पेपर लीक और भर्ती घोटाले में फंसे सुभासपा विधायक बेदीराम की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। लखनऊ के विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट पुष्कर उपाध्याय ने एक दिन पहले ही उनके भी खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। साथ ही उनके एक दिन पहले दिए गए प्रार्थना पत्र को खारिज करते हुए 26 जुलाई को उपस्थिति सुनिश्चित कराने को कहा है।
नीट पेपर लीक में वायरल वीडियो को लेकर विवादों में आए सुभासपा विधायक बेदीराम का नाम अब रेलवे ग्रुप डी के 2006 में हुए पेपर लीक मामले में भी आ गया है। इस मामले में वे निषाद पार्टी के विधायक विपुल दूबे समेत 18 आरोपियों में शामिल है। सुभासपा विधायक का कहना है कि जिस मामले में उनके खिलाफ वारंट जारी किया गया है उस मामले में मैं नियमित उपस्थित हो रहा हूं।
बेदीराम डीपफेक की बात कर रहे हैं, वहां मौजूद पत्रकारों को विधायक जी से दीप फेक की परिभाषा पुछनी चाहिए थी कि चचा ई दीप फेक का होला, कैसे होला? का तोहार कुल मुकदमवा भी फेक बा ? बेदीराम ये क्यों नहीं बताते कि क्या उनके विडियो की जाँच हुई है ? क्या कोई जाँच रिपोर्ट है जिसमे ये कहा गया है कि वो विडियो डीप फेक है? विधायक जी चुनाव लड़ने के लिए जिन दस्तावेजों को जमा करते हैं उसमे उनके सभी मुकदमे का जिक्र है तो क्या वो फेक है ? क्या STF ने रेलवे पेपर लीक मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया था? क्या वो भी फेक है?
बेदीराम का कहना कहना कि उन्हें टिकट समाजवादी पार्टी के उदयवीर ने दिलाया था और ओम प्रकाश राजभर उनके साथ हैं. अब पेपर लीक के आरोप और टिकट बटवारे का क्या सम्बन्ध? अब इस बयान का मतलब क्या समझा जाए? ये भी बड़ा सवाल है? इधर पियरका चचा के बेटे यानि ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरविन्द राजभर ने कहा है कि कोर्ट साबित करेगा कौन सही है और कौन गलत है, जब तक कोर्ट कह नहीं देता हम चपे रहेंगे.
अब यहाँ आरोप लगाया जा रहा है कि बेदीराम को टिकट अखिलेश यादव के कहने पर दिया गया, ये बात 3 इडियट्स फिल्म के उस डायलाक की तरफ है कि “कहना क्या चाहते हो?”.
क्या बेदीराम गलत हैं जो सपा से नाता जोड़ा जा रहा है या बेदीराम सही हैं जो राजभर उनका साथ दी रहे हैं? ये तो आने वाले वक़्त में ही पता चलेगा.

