारी दी थी. यदि इसका बेहतर उदाहरण जनपद गाजीपुर में दें तो यह गलत नहीं होगा।
बात करें गाजीपुर की तो इस जनपद को समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है वर्तमान में भी यहां के सांसद सपा और बसपा के गठबंधन से जीते हैं। 7 विधानसभा वाले गाजीपुर में केवल 3 विधानसभा सीट पर भाजपा के विधायक है। यहां के एमएलसी पहले तो निर्दल थे लेकिन जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी को ज्वाइन कर लिया और गाजीपुर को भगवामय बनाने की असली रणनीति यहीं से शुरू होती है।
वैसे तो भाजपा में चाणक्य की संज्ञा गृह मंत्री अमित शाह को दी गई है, लेकिन यहां पर भाजपा के चाणक्य बनकर उभरे हैं यहां के एमएलसी विशाल सिंह “चंचल”.
शायद यही कारण है कि जिला पंचायत के चुनाव में सबसे अधिक समर्थकों का दावा करने वाली समाजवादी पार्टी परास्त हो गई समाजवादी पार्टी के पास 10 अपने जिला पंचायत सदस्य थे और बसपा के 10 सदस्य थे। चुनाव से पहले सपा के समर्थन में करीब 42 सदस्य आ गए तो वहीं भारतीय जनता पार्टी के पास केवल 6 जिला पंचायत सदस्य थे लेकिन जब चुनाव हुए तो भारतीय जनता पार्टी के पास 47 जिला पंचायत सदस्य आ गए और भारतीय जनता पार्टी ने यह चुनाव जीत लिया। जानकारों का मानना है कि इस जीत सपा और बसपा के समर्थन वाले सदस्यों का भी योगदान था। वैसे AIMIM ने तो साफ किया था उनके दो सदस्यों ने भाजपा को वोट नहीं दिया। खैर यह जीत केवल महज आम जीत नहीं थी। इस जीत ने समाजवादी पार्टी के 25 साल के इतिहास को भेद दिया था। समाजवादी पार्टी का किला ध्वस्त हो चुका था और जिला पंचायत अध्यक्ष बन चुकी थी भाजपा की तरफ से सपना सिंह। और राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह सब संभव हुआ केवल एमएलसी विशाल सिंह चंचल की वजह से।
चंचल किस सटीक रणनीति से जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में इतिहास रचने के बाद भाजपा ने ब्लाक प्रमुखी के चुनाव में भी अपना परचम लहराया। एमएलसी विशाल सिंह चंचल के नेतृत्व में भाजपा ने इतिहास में सबसे ज्यादा सीट 16 में से 11 सीट जीती है।
विशाल सिंह चंचल ने ब्लाक प्रमुखी चुनाव में शतरंज के विसाद पर गोटियां बिछाई और समाजवादी पार्टी को करारी सिकस्त दिया। ब्लाक प्रमुख चुनाव में भाजपा के ऐतिहासिक जीत पर राजनीत के रणनीतिकारो का मानना है कि पंचायती चुनाव में जिले के सारे दिग्गजो को परास्त करते हुए एमएलसी चंचल सिंह ने जो मुकाम बनाया है उससे यह प्रतीत होता है कि आने वाले निकास एमएलसी के चुनाव में भाजपा को यह सीट जीतने में कोई भी मुश्किल नही होगी, बड़ी आसानी से एमएलसी चंचल सिंह अपने सीट का रेनुवल करा लेगें। एमएलसी चंचल सिंह के रणनीति के पीछे विशेषज्ञो का मानना है कि चंचल सिंह की कार्यशैली सभी राजनीतिको से अलग है।
एमएलसी चंचल सिंह अपने उत्कृष्ट कार्यशैली के वजह से आज जिले के युवाओ में अपनी विशेष पहचान बनाये हुए है। अब देखना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लाक प्रमुख चुनाव के बाद निकाय एमएलसी चुनाव में भाजपा की लहर का अन्य पार्टीयां कितना सामना कर पाती है।

