रिपोर्टर: प्रदीप शर्मा
गाजीपुर। भारत मुक्ति मोर्चा (Bharat Mukti Morcha) ने ओडिशा (Odisha) में बामसेफ–भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन की अनुमति रद्द किए जाने के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा करते हुए देशभर के 725 जिलों में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन का आरोप है कि यह कार्रवाई संवैधानिक अधिकारों का हनन है और इसके पीछे RSS (RSS)–BJP (BJP) की भूमिका रही है। इसी क्रम में गाजीपुर (Ghazipur) में जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया।
ओडिशा अधिवेशन रद्द होने पर उठे सवाल:
भारत मुक्ति मोर्चा का कहना है कि ओडिशा में प्रस्तावित बामसेफ–भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन को अंतिम समय में रद्द कराया गया, जबकि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी थीं। संगठन का दावा है कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से होने वाले इस अधिवेशन को रोकना संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। इसी को लेकर देशभर में विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
RSS–BJP पर साजिश का आरोप:
संगठन ने आरोप लगाया कि RSS–BJP के दबाव में प्रशासनिक स्तर पर अधिवेशन की अनुमति रद्द कराई गई। भारत मुक्ति मोर्चा का कहना है कि यह कदम सामाजिक न्याय और समानता की आवाज को दबाने की साजिश का हिस्सा है। संगठन ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि यदि आज एक संगठन के कार्यक्रम पर रोक लगाई जाती है, तो कल किसी भी जनआंदोलन को इसी तरह कुचला जा सकता है।
संवैधानिक अधिकारों के हनन का दावा:
ज्ञापन में कहा गया कि संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण सभा, अभिव्यक्ति और संगठन का अधिकार देता है। अधिवेशन की अनुमति रद्द करना इन अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। भारत मुक्ति मोर्चा ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि संविधान की रक्षा सर्वोच्च संवैधानिक पद की जिम्मेदारी है।
जाति आधारित जनगणना दबाने का आरोप:
भारत मुक्ति मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि जाति आधारित जनगणना की मांग को दबाने के लिए ऐसे आयोजनों को रोका जा रहा है। संगठन का कहना है कि सामाजिक और आर्थिक न्याय के लिए जाति आधारित आंकड़े आवश्यक हैं, लेकिन जानबूझकर इस मुद्दे को हाशिए पर रखने की कोशिश की जा रही है।
ओडिशा सरकार को बर्खास्त करने की मांग:
भारत मुक्ति मोर्चा ने अनुच्छेद 356 के तहत ओडिशा सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है। संगठन का दावा है कि राज्य सरकार संवैधानिक दायित्वों का पालन करने में विफल रही है और लोकतांत्रिक अधिकारों का संरक्षण नहीं कर पा रही है।
गाजीपुर में सौंपा गया ज्ञापन:
गाजीपुर में भारत मुक्ति मोर्चा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए मांग की गई कि अधिवेशन रद्द करने के निर्णय की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
आंदोलन का आगे का कार्यक्रम घोषित:
संगठन ने आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की है। तय कार्यक्रम के अनुसार 15 जनवरी को देशभर के जिला मुख्यालयों पर धरना दिया जाएगा। इसके बाद 22 जनवरी को रैली आयोजित की जाएगी। वहीं 22 फरवरी को नागपुर (Nagpur) स्थित RSS मुख्यालय के सामने विशाल महारैली करने का ऐलान किया गया है।
मांगें न मानी गईं तो चेतावनी:
भारत मुक्ति मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह संघर्ष केवल एक अधिवेशन की अनुमति का नहीं, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का है।
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