बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों की वोटिंग पूरी हो चुकी है। पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर और दूसरे चरण में 11 नवंबर को 122 सीटों पर मतदान हुआ। अब जब वोटिंग खत्म हो चुकी है, तो मीडिया रिपोर्ट्स और एग्जिट पोल के रुझान राज्य की सियासत में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस बार एनडीए (NDA) को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि महागठबंधन की स्थिति कमजोर होती दिख रही है।
NDA को मिल सकता है बहुमत:
रुझानों के अनुसार, एनडीए (NDA) को 2025 के चुनाव में 20 से 35 सीटों का फायदा हो सकता है। वर्ष 2020 में एनडीए ने 125 सीटें जीती थीं, वहीं इस बार गठबंधन 145 से 160 सीटों तक पहुंच सकता है। एनडीए के भीतर जनता दल यूनाइटेड (JDU) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों ही दलों का प्रदर्शन मजबूत दिख रहा है।
JDU को बड़ा फायदा:
जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने 2020 के चुनाव में 43 सीटें जीती थीं। इस बार पार्टी 59 से 68 सीटों तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि जेडीयू को 16 से 25 सीटों का फायदा हो सकता है। पार्टी की ओर से कई सीटों पर कड़ा मुकाबला होने के बावजूद स्थिति अनुकूल दिख रही है।
BJP भी मजबूत स्थिति में:
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2020 में 74 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार पार्टी 72 से 82 सीटों तक पहुंच सकती है। हालांकि, 8 सीटों पर अब भी कांटे की टक्कर बनी हुई है। भाजपा के बड़े नेताओं का कहना है कि इस चुनाव में संगठन की मेहनत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का असर वोटिंग में साफ दिखा है।
छोटे दलों की स्थिति कमजोर:
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP(R)], हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति मंच (RLM) जैसे दलों का प्रदर्शन कमजोर दिखाई दे रहा है। चिराग पासवान की एलजेपी(आर) 28 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन 4 से 5 सीटों पर ही आगे दिख रही है। जीतन राम मांझी की HAM ने 6 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें से 4 से 5 सीटों पर ही बढ़त है। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा की RLM का खाता खुलना मुश्किल नजर आ रहा है।
महागठबंधन को भारी नुकसान:
महागठबंधन के लिए यह चुनाव नुकसानदेह साबित होता दिख रहा है। वर्ष 2020 में महागठबंधन को 110 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार गठबंधन को 19 से 37 सीटों का नुकसान हो सकता है। अनुमान है कि महागठबंधन की सीटें घटकर 73 से 91 तक रह सकती हैं।
RJD को बड़ा झटका:
राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जो पिछले चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, इस बार नुकसान में नजर आ रही है। 2020 में आरजेडी ने 75 सीटें जीती थीं, जबकि इस बार उसे 12 से 24 सीटों का नुकसान हो सकता है। यह गिरावट महागठबंधन के प्रदर्शन पर गहरा असर डाल सकती है।
कांग्रेस की स्थिति कमजोर:
कांग्रेस ने इस बार 59 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, लेकिन पार्टी सिर्फ 12 से 15 सीटों पर ही आगे दिख रही है। 2020 में कांग्रेस ने 19 सीटें जीती थीं। इसके अलावा विकासशील इंसान पार्टी (VIP), जो 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी, किसी भी सीट पर आगे नहीं है।
लेफ्ट पार्टियों का प्रभाव घटा:
महागठबंधन में शामिल वामपंथी दलों का प्रदर्शन भी इस बार कमजोर रहा है। CPI(ML), जिसने 2020 में 12 सीटें जीती थीं, इस बार 6 से 9 सीटों तक सीमित हो सकती है। वहीं CPI 2 सीटों पर और CPM 1 सीट पर आगे दिख रही है। IIP भी गठबंधन में शामिल है और एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है।
प्रशांत किशोर और AIMIM की स्थिति:
जन सुराज (Jan Suraaj) के प्रमुख प्रशांत किशोर के उम्मीदवार 3 सीटों पर कड़े मुकाबले में हैं, जिससे पार्टी का खाता खुलने की संभावना है। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM केवल एक सीट पर सिमटती नजर आ रही है।
कई सीटों पर कांटे की टक्कर:
राज्य की कई प्रमुख सीटों पर इस बार जोरदार मुकाबला देखने को मिल रहा है। इनमें डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की लखीसराय, मैथिली ठाकुर की अलीनगर, तेजप्रताप यादव की महुआ, रामकृपाल यादव की दानापुर और सम्राट चौधरी की तारापुर सीट प्रमुख हैं।
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