बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), कांग्रेस (Congress) के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi), मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और राजद (RJD) के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में रैलियां कर रहे हैं। राज्य में दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को मतदान होना है, जबकि नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। बिहार नौ प्रमंडलों में बंटा हुआ है और इन सभी क्षेत्रों का चुनावी समीकरण राज्य की राजनीति तय करता है। आज बात करते हैं पटना प्रमंडल (Patna Division) की, जो न केवल राजधानी पटना का केंद्र है, बल्कि पूरे बिहार की सियासी दिशा भी यहीं से तय होती है।
पटना प्रमंडल का सियासी महत्व:
पटना प्रमंडल बिहार के राजनीतिक नक्शे पर सबसे अहम क्षेत्र माना जाता है। इस प्रमंडल में कुल छह जिले शामिल हैं — पटना, नालंदा, भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर। राजधानी पटना होने के कारण यहां की हर सीट पर सभी प्रमुख दलों की नजर होती है। बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से 43 सीटें पटना प्रमंडल में आती हैं, जो इसे निर्णायक क्षेत्र बनाती हैं।
कितनी सीटें किस जिले में आती हैं:
इस क्षेत्र में सबसे अधिक 14 विधानसभा सीटें पटना जिले में हैं। नालंदा, भोजपुर और रोहतास में सात-सात सीटें हैं, जबकि बक्सर और कैमूर जिलों में चार-चार सीटें आती हैं। यह पूरा प्रमंडल लगभग 16,960 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां का ग्रामीण और शहरी मतदाता दोनों ही चुनावी परिणामों में अहम भूमिका निभाते हैं।
पिछले चुनावों का समीकरण:
2020 के विधानसभा चुनावों में पटना प्रमंडल में एनडीए (NDA) गठबंधन ने मजबूत प्रदर्शन किया था। हालांकि, कई सीटों पर आरजेडी (RJD) और कांग्रेस (Congress) ने भी कड़ा मुकाबला दिया था। इस प्रमंडल के अधिकांश जिलों में एनडीए और महागठबंधन (Mahagathbandhan) के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली थी। इस बार भी स्थिति कुछ ऐसी ही बन रही है, लेकिन कई सीटों पर स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की साख अहम भूमिका निभाएंगे।
इस बार की चर्चित सीटें:
इस प्रमंडल की कई सीटें इस बार चर्चा में हैं, जिनमें फतुहा, बक्सर, आरा, नालंदा, हिलसा, डेहरी और सासाराम जैसी सीटें शामिल हैं। इन सीटों पर बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। खासकर नालंदा और पटना जिले की सीटों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के लिए यह चुनाव साख का सवाल बन चुका है।
चुनाव प्रचार का माहौल:
इन दिनों पूरे पटना प्रमंडल में चुनावी सरगर्मी चरम पर है। जनसभाओं, रोड शो और नुक्कड़ सभाओं का दौर लगातार जारी है। हर पार्टी जनता को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। वहीं मतदाता भी अब उम्मीदवारों के कामकाज और स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखकर फैसला करने की बात कह रहे हैं।
निष्कर्ष:
पटना प्रमंडल बिहार की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा है। यहां के नतीजे अक्सर पूरे राज्य की सियासी दिशा तय करते हैं। ऐसे में 6 और 11 नवंबर को होने वाले मतदान के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार पटना प्रमंडल किसके पक्ष में फैसला देता है।
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